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धंधे बाजों की भरी घुसपेठ नीट परीक्षा को लेकर एनटीए पर उठे बड़े सवाल

AVINASH CHOUBEY 15-06-2024 17:56:23


नरेन्द्र कुमार वर्मा

(ब्यूरोचीफ, दिव्यदूत, नई दिल्ली)

नई दिल्ली 15/06/2024/// इन दिनों पूरे देश में नीट यानि नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट की पारदर्शिता को लेकर आक्रोश फैला हुआ है। नीट का आयोजन एनटीए यानि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी व्दारा किया जाता है। इस वर्ष 24 लाख छात्रों ने नीट की परीक्षा के लिए अपना पंजीकरण कराया था जिसमें से 23 लाख 33 हजार छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था। नीट की परीक्षा देश में सफल होने के बाद छात्रों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम के लिए सरकारी और गैर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिलता है। है। मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार देश में 2022 तक कुल एमबीबीएस की सीटों की संख्या 1 लाख 9 हजार 145 है। जबकि देश में कुल मेडिकल कॉलेजों की संख्या 706 है जिनमें से 381 सरकारी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज है और 21 निजी मेडिकल कॉलेज है जबकि 258 ट्रस्टों व्दारा संचालिक मेडिकल कॉलेज शामिल है। साल 2019 में मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया व्दारा 2019 में बनाए गए कानून के अनुसार अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च में प्रवेश के लिए भी नीट की परीक्षा ही पास करनी होगी।

नीट की परीक्षा को लेकर हमेशा ही विवाद खड़े होते रहे हैं। एनटीए इस परीक्षा को आयोजित करने का काम करता है। एनटीए यानि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार का एक उपक्रम है जो देश में चोटी की परीक्षाओं का आयोजन कराने का काम करता है। मगर विगत कई वर्षों से एनटीए की परीक्षाओं पर लगातार सवाल खड़े हो रहे है। अगर इसी वर्ष की बात करें तो उत्तर-प्रदेश, तेलांगना, झारंखड़, मध्य प्रदेश,बिहार, राजस्थान, दिल्ली और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के छात्र परीक्षा में धांधली और पेपर लीक की शिकायत को लेकर उच्च न्यायालय पहुंचे हैं। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि नीट का पेपर लीक हुआ था। मगर एनटीए का कहना हैं कि पेपर लीक नहीं हुआ हालांकि कई सेंटरों पर गलत पेपर खुला और कई सेंटरों पर परीक्षा देर से आरंभ हो पाई। निश्चित तौर पर एनटीए की बदइंतजामी के कारण परीक्षा की पवित्रता पर आंच आई और देशभर में बबाल खड़ा हो गया। नीट के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया हैं कि 23 जुलाई को 1563 छात्रों की परीक्षा दोबारा ली जाए। इन छात्रों को एनटीए ने ग्रेस अंक प्रदान किए थे। वहीं दूसरी तरफ छात्रों का कहना हैं कि संपूर्ण परीक्षा को दोबारा आयोजित किया जाए। छात्र सवाल खड़ा कर रहे हैं कि एक ही सेंटर के 6 छात्रों के समान अंक कैसे आए?छात्रों के 718 और 719 नंबर कैसे आए? कई क्वेश्चन के उत्तर एनसीआरटी के हिसाब से सही है मगर एनटीए उस उत्तर को क्यों नहीं मान रहा ? इस तरह के कई अहम सवाल है जिन्हें एनटीए के अधिकारी टाल रहे हैं। वही देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा के बारे में शिक्षामंत्री धमेन्द्र प्रधान ने कहा हैं सरकार पारदर्शी प्रक्रिया के लिए प्रतिबध्द है हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं। अगर परीक्षा में कोई खामी पाई गई तो एनटीए की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

देश में इंजीनियरिंग की परीक्षा के बाद मेडिकल के क्षेत्र में छात्रों का सबसे ज्यादा रुझान रहता है। मेडिकल परीक्षा की तैयारी के लिए छात्र दो साल तक लगातार तैयारियां करते हैं। मगर हर बार धांधलियों की शिकायत से छात्रों का भरोसा टूट जाता है। वहीं दूसरी तरफ एनटीए का कहना हैं कि नीट जैसी बड़ा परीक्षा कराने से पहले वह तमाम तरह की गाइडलाइंस का पालन करता है। पूरे फूल प्रूफ प्लान के साथ परीक्षा का आयोजन किया जाता है। एनटीए के पास राष्ट्रीय परीक्षा कराने का पूरा अनुभव और तंत्र है मगर फिर भी परीक्षा में किसी न किसी चरण पर लीकेज हो ही जाती है। जाहिर है इस तरह की खबरों के बाद छात्रों के साथ ही उनके माता-पिता के मनोबल पर इसका गलत असर पड़ता है। अभिभावकों का कहना हैं कि जब यूपीएससी और एनडीए जैसी परीक्षाएं बिना किसी त्रुटि के पूरी कराई जाती है तो फिर नीट को लेकर एनटीए के समक्ष क्या चुनौती है?

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