नरेन्द्र कुमार वर्मा
(ब्यरोचीफ दिव्यदूत, नई दिल्ली)
नईदिल्ली //11/06/2024/// बीते 2024 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता परदे के पीछे रह कर पार्टी के लिए रणनीति बनाने का काम रहे थे। बीजेपी महासचिव सुनील बंसल उन्हीं में से एक हैं।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर सुनील बंसल का नाम भी चर्चाओं में है।सुनील बंसल को उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों की राजनीति की गहरी समझ है। भारतीय जनता पार्टी की भाषा में जिन राज्यों को कॉउ बेल्ट या हिंदी पट्टी के राज्य कहा जाता है। वहां के सारे राजनीतिक और सामाजिक गणित को सुनील बंसल अच्छी तरह से समझते है। साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2019 में उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनावों की सारी रणनीति सुनील बंसल ने ही बनाई थी।
सुनील बंसल की एंट्री भाजपा में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से हुई। उन्होंने संघ के प्रचारक के तौर पर लंबा कार्य किया। जिसके बाद उनकी भाजपा की सक्रिय राजनीति में एंट्री हुई। उन्हें उत्तर प्रदेश में पार्टी का संगठन महामंत्री बना कर भेजा गया। यूपी पहुंच कर उन्होंने संगठन में प्राण फूंकने का काम किया। विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने हर मतदान केंद्र पर पन्ना प्रमुख का एक ऐसा पद इजाद किया जो चुनावों में जीत का सूत्रधार बनें। उत्तर प्रदेश में सुनील बंसल ने लंबा समय व्यतीत किया। इस दौरान उन्होंने योगी सरकार के पहले कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण जनउपयोगी योजनाओं को लागू कराया। जिसके बाद ही भाजपा 2022 में दोबारा उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई। उत्तर प्रदेश में आठ वर्ष रहने के बाद सुनील बंसल राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर भाजपा की सक्रिय राजनीति में दाखिल हुए। लोकसभा चुनावों से पहले ही उन्हें ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल का प्रभार सौंपा दिया गया था। उन्होंने ओडिशा में नवीन पटनायक के किले में सेंध लगा कर वहां ऐसी मोर्चेबंदी की जिसके बाद विधानसभा से बीजद का सूपडा ही साफ हो गया। लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।
इसी तरह पार्टी को तेलांगना लोकसभा चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन के लिए तैयार करने में भी उनकी भूमिका रही। तेलांगना में उन्होंने इस तरह के टिकटों का बटंवारा कराया कि भाजपा का वोटर इधर उधर न हो पाए। और जातिय गणित के माध्यम से भी जनता में अच्छा संदेश जाए। तेलंगना में भाजपा को जिस तरह का जनसमर्थन मिला उसके पीछे सुनील बंसल की ही सोच थी। वह बूथ स्तर से लेकर वार्ड और मंड़ल स्तर पर कार्यकर्ताओं की श्रेणिया बनाने के माहिर है। उनका कहना हैं कि अगर हमारा बूथ मजबूत रहा तो हम चुनाव जीत सकते है इसलिए बूथ प्रबंधन सबसे ज्यादा जरूरी है।
सुनील बंसल ने भाजपा के किसी भी प्रभारी से ज्यादा अच्छा रिजल्ट दिया। उनकी रणनीति एवं राजनीतिक सोच का लोहा अमित शाह और नरेन्द्र मोदी भी मानते हैं। भाजपा के नए संगठन की पटकथा तेजी से लिखी जा रही है। आने वाले 60 दिनों के भीतर पार्टी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर जिन लोगों का नाम चल रहा है उनमें सुनील बंसल का नाम भी प्रमुख है। वह अमित शाह के भरोसे के आदमी है और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी उन पर आंख बंद विश्वास करता है।




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