पटना 03/06/2024/// जल-जीवन-हरियाली अभियान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा रहा है। दुनिया में पर्यावरण के प्रति गंभीरता और जागरुकता फैलाना इसका खास मकसद रहा है। पर्यावरण की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए यथासंभव प्रयास करने और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करने का मुख्यमंत्री का अभियान प्रशंसनीय रहा है। राज्य को हरित प्रदेश बनाने के साथ ही ग्राउंड वाटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्राकृतिक जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार का उनका भगीरथ प्रयास पूरी दुनिया के लिए नज़ीर बना हुआ है।
पूरा देश आज भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान से जद्दोजहद कर रहा है। कोई ऐसा दिन नहीं बीत रहा जब सुबह से ही ज़िंदगी की जंग शुरु नहीं हो रही हो। लगभग सभी राज्यों में बढ़ते तापमान के कारण लोगों का काफी बुरा हाल है। सुबह होते ही घरों में रहना भी मुश्किलों से भरा होता जा रहा है। कामकाज के लिए स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा, गया, औरंगाबाद, पूर्वी चंपारण, सारण, गोपालगंज समेत मिथिलांचल और सीमांचल के जिलों में भी स्थिति एक जैसी बनी हुई है।
सुबह में ही तापमान 35-36 डिग्री के आसपास हो जा रहा है। दिन चढ़ते ही 46 और 47 डिग्री सेल्सियस के आसपास पारा बना रहता है। अभी अगले दस दिनों तक ऐसी ही स्थिति रहने वाली है। भले ही राज्य सरकार ने स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी हो। आपदा प्रबंधन विभाग की एडवाइजरी के हिसाब से काम हो रहा हो लेकिन वास्तविक स्थिति भयावह बनी हुई है। इस स्थिति में मुख्यमंत्री के प्रयासों की याद गंभीरता से आने लगी है। बिहार में मुख्यमंत्री ने हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में गंभीर प्रयास किया है।
झारखंड से बिहार के बंटवारे के बाद हरित आवरण चिंताजनक थी जो केवल 9 प्रतिशत के आसपास था, जिसे गंभीर प्रयासों से आज 15 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचाया गया है। मुख्यमंत्री इसे 17 प्रतिशत करने का संकल्प ले चुके हैं। इसी तरह प्राकृतिक जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार का भगरीथ प्रयास भी इस दिशा में प्रभावी रहा है। मुख्यमंत्री ने जल-जीवन-हरियाली अभियान की सफलता के लिए जल-जीवन-हरियाली यात्रा भी शुरु की। इस अभियान को मुख्यमंत्री ने वर्ष 2019 में शुरु किया था और इसमें 11 अवयवों को शामिल किया गया था।
कई जिलों में भूजल स्तर में गिरावट के बाद लोगों के बीच पेयजल की चिंता बढ़ रही है। देश में वर्षापात की कमी भी लगातार देखी जा रही है। पिछले तीस वर्षों में राज्य में वार्षिक वर्षापात 1027 मिलीमीटर से घटकर 900 मिलीमीटर रह गया है। इस स्थिति में खेत एवं किसान की चिंता की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। उसपर बढ़ते तापमान के कारण किसानों की फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। बिहार के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण है इस स्थिति में बिहार के लिए चिंता भी व्यापक है।




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