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दलितों की महिलाओं की मसीहा थी मिनीमाता

Anil Choubey 11-08-2019 07:41:50


मिनीमाता की पुण्यतिथि 11 अगस्त पर विशेष

रायपुर, // छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद मिनीमाता को दलितों एवं महिलाओं के उत्थान के लिए किए गए कार्यों के लिए सदा याद रखा जाएगा। असम में जन्मी मिनीमाता ने अपनी कर्मभूमि छत्तीसगढ़ को बनाया। अविभाजित मध्यप्रदेश में बिलासपुर-दुर्ग-रायपुर आरक्षित सीट से लोकसभा की प्रथम महिला सांसद चुनी गईं। इसके बाद परिसीमन में अस्तित्व में आई जांजगीर सीट से उन्होंने लगातार चार बार प्रतिनिधित्व किया। 

 

मिनीमाता ने संसद में अस्पृश्यता विधेयक को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रदेश की महिलाओं को एक नई पहचान दी। उनके नाम पर राज्य में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है। 

 

मिनीमाता का मूल नाम मीनाक्षी देवी था। उनका जन्म 13 मार्च 1913 को असम राज्य के दौलगांव में हुआ। वे बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में तेज थीं। उनको असमिया, अंग्रेजी, बांगला, हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषा का अच्छा ज्ञान था। वह सत्य, अहिंसा एवं प्रेम की साक्षात् प्रतिमूर्ति थीं। उनका विवाह गुरूबाबा घासीदास जी के चौथे वंशज गुरू अगमदास से हुआ। विवाह होने के बाद वे छत्तीसगढ़ आ गईं, तब से उन्होंने इस क्षेत्र के विकास के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। गुरू अगमदास जी महान देशभक्त थे। मिनीमाता ने उनकी प्रेरणा से स्वाधीनता के आंदोलन, समाजसुधार और मानव उत्थान कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मिनीमाता की राजनीतिक सक्रियता और समर्पण से समाज उत्थान के उद्देश्य एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए पीड़ितों के अधिकार हेतु संसद में अनेक कानून बने। मिनीमाता का देश के शीर्षस्थ राजनायिकों जिनमें प्रमुखतः प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, पंड़ित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, पंड़ित रविशंकर शुक्ल सहित अनेक राजनायिकों से आत्मीय संबंध रहे।  

 

  राज्य में हसदेव बांगो बांध को मिनीमाता के नाम से पहचान दी गई। इससे किसानों को हजारों एकड़ में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई। उन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थानीय लोगों को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करने की दिशा में पहल की। ममतामयी मिनीमाता ने सतनामी समाज को अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलवाई। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिनीमाता की स्मृति में समाज एवं महिलाओं के उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिनीमाता सम्मान की स्थापना की गई है। स्वतंत्रता पश्चात लोकसभा का प्रथम चुनाव 1951-52 में सम्पन्न हुआ। मिनीमाता सन् 1951 से 1971 तक सांसद के रूप में लोकसभा की सदस्य रहीं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित जांजगीर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंची। मिनीमाता ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। सरल एवं सहज व्यक्तित्व की धनी इस महिला ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने शासन-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर मानव कल्याण, नारी उत्थान, किसान, मजदूर, छूआ-छूत कानून, बाल विवाह, दहेज प्रथा, निःशक्त व अनाथों के लिए आश्रम, महिला शिक्षा और छत्तीसगढ़ के लिए आंदोलन जैसे जनहित के अनेक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मिनीमाता ने दलितों के नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अस्पृश्यता अधिनियम को संसद में पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा एक कदम आगे जाते हुए मजदूरों को एकजुट करने के लिए मिनीमाता ने छत्तीसगढ़ मजदूर संघ का गठन किया। मिनीमाता गरीब, दीन-दुखियों के अलावा आमजनों की समस्याओं को गंभीरता से लेती थीं और उनकी मदद के लिए हर स्तर पर प्रयास करती थीं। उनके लगन, उत्साह और कड़ी मेहनत के साथ सादगीपूर्ण जीवनशैली के सभी वर्ग के लोग कायल थे। 

 

कोरबा लोकसभा क्षेत्र में मिनीमाता की यादों को चिर-स्थायी बनाने के लिए यहां के शासकीय कन्या महाविद्यालय के परिसर में मिनीमाता की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है।

  

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