“”स्वस्थ मंत्री
ने आज डाक्टर रमन सिग को सर्टीफिकेट जारी करते हुए कहा कि इन्हे इच्छा मृत्यु का
वरदान प्राप्त है साथ ही कहा कि महाभारत में सबसे शक्तिशाली भीष्मपितामह थे उन्हें
भी यही वरदान प्राप्त था यह कैसी तारीफ है ?
मंत्री जी ने महाभारत का जिक्र किया तो भीष्मपितामह के एक और
कैरेक्टर का भी जिक्र तो बनता है कि उन्हें शिखंडी भी कहा जाता है कारण जब दोर्पदी
का चीर हरण हो रहा था तो वो उसे मूकदर्शक की तरह देखते रह गए पितामह कौरवों की और
से थे जहां अन्याय अराजकता के साथ शकुनी जैसे मामा और धृतराष्ट्र जैसे राजा थे जो
पुत्र मोह से ग्रसित थे मंत्री जी कहना क्या चाहते हैं कि छत्तीसगढ का चीरहरण होता
रहे और पितामह देखते रहे’’’’
आज
फेसबुक पर एक मेमोरी
पोस्ट जो 10 अगस्त अट्ठारह को मैंने लिखा थी उस पर आज मैं विशेष कमैंट्स लिख रहा हूं यह पोस्ट स्वास्थ्य मंत्री अजय
चंद्राकर के उस बयान
पर था जिसमें उन्होंने डॉ रमन सिंह को भीष्म
पितामह बताते हुए कहा था कि नहीं इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त है इसका मतलब यह
था कि जब तक यह चाहेंगे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने रहेंगे भाजपा सरकार उस वक्त
इस प्रकार की भाषा का उपयोग सार्वजनिक तौर पर कर रहे थी जनता देख रही थी सुन भी रहे थी
भ्रष्टाचारी मंत्री,
विधायक ,मंडल अध्यक्ष, तमाम भाजपा के नेता
भगवा गमछा डाल कर सड़कों पर तांडव कर रहे थे उस पर डॉ रमन सिंह का कोई कंट्रोल नहीं था डॉ रमन सिंह स्वयं भ्रष्टाचार में फंसे हुए थे और उनके चारों तरफ जितने भी सत्ता सुख भोगी थे सब के सब छत्तीसगढ़
को लूटने में लगे हुए थे कांग्रेस अपनी
चुनावी रणनीति
बनाने में व्यस्त थी इधर रमन सिंह और उनकी
कंपनी कोअहंकार प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था आमजन चुनाव का
इंतजार कर रहा था बड़ी ही असमंजस की स्थिति थी भा जा पा पूरे आत्मविश्वास से भरी
थी कि डॉ रमन सिंह के नेतृत्व में चौथी बार फिर हम सत्ता में आएंगे और इसी तरीके
से अहंकारी शासन चलाएंगे
वक्त बिता चुनाव हुए
जनता ने रमन सिंह को
कांग्रेस के सिर्फ एक वादे से धराशाई कर दिया
वह वादा कर्ज माफी का था जिसने डॉ रमन सिंह की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया यह बात भी सही है कि यदि यह चुनावी वादा काँग्रेस
नहीं करती तो शायद यह अहंकारी सरकार फिर से गद्दी पर बैठ जाती लेकिन छत्तीसगढ़ की धरती की यह खासियत है कि इस
धरती के साथ जिसने भी
अति की वह हाशिए पर अपने आप चला जाता है ऐसे
बहुत से उदाहरण हैं इस धरती से जुड़े हुए जिनमें प्रमुख रूप से पंडित द्वारका
प्रसाद मिश्र जगदलपुर गोलीकांड के हीरो विद्याचरण अपने आप में उस वक्त सर्वोपरि थे
अजीत प्रमोद जोगी जो
जातिगत वैमनस्यता फैलाकर छत्तीसगढ़ में राज
करना चाहते थे वह भी हाशिए पर है सत्यनारायण शर्मा जो कभी संयुक्त मध्य प्रदेश मैं
कद्दावर मंत्री होते थे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कह
लाए जाते
थे आज भी हाशिए में हैं
छत्तीसगढ़ महतारी का स्वभाव है यहां रहने वाला
जनमानस सरल,सज्जन और डरपोक हैं इन्हें यदि ज्यादा सताया गया तो वह खुद परोक्ष रूप से छत्तीसगढ़ महतारी सामने आकर अपने आप
अहंकारीर्यों को निपटा
देती है




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