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नरेन्द्र कुमार वर्मा
(दिव्यदूत ब्यूरोचीफ, नई दिल्ली)
दिल्ली 22/o3/2024 //// आबकारी घोटाले में बुरी तरह घिरे अरविंद केजरीवाल आखिरकार जेल पहुंच ही गए। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया मगर अदालत ने भी इस मामले में उन्हें कोई राहत नहीं दी। ईडी के समन के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन ने जब प्रवर्तन निदेशालय की पत्रावली को पढ़ा तो उच्च न्यायालय की पीठ ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने से साफ इनकार कर दिया। गुरुवार 21 मार्च की शाम 4 बजे जैसे ही अरविंद केजरीवाल को पता चला कि उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी को टालने से मना कर दिया तो उनके आवास पर मायूसी छा गई। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रवर्तन निदेशालय की टीम 7 बजे दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारियों को लेकर मुख्यमंत्री के सिविल लाइन स्थित आवास पहुंची तो सारी स्थिति स्पष्ट हो चुकी थी कि आज अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी निश्चित है।

साल 2021 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह कहते हुए दिल्ली की नई आबकार नीति की घोषणा की थी कि देश में सबसे अच्छी आबकारी नीति उनकी सरकार ने बनाई है। दिल्ली के आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया ने नई आबकारी नीति लागू करने की घोषणा करते हुए बताया कि इस नीति से सरकार को हर साल करोड़ो रुपया अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ती होगी। मगर उनकी ही सरकार के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति की हवा यह कहते हुए निकाल दी कि इस नीति में दिल्ली का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला किया गया है। देखते ही देखते नरेश कुमार का बयान अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खिया बन गया। हंगामा खड़ा होने के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल ने सीबीआई को इस आबकारी घोटाले की जांच करने को आदेश दे दिया। कांग्रेस के जो नेता आज अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं। नवंबर 2022 में कांग्रेस लोग केजरीवाल के खिलाफ आबकारी घोटाले को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। सीबीआई ने इस मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित 13 अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। जबकि प्रवर्तन निदेशालय ने इस आबकारी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।
सीबीआई और ईडी व्दारा इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया उनमें से कई सरकारी गवाह बन चुके हैं। इससे पहले ईडी व्दारा अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के लिए 10 बार समन भेजे गए थे। 2 नवंबर 2023 को अरविंद केजरीवाल के पास ईडी ने पहला समन भेजा था। मगर हर बार अरविंद केजरीवाल ने यह कहते हुए ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया था कि उन्हें राजनीति के कारण परेशान किया जा रहा है।
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आम आदमी पार्टी भष्टाचार के खिलाफ मुहिम के बाद वजूद में आई थी। समाज सेवी अन्ना हजारे की अगुवाई में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने वाले अरविंद केजरीवाल साफ-सुथरी और पारदर्शी राजनीति का नाम लेकर दिल्ली में सत्ता में आए थे। अन्ना हजारे ने भी सार्वजनिक तौर पर केजरीवाल के मामले पर बात करने से मना कर दिया। वह कहीं न कहीं अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। वहीं दिल्ली की सत्ता पर काबिज होते ही केजरीवाल ने अन्ना से कन्नी काट ली और अपने सभी पुराने वादे और बयानों को भी झुठला दिया। भ्रष्टाचार के मामले में उनकी सरकार को मोहल्ला क्लिनिक, पीडब्ल्यूडी, स्कूल निर्माण, आबकारी नीति, जल बोर्ड, पोस्टिंग ट्रांस्फर, नकली दवा आपूर्ति, नकली मरीज जांच,टीचर भर्ती, वक्फ बोर्ड भर्ती और महिला आयोग में भर्तियों को लेकर घोटाला करने के आरोप लगे। मगर सभी आरोपों को उन्हें राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के वक्त अन्ना हजारे के साथ वह जिन नेताओं के भ्रष्टाचार की फाइल लेकर घूमते थे उनके साथ उन्होंने गठबंधन करके जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को भी नकार दिया। दिलचस्प बात तो यह हैं कि जिन विपक्षी नेताओं को वह पानी-पी-पी कर कोसते थे आज उनके साथ टी-पार्टी और लंच करते नजर आते हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी घोटाले के साथ ही जल बोर्ड घोटाले में भी केंद्रीय एजेंसियों की पूछताछ का सामना करना है। सूत्रों का कहना हैं कि ईडी के पास केजरीवाल और उनके साथियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य है। इस मामले में जो सरकारी गवाह बने हैं उन लोगों ने मनी लान्ड्रिंग की पूरी ट्रेल को सीबीआई और ईडी के समक्ष बयान किया है। ऐसे में आम आदमी पार्टी के जो नेता जेल में बंद है उनके सामने खासी मुश्किल की घड़ी है। अरविंद केजरीवाल के गिरफ्तार होने के बाद यह मुश्किल और ज्यादा बढ़ चुकी है।
(लेखकः दिव्यदूत के नई दिल्ली ब्यूरो चीफ हैं)




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