नई दिल्ली 20/03/2024 /// सुप्रीम कोर्ट ( SC ) ने होने वाले लोकसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सौगातों और सुविधाओं का वादा करने के चलन के खिलाफ एक याचिका पर सहमति जताई है.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सौगातों और सुविधाओं का वादा करने के चलन के खिलाफ एक जनहित याचिका को बुधवार ( 20 मार्च ) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है. 19 अप्रैल से शुरू होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. जनहित याचिका में निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, कि वह ऐसे राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने और चुनाव चिह्न जब्त करने के अपने अधिकारों का उपयोग करें.
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने बुधवार ( 20 मार्च ) को कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है. शीर्ष अदालत ने जनहित याचिका दायर करने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया की दलीलों पर संज्ञान लिया कि याचिका पर लोकसभा चुनाव से पहले सुनवाई की जरूरत है.
याचिका में कहा गया कि मतदाताओं से अनुचित राजनीतिक लाभ पाने के लिए लोक-लुभावन घोषणाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध होना चाहिए, क्योंकि ये संविधान की अवहेलना करते हैं, और इस मामले में निर्वाचन आयोग को उचित कदम उठाने चाहिए.
इसमें अदालत से यह घोषित करने का भी अनुरोध किया गया है, कि चुनाव से पहले सार्वजनिक धन से अतार्किक तरीके से मुफ्त सौगातों का वादा मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित करता है. समान अवसर को अवरुद्ध करता है और चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को नुकसान पहुंचाता है.
याचिका के अनुसार, ‘‘याचिकाकर्ता का कहना है, कि चुनावों को ध्यान में रखते हुए मुफ्त सुविधाएं देकर मतदाताओं को प्रभावित करने की राजनीतिक दलों की हालिया प्रवृत्ति न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है, बल्कि संविधान की भावना को भी चोट पहुंचाती है.
उसने कहा, ‘‘यह अनैतिक प्रवृत्ति सत्ता में बने रहने के लिए सरकारी खजाने से मतदाताओं को रिश्वत देने के समान ही है और लोकतांत्रिक सिद्धांतों तथा परंपराओं के संरक्षण के लिए इससे बचना चाहिए. याचिका में निर्वाचन आयोग को चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के संबंधित पैराग्राफ में एक अतिरिक्त शर्त जोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.
यह पैराग्राफ किसी राज्य स्तरीय पार्टी के रूप में मान्यता की शर्तों से संबंधित है. याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से यह घोषित करने का अनुरोध किया है, कि चुनाव से पहले निजी वस्तुओं या सेवाओं का वादा या वितरण, जो सार्वजनिक धन से सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए नहीं होती हैं, संविधान के अनुच्छेद 14 सहित कई अनुच्छेदों का उल्लंघन है.
देश में आठ मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतक दल हैं और 56 राज्य स्तरीय मान्यताप्राप्त दल हैं. देश में पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की कुल संख्या करीब 2,800 है.




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