नई दिल्ली 18/03/2024/ Electoral Bond Case: सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बॉन्ड पर सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का पारा चढ़ गया. सोमवार को उन्होंने प्रोसेस फॉलो न करने वाले सीनियर एडवोकेट्स को कड़ी फटकार लगाई. पहले सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी सीजेआई के कोपभाजन का शिकार हुए. फिर एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्परा की ऊंची आवाज ने सीजेआई सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़
को नाराज कर दिया. सीजेआई ने उनसे बेहद तल्ख लहजे में कहा, 'मुझ पर चिल्लाओ मत! यह अदालत है, नुक्कड़ सभा नहीं.' रही-सही कसर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने टोका-टाकी करके पूरी कर दी. कोर्ट ने तीनों वकीलों को लताड़ा और फिर मामले में निर्देश जारी किए. दरअसल, सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही रोहतगी ने खड़े होकर कहा कि वह FICCI और ASSOCHAM की ओर से पेश हो रहे हैं और आवेदन दायर किया है. सीजेआई ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई आवेदन नहीं मिला है. रोहतगी ने फिर कुछ कहा तो सीजेआई चंद्रचूड़ बोल पड़े कि आप फैसला होने के बाद आए हैं, हम आपको अभी

रोहतगी के बाद उनके पास खड़े एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्परा ने SC के फैसले पर ही सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि पूरा फैसला नागरिकों की पीठ पीछे सुनाया गया. सीजेआई ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो वह नहीं रुके. अचानक सीजेआई का लहजा सख्त हो गया और उन्होंने कहा कि 'मुझ पर चिल्लाओ मत! यह कोई नुक्कड़ सभा नहीं, अदालत है. अगर आपको ऐप्लिकेशन मूव करना है तो ऐप्लिकेशन फाइल कीजिए. यही हमने मिस्टर रोहतगी से भी कहा है.' जब इसके बावजूद नेदुम्परा चुप नहीं हुए तो जस्टिस बीआर गवई ने पूछा, 'आप कंटेम्प्ट नोटिस चाहते हैं?'
अभी नेदुम्परा बैठ भी नहीं पाए थे कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े SCBA अध्यक्ष आदिश अग्रवाल बीच में कूद पड़े. उन्होंने सुओ मोटो रिव्यू के लिए अपनी याचिका का जिक्र किया. सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़
ने उन्हें भी चेतावनी देते हुए कहा कि 'मिस्टर अग्रवाल, आप सीनियर एडवोकेट होने के साथ-साथ SCBA के अध्यक्ष भी हैं. आपको प्रक्रिया पता है. आपने मुझे एक पत्र लिखा था. यह सब पब्लिसिटी के लिए है और हम इसकी इजाजत नहीं देंगे. प्लीज इसे वहीं तक रखिए नहीं तो मुझे कुछ ऐसा कहना पड़ जाएगा जो अप्रिय होगा.'
इलेक्टोरल बॉन्ड: SBI को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को जिस तरह चुनावी बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारी का खुलासा करना था, उसने नहीं किया. अदालत ने SBI से बॉन्ड के यूनिक नंबर्स का डेटा भी बताने को कहा. SBI चेयरमैन को गुरुवार (21 मार्च) की शाम 5 बजे तक का समय दिया गया. उससे पहले उन्हें हलफनामा दायर कर यह घोषित करना होगा कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सारी जानकारी दी जा चुकी है और कुछ भी छिपाया नहीं गया है. चुनाव आयोग SBI से मिली जानकारी को बाद में अपलोड करेगा.




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