नरेन्द्र कुमार वर्मा
(दिव्यदूत, ब्यूरोचीफ, नई दिल्ली)
नई दिल्ली //10 03/2024/// प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण करने के लिए जाने जाते हैं। 9 फरवरी 2019 में नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में सेला सुरंग की आधरशिला रखी थी। 9 मार्च 2024 को उन्होंने दुनिया की इस सबसे ऊंचाई पर स्थित सुरंग का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री जब इस सुरंग का लोकार्पण करने पहुंचे तो अरुणाचल प्रदेश की जनता बड़ी संख्या में उन्हें सुनने के लिए पहुंची वहां पहुंची थी।सामरिक महत्व वाली सेला सुंरग भारतीय सेना के लिए जीवनरेखा का काम करेगी।बरसात और बर्फबारी के मौसम में यह मार्ग भारतीय सेना को एलएसी यानि वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पहुंचने में मदद करेगी। सबसे खास बात यह हैं कि अरुणाचल प्रदेश का तवांग जिला बरसात और बर्फबारी के मौसम में शेष राज्य से कट जाता था। यहां बर्फबारी के समय डीजल भी जम जाता था और स्थानीय तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता था। इस सुरंग के निर्माम के बाद अब चौबिस घंटे सातों दिन अरुणाचल प्रदेश के शेष हिस्से के संपर्क में रहेगा। सड़क सीमा संगठन यानि बीआरओ के इंजीनियरों ने इस सुंरग का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा किया है।
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दो लाइनों वाली इस सुरंग के निर्माण में 825 करोड़ रुपया खर्चा हुआ जबकि 650 से अधिक मजदूरों ने दिनरात यहां काम किया। 13 हजार फुट की ऊंचाई पर बनी यह सुरंग दुनिया की सबसे लंबी दो लेन वाली सुरंग है। जिसके निर्माण में 71000 मीट्रिक टन सीमेंट और 5000 मीट्रिक टन स्टील का प्रयोग किया गया। बीआरओ ने इस सुरंग का निर्माण दो हिस्सों में किया है। जिसका एक हिस्सा 980 मीटर लंबा और दूसरा हिस्सा 1555 मीटर लंबा है। दोनों सुरंगों के बीच 1200 मीटर की एक लिंक रोड भी बनाई गई है। दुनिया की सबसे ऊंचाई पर बन इस सुरंग में प्राकृतिक और बिजली की रोशनी की भी शानदार व्यवस्था है। किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों के इस सुरंग से बाहर निकलने की सुविधा भी है।
अरुणाचल प्रदेश के विकास के लिए सेला सुरंग मील का पत्थर साबित होगी। तवांग तक जान जोखिम में डालकर जाने वाले पर्यटकों, सेना के जवानों और स्थानिय नागरिको को इस सुरंग के निर्माण से सबसे अधिक फायदा होगा। हर मौसम में अब व्यापारिक वाहन इस सुरंग से फर्राटा भरेंगे। अरुणाचलप्रदेश परिवहन विभाग के एक अनुमान के अनुसार सेला सुरंग से हर रोज 3 हजार कारे और 2 हजार कर्मिशियल वाहन गुजरेंगे। भारतीय सेना को चीन की सीमा पर तैनात अपने सैनिकों को सामान पहुंचाने में बेहद सुगमता होगी। अरुणाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि जो काम 70 वर्षों से नहीं हुआ उसे केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने 5 वर्ष में करके दिखा दिया। अब बालीपारा, चारिव्दार, तवांग की कनेक्टिविटी और यात्रा के समय में भारी बचत होगी।
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सेला सुरंग के निर्माण का सबसे बड़ा फायदा तेजपुर (असम) के व्यापारियों को मिलेगा। जिनका माल अब सीधे अरुणाचल प्रदेश पहुंचने में आसानी होगी। भारत माला प्रोजेक्ट और अरुणाचल प्रदेश फ्रंटियर हाईवे प्रोजक्ट के तहत बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने इस सुरंग का निर्माण किया है। अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन से जुड़े कारोबारियों का कहना हैं कि सेला सुरंग के खुल जाने से राज्य में पर्यटकों की संख्या दो गुना होने की संभावना है। चीन और भूटान की सीमा के नजदीक स्थित सेला सुरंग सामरिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। वास्तव में भारत ने बर्फ की दीवार के उस पार रास्ता बना कर मौसम की चुनौती पर भी विजय प्राप्त कर ली है।




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