साक्षात्कार
नरेन्द्र कुमार वर्मा दिव्यदूत
किरण चुक्कापल्ली सामाजिक कार्यकर्ता योग और आध्यात्म गुरु
नईदिल्ली/// 01 03/ 2024 // देशभर में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश से आने वाले हिंदू शरणार्थियों की अनेक अस्थायी बस्तियां है। इन बस्तियों में रहने वाले हिंदू शरणार्थियों की हालत बहुत खराब है। ऐसे लोगों के जीवन को सुगम बनाने और उन्हें शरणार्थी कार्ड प्रदान करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता और योग आध्यात्म के गुरु किरण चुक्कापल्ली लंबे अरसे से अकेले काम कर रहे हैं। पिछले दिनों वह दिल्ली में पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों की बस्ती में ठहरे थे। जहां उनसे मुलाकात दिव्यदूत के दिल्ली स्थित ब्यूरोचीफ नरेन्द्र कुमार वर्मा से हुई। पेश है किरण चुक्कापल्ली जी से बातचीत के संपादित अंश।
सवालः किरण जी आप कब से हिंदू शरणार्थियों के बीच में काम कर रहे है और इनकी दशा सुधारने का विचार आपको कब आया।
उत्तरः मैं पिछले एक दशक से हिंदू शरणार्थियों के बीच रहकर कार्य कर रहा हूं। मैं इनके साथ बस्ती में ही रहता हूं। इनके बच्चों को भारत में शिक्षा के लिए प्रयास करता हूं। बच्चों के दाखिला के लिए स्कूलों में सपंर्क करता हूं। और सबसे बड़ी बात यह हैं कि इन लोगों को जीवन-यापन के लिए किसी रोजगार से जोड़ने का काम करता हूं। दरअसल मैं दस साल पहले हिमालय की यात्रा के बाद गुजरात के प्रवास पर था जहां मैंने देखा कि पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों की बस्तियों में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है और वह लोग बहुत खराब स्थित में वहां रह रहे हैं। इसके बाद मैंने इन लोगों पर अध्ययन करना आरंभ किया तो पाया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश से आने वाले हिंदूओं के शरणार्थि शिविर गुजरात, राजस्थान, बंगाल, दिल्ली और अरुणाचल प्रदेश तक में है। इस अध्ययन के बाद मैंने इनके लिए काम करना आरंभ किया।
सवालः आप किस तरह से इन लोगों की मदद करते हैं और इसके लिए फंड की व्यवस्था कैसे होती है।
उत्तरः हम मुख्यतःइनके रहने वाले स्थान पर पेयजल, साफ-सफाई, बिजली, रहने की सही व्यवस्था, शौचालय और बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था पर काम करते हैं। स्थानीय प्रशासन से मिलकर जो संभव हो पाता है वह व्यवस्था करवाने का प्रयास करते है और इनके बच्चों को स्थानिय स्कूलों में दाखिले के लिए बातचीत करके उन्हें स्कूल में भेजते है। फंड की व्यवस्था के लिए मैं स्वयं के संसाधनों से फंड एकत्र करता हूं। इसके लिए मैं विदेशी प्रवास के दौरान योग और भारतीय वैदिक धर्म की जानकारी की कक्षाए देने का काम करता हूं और वहां से जो धनराशि प्राप्त होती है उसका उपयोग इन लोगों के बीच करने का काम करता हूं।
सवालः पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश से आने वाले हिंदू शरणार्थियों में मुख्यतः किन लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।
उत्तरः देखिए यह बहुत अच्छा सवाल है इन सभी देशों से बड़ी संख्या में दलित भाई भारत आते हैं। उन देशों में इन लोगों की स्थिति बहुत चिंताजनक हैं। इन देशों में इनके साथ बहुत खराब व्यवहार होता है। खासतौर पर इनकी बच्चियों को विधर्मी उठाकर ले जाते है और धर्म परिवर्तन करवा कर उनके साथ जबरदस्ती निकाह कर लेते है। वहां न लोगों के पास जमीन और घर भी नहीं है। यह लोग वहां बहुत खराब स्थिति में रहते है। कुछ पैसा जोड़कर वैध वीजा लेकर यह लोग इस उम्मीद में भारत आते हैं कि यहां उन्हें शरण मिलेगी। इज्जत मिलेगी। रोजगार मिलेगा। मगर यहां भी उन्हें धक्के ही खाने पड़ते है। भारत के पड़ोसी देशों से आने वाले हिंदू शरणार्थियों की स्थिति वहां बहुत खराब है। यह लोग सबकुछ छोड़कर भारत आते है मगर हम इनके लिए कुछ नहीं कर पाते। देश में दलितों के लिए आवाज उठाने वाले संगठन भी इनके लिए एक शब्द भी नहीं बोलते।
सवालः आप इन लोगों के बीच किस तरह से काम करते हैं।
उत्तरः हम कई चरणो में इनके लिए काम करते है। पहले हमारा प्रयास होता हैं कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक भारत में शरणार्थी कॉर्ड प्राप्त हो जाए। दूसरा हमारा प्रयास होता है कि इनके रहने के स्थान पर मूलभूत सुविधाओं का विकास हो पाए। तीसरा हमारा प्रयास रहता हैं कि इनके बच्चों की शिक्षा का प्रबंध स्थानीय स्तर पर हो जाए। चौथा हमारा प्रयास रहता है कि इन्हें हम किसी रोजगार से जोड़कर स्वाबलंबी बना सकें ताकि यह दो पैसा कमा कर अपने लिए दो वक्त का खाना जुटा सके। हम लोग इनके बीच से ही कुछ लोगों को अपने साथ लेकर एक टीम बना कर काम करते है और इनके अंदर आत्मविश्वास पैदा करने की कोशिश करते हैं।
सवालः भारत सरकार से आपको क्या सहायता प्राप्त होती है।
उत्तरः भारत सरकार से हमें या इन्हें भी कोई सहायता प्राप्त नहीं होती। मुझे बहुत दुख होता है यह देखकर कि बंगलादेश से घुसपैठ करके भारत में आने वाला मुसलमान आधार कार्ड और राशन बनवा कर यहां काम धंधा करना शुरू कर देता है और पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को हम एक शरणार्थी कॉर्ड भी मुहैया नहीं करा पाते। जहां इन लोगों की बस्तियां है वहां स्थानिय प्रशासन से कह कर हम ब़ी मुश्किल के बाद इनके लिए पेयजल, बिजली और साफ सफाई की व्यवस्था को कराने का काम करते है।
सवालः आप हिंदू शरणार्थियों को लेकर भविष्य में किस योजना पर काम कर रहे हैं।
उत्तरः हमारा प्रयास है कि सबसे पहले इन्हें मानवीय आधार पर शरणार्थी कॉर्ड मिले। इनके शिविरों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से सुविधाओं का विकास हो सके। और भारत सरकार जो सीएए कानून लाई है उसके तहत इन लोगों को भारत की नागरिकता प्राप्त हो। सरकार इन लोगों के लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था करें। यह हमारे ही लोग है। सनातन धर्म को मानने वाले है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर पैसों के लालच में यह लोग होते तो कब का इस्लाम धर्म स्वीकार कर चुके होते। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश में इन लोगों को इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए बहुत लालच दिया जाता हैं मगर इन लोगों ने सनातन धर्म का त्याग करने से मना कर दिया। आप सोच सकते हैं कि गरीब होते हुए भी यह लोग पैसों और जायदाद के लालच में नहीं पड़े। आप बताएं ऐसे लोगों को हमें गले लगाना चाहिए या उन्हें ऐसे ही छोड़ देना चाहिए।
सवालः किरण जी आप अपने बारे में भी कुछ बताएं और अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में हमसे जानकारी सांझा करें।
उत्तरः मेरा व्यक्तिगत जीवन कुछ नहीं है सब कुछ देश और सनातन धर्म के लिए है। मैं जो भी कुछ कर रहा हूं सनातन धर्म और अपने राष्ट्र की सेवा के लिए कर रहा हूं। वैसे मेरा जन्म आंध्रप्रदेश में हुआ। मेरा परिवार एक व्यवसायी परिवार है। मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं। अब मेरी मां घर पर रहती हैं जो संयुक्त परिवार के साथ हैं। मेरी बचपन से ही धर्म और आध्यात्म में गहरी रुचि थी इसके लिए मैं हिमालय में रहा वहां योग और वैदिक धर्म के बारे में बहुत जानकारी प्राप्त की और शोध किया। दुनिया के कई देशों में जाकर योग और वैदिक धर्म की जानकारी लोगों को देता हूं। भारत भ्रमण कर चुका हूं। देश के हर प्रांत में जाकर लोगों के बीच रहा हूं। अब पिछले एक दशक से मेरी यात्रा हिंदू शरणार्थियों की सेवा के लिए जारी है।
(नरेन्द्र कुमार वर्मा दिव्यदूत के दिल्ली ब्यूरोचीफ हैं)




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