आजादी के बाद जम्मू कश्मीर को लेकर पूरे देश यह भ्रांति फैलाई गई की कश्मीर को यदि विशेष दर्जा नहीं दिया गया तो वहां की जनता पाकिस्तान के साथ चली जाएगी इस भ्रांति के जनक उस समय के तत्कालीन शासक ही थे जिन्होंने अपने स्वार्थों के चलते हुए पूरे देश को गुमराह किया और कश्मीर के साथ जितने भी समझौते किए वह एक अलग राज्य की तरह ही थे स्वर्गीय राजा रणजीत सिंह से जो संधि हुई उसमें कोई भी शर्त नहीं थी सिर्फ भारत में विलय था जैसा कि दूसरे राज्यों ने किया था आजादी के बाद घुसपैठियों ने कश्मीर की सीमाओं पर हमला बोल दिया उससे राजा हरि सिंह फादर ऑफ़ रणजीत सिंह कंट्रोल नहीं कर पाए और उन्होंने बिना शर्त भारत में अपना शामिल होने की संधि पर हस्ताक्षर कर दिए विलय के बाद शेख अब्दुल्लाह मनोनीत मुख्यमंत्री के तौर पर कश्मीर में भारत का प्रतिनिधित्व करने लगे भारत सरकार ने अपनी सेनाओं को कश्मीर की सुरक्षा में तैनात कर दिया घुसपैठिए हार चुके थे भारतीय सेना उन्होंने खदेड़ दिया था उस वक्त भी सेना ने कश्मीर में शांति व्यवस्था कायम की और तथाकथित राज्य का दर्जा प्राप्त कश्मीर भारत सरकार से तरह-तरह के दबाव बनाने लगी कमजोर और स्वार्थी सरकार के नुमाइंदों ने शेख अब्दुल्ला की बातों पर विश्वास किया और वह तमाम बातें जो कश्मीर को भारत से अलग करती थी मान ली भारत के पास सिर्फ विदेश नीति, संचार और सुरक्षा रह गई बाकी कश्मीर का झंडा कश्मीर का संविधान और कश्मीर का विधान, प्रधान अलग हो गया |
कश्मीर
की शांति के लिए यह सब कुर्बानियां लगातार तत्कालीन सरकार दे रही थी 47 में
मिली आजादी के बाद 49 में धारा 370 के तहत कश्मीर को वह सारे अधिकार मिल गए जिसे वह चाह रहा था मामला
यहीं नहीं थमा 1954 में फिर 35
A को लागू कर उन तमाम संभावनाओं को
समाप्त कर दिया गया जिसमें कश्मीर कहने को तो भारत का अभिन्न अंग था लेकिन स्थानीय
लोग ने उसे कभी स्वीकार नहीं किया फारूक अब्दुल्ला का शासन बखूबी से चल रहा था
केंद्र सरकार उसे तमाम सुविधाएं दे रही थी 1965 में
पाकिस्तान ने पूरी सैन्य शक्ति के साथ फिर एक बार भारत पर हमला किया और मुंह की
खाई इस बीच हमारी सेनाओं ने पाकिस्तान अकोपाई कश्मीर तक घुसकर कब्जा कर लिया था वे लगातार
आगे बढ़ रही थी उस वक्त कुछ गिने-चुने समाचार पत्र और रेडियो से संचालित सबसे तेज
बीबीसी लंदन तरह-तरह की झूठी सच्ची खबरें पूरे देश में फैला रहा था कि इसी बीच
तत्कालीन प्रधानमंत्री यू एन ओ में गए और युद्ध विराम करवा दिया युद्धविराम की
सबसे गंदी कंडीशन थी दोनों सेनाएं अपनी पुरानी स्थिति में वापस चली जाएंगी |
| दशक बीत गए सरकारों में ऐसे ही चलती रहे कश्मीर को लेकर
मोदी सरकार को छोड़कर बाकी किसी सरकार ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया कि हम इतना
पैसा जम्मू कश्मीर में दे रहे हैं उसका वहां की सरकारें क्या कर रही है लोकसभा में
गृह मंत्री अमित शाह जिन तीन परिवारों का जिक्र कर रहे थे उसमें प्रमुख शेख
अब्दुल्ला परिवार जिसने सबसे अधिक कश्मीर पर अपना शासन किया उसके बाद मुफ्ती
मोहम्मद सही तीसरा परिवार जो दिल्ली में बैठा था उसने भी देश
में सबसे अधिक शासन आज भी वह धारा 370 पर कुतर्क देकर ही हटाने का विरोध कर रहे हैं
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि जब से राष्ट्रपति
शासन महा लगा है वहां के राजनेताओं के द्वारा किए गए घायलों की कुछ फाइलें हाथ लगी
है उन फाइलों पर अब कार्रवाई शुरू होगी इस वीडियो में जिसकी दिव्य दूत पुष्टि नहीं करता लेकिन लेकिन
उसमें कही गई बातों से साफ है शेख अब्दुल्ला एक टीचर थे और आज उनकी तीसरी पीढ़ी के
पास हजारों करोड़ के संपत्ति कैसे अर्जित हो गई यह जांच का विषय है अब यह फाइल में
खुलेंगे और उन तमाम शासकीय नुमाइंदों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगेंगे जिनका जवाब
उन्हें जनतंत्र की अदालतों में देना पड़ेगा इसलिए वहां के सियासत
दानों में भारी निराशा है वह जानते हैं कि उनके द्वारा भ्रष्टाचार से कमाई गई
संपत्ति को जनतंत्र की अब सरकार जांच कर जप्त भी कर सकती हैं
और जेल भी भेज सकती है जो अभी तक मुमकिन नहीं था
धारा 370 के
हटते ही तमाम सरकारी कार्यालयों में तिरंगा को लहरा दिया गया है पाकिस्तान के
मंसूबों की यह करारी हार है वह बोखला गया है और बौखलाहट में तरह-तरह के ऐसे कदम
उठा रहा है जिससे उसे नुकसान ही होना है कहने का मतलब तमाम पाकिस्तानी भाषा बोलने
वाले अब सिर्फ खंबा नोच रहे हैं
पाकिस्तानी सरकार ने कल एक अजीबोगरीब फैसला लिया कश्मीर
में 370 धारा की समाप्ति की जैसी ही घोषणा हुई पाकिस्तान ने अपने एंबेस्डर
को निलंबित कर दिया और व्यापारिक संबंध समाप्ति
की घोषणा कर दी इससे ऐसा लगता है कि उनके राजदूत ने जासूसी कर के जैसा की वह
करते रहे की खबर पाकिस्तान के नुमाइंदों को नहीं दी
कि भारत में 370 की लेकर क्या चल रहा है | कश्मीर
भारत का अपना अंदरूनी मामला था उसमें पाकिस्तान में इस तरह के निर्णय लेकर पूरी
दुनिया को यह बतला दिया है कि वह कश्मीर में अपनी दखलअंदाजी इसी धारा के तहत बनाए
हुए था जो किसी दूसरे मुल्क में दखलअंदाजी करने
का अवैध तरीका है |




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