मानव सेवा की सच्ची मूर्ति थे विद्यासागर >>> नरेंद्र मोदी
अविनाश कुमार
***विद्यासागर महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावुक हो गए उन्होंने कहा की अब मैं दोबारा उनके दर्शन नहीं कर पाऊंगा , उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव की सेवा में लगाया ऐसे संत का मैं हृदय से नमन करता हूं दिल्ली मंडपम में नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि मैं पिछले बार छत्तीसगढ़ गया था तब विद्यासागर महाराज जी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया था आज वह हमारे बीच में नहीं है लेकिन वह लाखों हृदय में हमेशा जीवित रहेंगे **
डोंगरगढ़ 18/02/2024//// समाधि-2:35am 18 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्तिथ चंद्रगिरी तीर्थ में संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज का सल्लेखना व्रत के द्वारा समतापूर्वक समाधि मरण हुआ ।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्र संत आचार्य श्री विद्यासागर महा मुनिराज जी के ब्रम्हलीन पर उन्हें नमन कियाछत्तीसगढ़ में आधे दिन का राजकीय शोक घोषित
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्र संत आचार्य श्री विद्यासागर महा मुनिराज जी के ब्रम्हलीन होने पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का देश व समाज के लिए योगदान युगों-युगों तक स्मरण किया जाएगा।
उन्होंने कहा है कि विश्व वंदनीय, राष्ट्र संत आचार्य श्री विद्यासागर महामुनिराज जी के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ में सल्लेखना पूर्वक समाधि का समाचार प्राप्त हुआ। छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया को अपने ओजस्वी ज्ञान से पल्लवित करने वाले आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को देश व समाज के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्य, उनके त्याग और तपस्या के लिए युगों-युगों तक स्मरण किया जाएगा। आध्यात्मिक चेतना के पुंज आचार्य श्री विद्यासागर जी के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन।
राज्य शासन द्वारा वर्तमान के वर्धमान कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन मुनि संत परंपरा के आचार्य विद्यासागर महाराज जी के सम्मान में आज छत्तीसगढ़ में आधे दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा तथा राजकीय समारोह एवं कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जायेंगें।आचार्य विद्यासागर एक प्रख्यात दिगम्बर जैन आचार्य हैं। उन्हें उनकी विद्वत्ता और तप के लिए जाना जाता है। आचार्य श्री हिन्दी, अंग्रेजी के आलावा 8 भाषाओं के ज्ञाता हैं ।
जीवनी
उनका जन्म १० अक्टूबर १९४६ को विद्याधर के रूप में कर्नाटक के बेलगाँव जिले के सदलगा में शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। उनके पिता श्री मल्लप्पा थे जो बाद में मुनि मल्लिसागर बने। उनकी माता श्रीमंती थी जो बाद में आर्यिका समयमति बनी।
विद्यासागर जी को ३० जून १९६८ में अजमेर में २२ वर्ष की आयु में आचार्य ज्ञानसागर ने दीक्षा दी जो आचार्य शांतिसागर के वंश के थे। आचार्य विद्यासागर को २२ नवम्बर १९७२ में ज्ञानसागर जी द्वारा आचार्य पद दिया गया था। उनके भाई सभी घर के लोग संन्यास ले चुके हैं। उनके भाई अनंतनाथ और शांतिनाथ ने आचार्य विद्यासागर से दीक्षा ग्रहण की और मुनि योगसागर और मुनि समयसागर कहलाये।उनके बङे भाई भी उनसे दीक्षा लेकर मुनि उत्कृष्ट सागर जी महाराज कहलाए
आचार्य विद्यासागर संस्कृत, प्राकृत सहित विभिन्न आधुनिक भाषाओं हिन्दी, मराठी और कन्नड़ में विशेषज्ञ स्तर का ज्ञान रखते हैं। उन्होंने हिन्दी और संस्कृत के विशाल मात्रा में रचनाएँ की हैं। विभिन्न शोधार्थियों ने उनके कार्य का मास्टर्स और डॉक्ट्रेट के लिए अध्ययन किया है। उनके कार्य में निरंजना शतक, भावना शतक, परीषह जाया शतक, सुनीति शतक और शरमाना शतक शामिल हैं। उन्होंने काव्य मूक माटी की भी रचना की है। विभिन्न संस्थानों में यह स्नातकोत्तर के हिन्दी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है। आचार्य विद्यासागर कई धार्मिक कार्यों में प्रेरणास्रोत रहे हैं।
आचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनि क्षमासागर ने उन पर आत्मान्वेषी नामक जीवनी लिखी है। इस पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित हो चुका है। मुनि प्रणम्यसागर ने उनके जीवन पर अनासक्त महायोगी नामक काव्य की रचना की है।
साहित्य सर्जन
हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी आदि में एक दर्जन से अधिक मौलिक रचनाएँ प्रकाशित- 'नर्मदा का नरम कंकर', 'डूबा मत लगाओ डुबकी' , 'तोता रोता क्यों ?' , 'मूक माटी' आदि काव्य कृतियां ; गुरुवाणी , प्रवचन परिजात, प्रवचन प्रमेय आदि प्रवचन संग्रह; आचार्य कुंदकुंद के समयासार, नियमसार , प्रवचनसार और जैन गीता आदि ग्रंथों का पद्य अनुवाद |
शिष्य गण
आचार्य श्री द्वारा 130 मुनिराजो , 172 आर्यिकाओं व 20 ऐलक जी ,14 क्षुल्लकगणों को दीक्षित किया गया है | मुनिश्री समयसागर जी,मुनिश्री योगसागर जी, मुनिश्री नियमसागर जी,मुनिश्री सुधासागर जी, मुनिश्री प्रमाणसागर जी, मुनिश्री चिन्मयसागर जी,मुनिश्री अभयसागर जी, मुनि क्षमासागर जी,मुनि प्रणम्यसागर जीआदि प्रसिध्द संत है | 2001 के आँकड़ों के अनुसार उनके लगभग 21% दिगम्बर साधु आचार्य विद्यासागर के आज्ञा से चर्या करते हैं।




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