नरेन्द्र कुमार वर्मा
पश्चिम बंगाल के उत्तर चौबिस परगना जिले का छोटा सा नगर संदेशखाली आज तृणमूल कांग्रेस के गुंड़ों के भयानक आतंक का केंद्र बना हुआ है। संदेशखाली अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों का गढ़ है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संदेशखाली में इतनी पुलिस फोर्स तैनात कर रखी है कि हर घर पर पहरा लगा हुआ है। संदेशखाली के सभी रास्तों पर पुलिस बैठी है किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश नगर में नहीं हो पा रहा है। राजधानी कोलकाता से संदेशखाली की दूरी महज 80 किलोमीटर है मगर वहां जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता जो 3 घंटे के सफर के बाद संदेशखाली पहुंचाती है।
संदेशखाली क्यों सुलग रहा है और कौन है वह अपराधी जिसे बंगाल की पुलिस आज तक नहीं पकड़ पाई। इन सभी सवालों का उत्तर हम आपको सिलसिलेवार दे रहे है। संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस का एक नेता शाहजहां शेख है जिसकी अपार संपत्तियों को खंगालने जब ईडी की टीम पिछले दिनों वहां पहुंची तो तृणमूल के गुंडों ने उन पर जानेलेवा हमला कर उन्हें वहां से भागने पर मजबूर कर दिया। ईडी की छापेमारी के बाद शाहजहां शेख फरार हो गया।संदेशखाली के लोग बताते हैं कि बंगलादेश में जाकर छिप गया। शाहजहां शेख के बंगालदेश के कई चरमपंथी संगठनों के साथ संबंध है। अब खुफिया एजेंसी अब उसके आईएसआईएस नेटवर्क के साथ संबंधों को भी खंगाल रही है। वह इलाके में गोतस्करी और अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त के धंधे से भी जुड़ा है।
संदेशखाली की आदिवासी महिलाओं का आरोप हैं कि शाहजहां शेख और उसके आदमी कई वर्षों से लगातार वहां कि छोटी-छोटी लड़कियों, नवविवाहिताओं, महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहे थे। रात के अंधेर में शाहजहां शेख के गुर्गे आदिवासी बस्तियों में जाकर महिलाओं को तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर में खींच कर लाते और यौनशोषण के बाद उन्हें छोड़ देते। जो महिलाओं उनका विरोध करती उनके घर वालों से मारपीट की जाती और उनकी खेती की जमीन से उन्हें बेदखल कर भगा दिया जाता। यह सारी घटना किसी बॉलीवुड की फिल्म की तरह लगती है। मगर इसमें रत्तीभर की झूठ नहीं है। संदेशखाली की महिलाओं के विलाप देखकर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की आंखों में भी आंसू निकल आए। मगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तनिक भी प्रभाव नहीं पड़ा। दरअसल ममता बनर्जी ने मुस्लिम तुष्टिकरण की सभी पराकाष्टाओं को पार कर दिया।
संदेशखाली की आदिवासी महिलाएं आज पेट पकड़-पकड़ कर ममता बनर्जी को कोस रही है और श्राप दे रही है। पीडित महिलाओं का हौसला उस वक्त बढ़ा जब ईडी की कार्रवाई के बाद शाहजहां शेख और उसके गुंडे वहां से फरार हो गए। इसके बाद इलाके की हजारों महिलाओं हाथों में लाठी-डंडे और तलवार लेकर सड़कों पर उतर आईं। आज संदेशखाली आदिवासी महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए रण का मैदान बना हुआ है। तृणमूल कांग्रेस का गुंडा शाहजहां शेख कभी संदेशखाली के मछली पालन केंद्र पर नौकर का काम करता था। जहां से उसने ईंट भट्टे पर मजदूरी शुरू की। ईंट भट्टा मजदूर यूनियन की तरफ से वह सीपीआई एम के साथ जुड़ गया। सीपीआईएम की सत्ता जाने के बाद वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गया। जल्दी वह तृणमूल कांग्रेस के नेता और सरकार में मंत्री ज्योतिप्रियो मलिक का सबसे खास पयादा बन गया। देखते ही देखते शाहजहां शेख के पास अकूत संपत्ति खड़ी हो गई। फटेहाल आदमी महंगी गाड़ी से चलने लगा। वह कई ईंट भट्टों का मालिक बन गया। तृणमूल कांग्रेस के सहारे वह सरबेरिया अग्रघाटी ग्राम पंचायत का उप प्रमुख भी चुना गया। उसने संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस का दफ्तर खोल लिया और जमीनों की खरीद फरोख्त करने लगा।
पैसा सत्ता और रसूख के चलते शाहजहां शेख ने संदेशखाली की आदिवासी महिलाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उसकी इस घिनौनी हरकत में उसका साथ देने तृणमूल कांग्रेस के दो नेता और जुड़ गए शिवप्रसाद हाजरा और उत्तम सरदार। इन लोगों ने मिलकर इलाके की आदिवासी महिलाओं का यौन शोषण शुरू किया। इलाके के आदिवासी समुदाय का आरोप हैं कि यहां की बशीरहाट पुलिस भी उससे मिली हुई है। हालात इतने भयावह हैं कि बशीरहाट के पुलिस अक्षीक्षक हुसैन मेंहदी रहमान शाहजहां शेख को आश्रय देने का काम करते है। इलाके के लोगों का आरोप हैं कि बशीरहाट के पुलिस अधीक्षक हुसैन मेंहदी रहमान से जब शाहजहां शेख के कारनामों की शिकायत की गई तो उन्होंने गरीब लोगों को डांट कर भगा दिया। यह वही पुलिस अधिकारी है जिनके सामने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार पर हमला हुआ था और वह सांसद को सुरक्षा उपलब्ध नहीं करा पाए थे।
संदेशखाली में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि आदिवासी समुदाय की कोई सुनने वाला नहीं है। हालांकि केंद्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम संदेशखाली का दौरा कर राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। मगर ममता बनर्जी इस संबंध में कान में तेल डाल कर बैठी है।
कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का शिष्टमंड़ल जब संदेशखाली जाने के लिए वहां पहुंचा तो पुलिस ने उन्हें सख्ती के साथ वापस लौटा दिया। बंगाल पुलिस के रवैये को इस बात से समझा जा सकता हैं कि बीजेपी सांसदों के एक शिष्ट मंड़ल जिसमें केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्ण देवी, सांसद सुनीता दुग्गल, सांसद कविता पाटिदार, सांसद संगीता यादव और सांसद बृजलाल शामिल थे उन्हें भी पीडितों तक नहीं पहुंचने दिया गया। बंगाल सरकार ने संदेशखाली में आपातकाल लगा रखा है। वहां से जुड़ी खबरें मीडिया में नहीं आ रही। आदिवासी महिलाओं का दर्द और लूट-खसौट की खबरों पर ममता बनर्जी ने सेंसर लगा रखा है। पुलिस वाले आदिवासियों घर जाकर उन्हें धमका रहे हैं कि अगर किसी ने पत्रकारों या नेताओं के सामने मुंह खोला तो सरकार जमीन और घर छिन लेगी।
संदेशखाली की महिलाओं का दर्द ममता बनर्जी का दर्द नहीं है वह केवल मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति में डूबी हुई है। ममता बनर्जी की मनोदशा को इस बात से समझा जा सकता हैं कि वह राज्यपाल, बीजेपी, मीडिया, कांग्रेस और आरएसएस के नेताओं पर अपनी भड़ास निकाल रही है। आज संदेशखाली की महिलाएं घरों में कैद है उनके आदमियों को पुलिस और तृणमूल कांग्रेस के लोग धमका रहे है। बच्चियों की आंखों में अजीब सा खौफ है। मगर राष्ट्रीय मीडिया पटल से संदेशखाली की आदिवासी महिलाओं का दर्दनाक संदेश गायब है।
(लेखकः दिव्यदूत के नई दिल्ली ब्यूरोचीफ हैं)




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