नरेन्द्र कुमार वर्मा,नई दिल्ली ब्यूरोचीफ)
नई दिल्ली05/-01/2024 ///भारत में तेजी के साथ साइबर अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। पढ़े-लिखे लोगों से लेकर आम आदमी तक साइबर ठगों का शिकार बन रहे हैं। ऐसा नहीं कि साइबर अपराध के मामले केवल भारत में ही होते है। दुनिया के अनेक देशों में साइबर ठगों के संगठित गिरोह काम कर रहे है जो हर दिन भोले-भाले लोगों से करोड़ो रुपया ठग रहे हैं। म्यांमार, कंबोडिया, अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और साउथ अफ्रीका सहित अनेक जगहों पर साइबर अपराध के मामलों में वृध्दि होती जा रही है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने देश में साइबर अपराधियों से निपटने के लिए एक विशेष सेल का गठन किया है। भारतीय साइबर अपराध केंद्र नाम से गृह मंत्रालय की यह सेल साइबर ठगी से लोगों को बचा रही है। देश के हर राज्य में भी अब तेजी के साथ साइबर थानों का गठन किया जा रहा है जहां साइबर एक्सपर्ट ठगी के मामलों की पड़ताल कर रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों का कहना हैं कि देश में साइबर ठगी के अधिकांश मामले सोशल साइट के माध्यम से किए जा रहे है। साइबर अपराधी निवेश करने, लोन देने, कस्टमर केयर के माध्यम से, नकली पहचान व्दारा और सेक्सटॉर्शन के माध्यम से ठगी का काम कर रहे हैं। साइबर अपराधी किसी भी माध्यम से आपका मोबाइल नंबर हासिल करने के बाद आपको बैंक अधिकारी, आधार ऑफिस, बीमा अधिकारी, पुलिस अधिकारी, कस्टम ऑफिसर, ऑन लाइन शापिंग ग्राहक सेवा अधिकारी और मोबाइल कंपनी का कर्मचारी बता कर फोन करते हैं। साइबर अपराधी इतने माहिर होते हैं कि उन्हें आपके बैंक खाते, बीमा पॉलिसी और मोबइल चार्ज करने की सारी जानकारी होती है। दरअसल बाजार से उन्हें इस तरह का डाटा मिल जाता है जो बैंक अथवा किसी अन्य माध्यम से उनके पास पहुंच जाता है।
गृहमंत्रालय का कहना हैं कि अगर आप गलती से किसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते है तो आपके बैंक से होने वाली धन निकासी का पहला घंटा बहुत महत्वपूर्ण होता है। आपको जैसे ही लगे कि आप ठगी का शिकार हो गए है तो घबराए नहीं बल्कि फौरन 1930 नंबर पर फोन करके सारी जानकारी दे। मगर ध्यान रखे कि आप उसी फोन से जानकारी दे जिससे आप ठगी का शिकार हुए है। आपका शिकायत नोट करने के बाद गृह मंत्रालय तत्काल आपके बैंक से संपर्क करके आपके खाते से गए धनराशि जिस बैंक में गई हैं उसको ब्लॉक करने का काम करेगा। साल 2023 में गृहमंत्रालय भारत सरकार ने 921.59 करोड़ रुपया साइबर अपराधियों की जेब में जाने से रोका। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध केंद्र (आईफोरसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार बताते हैं कि साइबर धोखाधड़ी के मामले में पहला घंटा गोल्डन ऑवर होता है ऐसे मामलों में साइबर अपराधियों के खाते से धनराशि निकालने से रोक दिया जाता है।
भारत में अब साइबर किडनैपिंग के मामले भी सामने आ रहे है। इस तरह के मामलों में आपको फोन पर नकली पुलिस अधिकारी की फोन आती है जो कहता हैं कि आपका आधार नंबर और पते पर एयर माध्यम से प्रतिबंधित सामान के आते हुए पकड़ा गया है। जब तक पीडित कुछ समझ पाता है तब तक उसके फोन पर एक वीडियो कॉल आती है जिसमें एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहने हुए पुलिस ऑफिस की तरह दिखाई देने वाले कक्ष में बैठ कर आपसे बात करता है और कहता हैं कि इस मामले में आपको गिरफ्तार किया जा सकता है। वह आपके फोन पर फर्जी एफआईआर की कॉपी भेजता है। फिर कहता हैं कि जहां आप रहते हैं वहां के पुलिस अधीक्षक के पास आपका मामला भेज दिया गया है। थोड़ी देर में स्थानिय पुलिस आपको गिरफ्तार कर लेगी जिसके बाद हमारी टीम को आपको हैंडओवर कर दिया जाएगा। साइबर अपराधी पीड़ित को इतने दबाब में ले लेते हैं कि कुछ सोचने समझने का वक्त नहीं देते। वह कहते हैं कि अगर आपको ऑन लाइन जमानत लेना है तो आप मुंबई पुलिस के बैंक अकाउंट में एक लाख रुपया भेज दें। इसके बाद पीड़ित को एक लिंक भेजा जाएगा जिसके माध्यम से पैसा ट्रांस्फर करवा लेते हैं। सामने वाला बिना सोचे समझे फर्जी पुलिस अधिकारी के बताए गए तरीके से ऑन लाइन जमानत के लिए पैसा भेज देता है। इसी बीच पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल के माध्यम से पीडित को जब तक अपने सामने से हिलने नहीं देता जब तक पैसा ट्रांस्फर नहीं हो जाता। इस तरह के मामलों को लेकर देश के अनेक राज्यों की पुलिस ने आम जनता की जागरुकता के लिए समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी दी है।
दिल्ली पुलिस का कहना हैं कि साइबर ठगी का शिकार होने के बाद फौरन पुलिस को सूचित करें। भारत सरकार के टोलफ्री नंबर पर तत्काल सारी जानकारी दे। अपना मोबाइल बंद कर दें। अपने मोबाइल फोन में कोई अनजान एप अथवा गेम्स डॉउनलोड न करें। किसी भी लिंक को न देखे। किसी भी अनजान वीडियो कॉल को न उठाए। सोशल मीडिया पर किसी अनजान को मित्र न बनाए। अपनी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें। मोबाइल फोन से शापिंग करते समय सतर्क रहे। क्रेडिट कॉर्ड बिना ब्याज के लोन के झांसे में न आए। अगर आपके परिवार का सदस्य या मित्र बनकर कोई आपसे धन की मांग करें तो न दें। अपने बैंक अकाउंट आधार कॉर्ड इत्यादि की जानकारी अन्य व्यक्ति को न दें। साइबर विशेषज्ञों का कहना हैं कि ऑन लाइन माध्यम से आज दुनियाभर में कामकाज हो रहा है। इसी माध्यम से साइबर ठगी के मामलों में भी तेजी के साथ बढोत्तरी हो रही है। मगर इसको लेकर आपको सतर्कता बरतनी चाहिए।
(रिपोर्टर दिव्यदूत के नई दिल्ली ब्यूरोचीफ हैं)




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