रायपुर/// छत्तीसगढ़ उद्यानिकी विभाग की
मदद से परंपरागत धान की खेती से दूर होकर किसान अब बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे
हैं जैसा कि जसपुर में काजू का उत्पादन अब बहुत तेजी से बढ़ रहा है वहां पर काजू
प्रोसेसिंग का प्लांट भी लगा दिया गया है जिससे आम किसानों की आमदनी में तेजी से
इजाफा हो रहा है उसी कड़ी में जसपुर में चाय का बागान तैयार किया गया है जिसकी चाय
आम चाय से काफी स्वादिष्ट और बाजार में
महंगी बिक रही है चाय बागान को विकसित करने के लिए आसाम के चाय बागान एक्सपर्ट से
मदद लेकर एक धार्मिक संस्थान ने चाय का बहुत बड़ा बगीचा बनाया हुआ है जिसकी ख्याति
धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रही है और चाय की एक एक पत्ती बिक रही है
उसी सिलसिले में बलरामपुर के एक किसान
ने उद्यानिकी विभाग की मदद से नाशपाती के 20 पौधे लगाए थे जो अब
भरपूर उत्पादन दे रहे हैं किसान 29 पौधों से हर वर्ष करीब 80 से 90 हजार की अतिरिक्त कर रहा है यह धान की खेती के अलावा है वैसे तो छत्तीसगढ़ की भौगोलिक
स्थिति बिलासपुर से उत्तर पूर्व की तरह जाने में धीरे-धीरे बदलने लगती है मैनपाट
में आजकल बर्फ भी जमने लगी है इसलिए उस क्षेत्र के किसानों ने बागवानी में अपनी
रुचि दिखाते हुए आजकल काजू चाय और लीरायपुरची जैसे पौधे लगाकर अपनी आमदनी को
बढ़ाया है जशपुर कुनकुरी और उसके आसपास कटहल की अच्छी फसल होती है लेकिन अभी भी
गठन को व्यापारिक रूप नहीं मिला है जिसके कारण आमदनी बहुत कम है जबकि उत्पादन बहुत
अधिक है
बारिश के दिनों में जहां
सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं नाशपाती की खेती करने से किसानों की कमाई का भी रिकॉर्ड बना है, जिससे बलरामपुर जिले के किसानों की आय में
बढ़ोत्तरी हो रही है और उनका जीवन स्तर सुधर रहा है।
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले
के पाठ क्षेत्र के किसान अपनी लगन एवं मेहनत से उद्यानिकी फसलों में नाशपाती की
खेती कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे है। ग्राम चांगरो के कृषक श्री साधू पिता रमेश
ने बताया कि उद्यान विभाग के सहयोग से मैनें उद्यानिकी फसल नाशपाती की खेती शुरू
की है। नाशपाती में फल जून महीने तक लग जाते हैं और इसी माह रायपुर, बिलासपुर, अम्बिकापुर के व्यापारी
उद्यान विभाग के सहायक
संचालक श्री पतराम सिंह ने बताया कि हिन्डाल्को कंपनी द्वारा उत्खनन् पश्चात् खाली
जमीन पर विभाग द्वारा वृहद क्षेत्र में नाशपाती पौधरोपण पेड़ में लगे फल को देखकर
कीमत तय करते हैं एवं एडवांस राशि देकर चले जाते है और जुलाई के अंतिम सप्ताह में
व्यापारी अपनी वाहन लेकर आते हैं।
श्री साधू ने बताया कि उसके पास 20 नाशपाती के पौधे लगे हैं, जिससे लगभग 50 क्विंटल नाशपाती का फल प्राप्त होता है। जिससे उन्हें 80 से 90 हजार रूपये की आमदनी हो रही है। कृषक साधू ने बताया कि उसकी एक बेटी
उच्च शिक्षा के लिए अब बाहर जाकर बी.एस.सी. फाईनल की पढ़ाई कर रही है। फसल की कमाई
से वे प्रफुल्लित है, जिससे देखकर अन्य किसान भी नाशपाती की खेती करने पर अग्रसर हो रहे
हैं।
किया जा रहा है। जिले के
पाठ क्षेत्र निम्न जलवायु व अधिक वर्षा के लिए अनुकूलित है।




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