रायपुर 06/12//2023// मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है. जिससे किसानों की आय बढ़ सकती है.छत्तीसगढ़ मे भी अपूर्व सम्भावनाय हैं बिहार के गया जिले में कई ऐसे किसान हैं जो छत्तीसगढ़ के मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. इससे उन्हें अच्छी आय हो रही है. छत्तीसगढ़ और गया की जलवायु भी मधुमक्खी पालन के लिए उपयुक्त माना जाती है. लेकिन ठंड के दिनों में 3 महीने के लिए गया के मधुमक्खी पालक अधिक शहद उत्पादन के लिए अपने मधुमक्खी बॉक्स को लेकर माइग्रेट कर जाते हैं. इस बार गया के मधुमक्खी पालक अपने मधुमक्खियां को लेकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड चले गए हैं और ठंड खत्म होते ही फरवरी महीने में वापस गया लौट आएंगे.

गया के परैया प्रखंड क्षेत्र के मराची गांव के रहने वाले मधुमक्खी पालक चितरंजन कुमार पिछले साल भी लगभग 600 मधुमक्खी बॉक्स मध्य प्रदेश के भिंड भेजे थे और लगभग 20-22 टन शहद का उत्पादन हुआ था. इस साल इन्होंने 900 मधुमक्खी बॉक्स भेजे हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार लगभग 25 से 30 टन शहद का उत्पादन होगा. इससे 30 लाख रुपए का व्यवसाय होगा. सभी मधुमक्खी बॉक्स मध्यप्रदेश के मेहगांव, भिंड भेजी गई है. सभी बॉक्स सरसों के खेत किनारे रखे जाएंगे. फिर मधुमक्खियां सरसों के फूलों से रस निकालेंगी और शहद इकट्ठा होगा. फरवरी तक शहद निकाला जाएगा, इसके बाद टीम वापस गया आ जाएगी. फिर सहजन की फूलों से रस निकालने के लिए गया के अलग-अलग जगहों पर मधुमक्खियों से भरे बॉक्स रखे जाएंगे.
लीज पर ली जाती है जमीन

मध्यप्रदेश दलहन-तिलहन फसल के लिए चर्चित है. खासकर यहां बड़े पैमाने पर सरसों की खेती होती है. यहां से भेजे गए सभी बॉक्स सरसों के खेत के किनारे रख दिए जाते हैं. तीन महीने के लिए वहां के किसानों से जमीन लीज पर ली जाती है. उन्हें जमीन के बदले किराया दिया जाता है. चितरंजन बताते हैं कि इस साल तीन ट्रक मधुमक्खी बॉक्स मध्य प्रदेश भेजा गया है और लगभग 30 टन शहद का उत्पादन होगा और तीन महीने में लगभग 25 लाख रुपये का व्यवसाय होगा.
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सलाना 20 से 25 लाख रुपये की कमाई
चितरंजन कुमार ने स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद कृषि विज्ञान केंद्र से मधुमक्खी पालन सीखा. दो साल तक नौकरी काम करते रहे. फिर नौकरी छोड़ने और खुद से मधुमक्खी पालन करने का निर्णय किया और आज सलाना 20 से 25 लाख रुपये कमा रहे हैं. दर्जनों लोगों को रोजगार दे रहे हैं. चितरंजन कहते हैं कि सालभर शहद का काम चलता रहता है. सरसों के बाद सहजन, करंज के फूलों से हमारी टीम शहद निकालती है.





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