सरकार कॉरिडोर के निर्माण के लिए स्वयं धन की व्यवस्था करेगी
-नरेन्द्र कुमार वर्मा
प्रयागराज 22/11/2023//// में बांके बिहारी मंदिर में कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को कॉरिडोर बनाने का आदेश दे दिया। बिहारी जी के मंदिर के लिए बनने वाले कॉरिडोर से आने वाले समय में करोडों भक्तों को सुविधा मिलेगी और वृंदावन एक नए रोजगार के केंद्र के तौर पर सामने आएगा। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा हैं कि सरकार कॉरिडोर के निर्माण के लिए स्वयं धन की व्यवस्था करेगी और इसके लिए मंदिर ट्रस्ट के बैंक खाते को छुआ भी नहीं जाएगा। वास्तव में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह एतिहासिक फैसला देकर देश के करोड़ो कृष्णभक्तों को एक बड़ी सौगार प्रदान की हैं। 31 जनवरी 2024 को उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले पर कॉरिडोर निर्माण के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के सामने प्रस्तुत करेगी।
वृंदावन में बिहारी जी के प्रसिध्द मंदिर (बांकेबिहारी मंदिर) में प्रतिदिन देश-विदेश से करोड़ो भक्त दर्शन के लिए आते हैं। पिछले दिनों मंदिर प्रांगण में उमड़ी भक्तों की भीड़ के कारण कई लोगों की जान चली गई थी। उस समय उत्तर प्रदेश सरकार ने ब्रज तीर्थ विकास परिषद से काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर बांके बिहारी मंदिर के लिए भी कॉरिडोर के निर्माण का आदेश दिया था। मगर मंदिर ट्रस्ट व्दारा विभिन्न कारणों को लेकर इस आदेश का भारी विरोध किया जा रहा था। आपकी लोकप्रिय वेबसाइट ‘दिव्य दूत’ व्दारा विगत 4 अक्टूबर को इस संदर्भ में सबसे पहले ‘समय की जरूरत है श्रीबांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर का निर्माण’ नाम से एक स्टोरी का प्रकाशन किया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब ब्रज तीर्थ विकास परिषद व्दारा इस दिशा में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई है।

श्री बांकेबिहार मंदिर के कॉरिडोर का डिजाइन भी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह होगा। मंदिर के सामने 5.65 एकड़ के क्षेत्र में भक्तों के लिए सुविधाओं का विकास किया जाएगा। कॉरिडोर के मार्ग में वृंदावन परिक्रमा मार्ग भी शामिल होगा जिसे विद्यापीठ मार्ग से जोड़ा जाएगा। ब्रज तीर्थ विकास परिषद का कहना हैं कि कॉरिडोर के निर्माण के बाद प्रतिदिन 10 हजार भक्त एक साथ सुगमता और सरलता के साथ भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। कॉरिडोर के निर्माण के लिए 276 दुकानों, 149 आवासिय क्षेत्रों, 66 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और 57 मिश्रित श्रेणी के भवनों को अधिग्रहण के लिए चिन्हित किया गया है। कॉरिडोर के संपूर्ण परिसर को कदम और करील के पौधों से आभावान बनाया जाएगा। ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने इस दिशा में जो प्रस्ताव तैयार किया है उसमें 10600 वर्ग मीटर का ऊपरी क्षेत्र, 1800 वर्ग मीटर के क्षेत्र में भक्तों के लिए प्रतिक्षालय, 800 वर्ग मीटर के क्षेत्र में गलियारा, 5300 वर्ग मीटर क्षेत्र में यात्री प्रतिक्षालय, 650 वर्ग मीटर का खुला क्षेत्र, 100 वर्म मीटर क्षेत्र में आमानती सामान गृह, 30 वर्ग मीटर क्षेत्र में शिशु देखभाल केंद्र, 80 वर्ग मीटर क्षेत्र में चिकित्सालय, 250 वर्ग मीटर क्षेत्र में वीआईपी प्रतिक्षालय, 250 वर्ग मीटर क्षेत्र में जूताघर, 800 वर्ग मीटर क्षेत्र में पूजा सामग्री की दुकानें एवं 11300 वर्ग मीटर के खुला क्षेत्र शामिल है।
ब्रज तीर्थ विकास परिषद का कहना हैं कि कॉरिडोर के निर्माण के बाद युमना के घाट, राधारमण मंदिर, मदन मोहन मंदिर, वाहन पार्किंग, पेयजल व्यवस्था, सुलभ शौचालय, यात्रा विश्राम केंद्र सहित भक्तों के लिए अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा। कॉरिडोर में भक्तों के पैदल भ्रमण की सुगम व्यवस्था को बनाया गया है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद का कहना हैं कि कॉरिडोर निर्माण के समय और बाद में भी प्राचीन मंदिर के स्वरुप को बरकरार रखा जाएगा। परिषद का कहना हैं कि कॉरिडोर के निर्माण के बाद वृंदावन रोजगार और पर्यटन के नए केंद्र के तौर पर विकसित होगा जहां एक लाख लोगों के प्रतिदिन आने से भी सभी व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहेंगी। सरकार का कहना हैं कि मंदिर तक आने के लिए भक्तों को ज्यादा समय नहीं लगेगा इसलिए यमुना एक्सप्रेस वे से भी मंदिर तक आने के लिए एक सस्पेंशन पुल बनाने की दिशा में भी विचार किया जा रहा है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद का कहना हैं कि कॉरिडोर दो मंजिला होगा जहां तीन मार्गों से भक्त सुगमता से पहुंच सकेंगे।
वास्तव में वृंदावन में श्री बांकेबिहारी मंदिर में कॉरिडोर के निर्माण के बाद लाखो भक्तों को सुगमता से भगवान श्री कृष्ण के दर्शन होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में काफी लंबे वक्त से काम कर रही थी सरकार का कहना था कि कॉरिडोर के निर्माण के बाद भक्तों को सुविधाएं प्राप्त होंगी और वृंदावन के लोगों को रोजगार के नए साधन मिलेंगे। मगर श्री बांकेबिहार मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी इस योजना का विरोध कर रहे थे। न्यायालय में मामला जाने के बाद उच्च न्यायालय ने इस दिशा में गंभीरता के साथ अध्ययन किया और एक एतिहासिक आदेश जारी किया। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना हैं कि कॉरिडोर के निर्माण के समय प्रभावित होने वाले प्रत्येक वर्ग के पुर्नवास का काम किया जाएगा और अधिग्रहण की जाने वाली संपत्ति का समुचित मुआवजा दिया जाएगा।




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