उत्तरकाशी 20/11/2023/// उत्तराखंड के उत्तरकाशी टनल हादसे को 8 दिन हो गए. दिवाली के दिन से ही टनल के अंदर 41 मजदूर फंसे हुए हैं. देश का हर नागरिक यह जरूर सोच रहा है कि टनल में फंसे मजदूरों को जीवनयापन के लिए खाना कैसे दिया जा रहा है? उन्हें 8 दिन से खाने में क्या-क्या मिल रहा है? टनल के अंदर फंसे मजदूर अपनी जिंदगी से जंग कैसे लड़ रहे हैं? बता दें कि टनल में फंसे मजदूरों को पहले दिन से ही खाने के लिए चीजे भेजना शुरू कर दी गईं थीं. टनल में फंसे सभी मजदूर पेटभर भोजन कर रहे हैं
टनल में फंसे लोगों को पहले दिन से ही 6 इंच के पाइप के जरिए ड्राई फ्रूट्स दिए जा रहे हैं. इसमें काजू, बादाम, चना, मूंगफली और मुरमुरे भेजे जा रहे हैं. सभी खाने के आइटम मजदूरों को टनल में फंसने के 18 घंटे के बाद से ही दिए जाने लगे थे. टनल में फंसे मजदूरों के लिए अंदर पानी की पर्याप्त मात्रा है. ऑक्सीजन की भी कोई कमी नहीं है.
टनल के अंदर एक पाइप से ऑक्सीजन को भेजा जा रहा है. इससे मजदूरों को फ्रेश ऑक्सीजन मिल रही है. किसी भी मजदूर को सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है. टनल के अंदर पानी की पहले से ही पर्याप्त मात्रा व्यवस्था है.
टनल में फंसे मजदूरों के लिए तकरीबन 2000 मीटर का क्षेत्र है. सिलक्यारा की तरफ से 2300 मीटर सुरंग का काम हो गया था. उसी की शुरूआत में 200 मीटर के बाद मलबा आ गया था. अनुमानित क्षेत्र 50 से 60 मीटर है. इसलिए ये बात साफ है कि मजदूरों को अंदर सर्वाईव करने के लिए 2000 मीटर से ज्यादा का स्पेस है. सुरंग के अंदर लाइट की पूरी व्यवस्था है.
टनल के अंदर पाइप के जरिए पहले दिन से ही खाने पीने की चीजे भेजी जा रही हैं. वहीं, अब एक्स्ट्रा खाना भेजने के लिए 6 इंच का एक और पाइप और डाला जा रहा है. इसका काम लगभग पूरा हो गया है. इस पाइप के जरिए दूसरी खाने की चीज भेजने पर विचार चल रहा है.




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