रायपुर // पर्यावरण को लेकर
छत्तीसगढ़ राज्य पुरातन काल से सजग रहा है हरेली त्यौहार
पर्यावरण के संरक्षण और वनों की वृद्धि को लेकर मुख्य रूप से मनाया जाता है आज के
दिन झमाझम बारिश में गेड़ी
पर चढ़कर युवा बच्चे और महिलाएं गांव गांव में निकलती हैं रंग बिरंगे वस्त्रों से
सजी महिलाएं और बच्चे इस त्यौहार को धूमधाम से मनाते हैं
इस बार यह त्यौहार विशेष इसलिए है कि भूपेश बघेल सरकार ने हरेली
त्यौहार को राजकीय त्यौहार का दर्जा देते हुए आज के दिन अवकाश की भी घोषणा की है
हरेली त्यौहार में छत्तीसगढ़ के हर घर में तरह-तरह के पकवान खुरमी ठठेरी नमकीन को
बनाया जाता है साथ ही सुबह से नीम के पत्तों से घर के द्वार को सजाया जाता है नीम
सबसे शुद्ध प्राकृतिक पौधा है ऐसा माना जाता है कि नीम की शुद्ध हवा से बरसात में
होने वाले जीवाणुओं
को नष्ट किया जाता है
हरेली त्यौहार की शुरुआत मंगल गीतों से शुरू होती है
इस बार विशेष इसलिए भी
है की इस त्यौहार को ग्रामीण
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने
के लिए छत्तीसगढ़ शासन के इस दिव्य स्वप्न नरवा घुरवा गुरुवा बाड़ी को हरेली
त्यौहार से जोड़ दिया गया है आज करीब 100 से ज्यादा नरवा घुरवा गुरुवा बाड़ी जोकि पशुओं के संरक्षण के लिए बनाई जा रही है का सरकार विधिवत उद्घाटन करेगी यह भी अपने आप में एक
मिसाल है इस त्यौहार को उस ग्रामीण प्रवेश से भी सरकार ने जोड़ दिया है जिसमें गायों को संरक्षण प्रदान किया जाएगा




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