****** FY23 GST Evasion Rs 1.36 Crore : जीएसटी अधिकारियों ने चालू वित्त वर्ष में 1.36 लाख करोड़ रुपये की चोरी पकड़ी है. फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट (ICT) के जरिए टैक्स चोरी के मामले बड़े स्तर पर सामने आए हैं. ******
नई दिल्ली :22 /10 /2023 /// जीएसटी चोरी को रोकने के लिए वित्तमंत्रालय काफी सख्त है. ट्रेडर्स बिल जेनरेट करने समेत अन्य तरीके से जीएसटी चोरी करते पाए गए हैं. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में 1.36 लाख करोड़ रुपये की चोरी पकड़ी गई है. जबकि, 2023 के शुरुआती छह महीनों के भीतर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी के मामलों की पहचान की गई है जो पिछले वर्ष के आंकड़ों से अधिक है.
वित्त मंत्रालय ने खुलासा किया है कि जीएसटी खुफिया अधिकारियों ने चालू वित्त वर्ष के दौरान कुल 1.36 लाख करोड़ रुपये की चौंका देने वाली जीएसटी चोरी का खुलासा किया है. मंत्रालय ने बयान जारी कर इस खतरे से निपटने के कठोर प्रयासों पर प्रकाश डाला. जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (DGGI) टैक्स चोरी का पता लगाने के लिए उन्नत डेटा एनालिटिक्स टूल का उपयोग कर रहा है.
जीएसटी अधिकारियों ने इस वित्तीय वर्ष 2023 के शुरुआती छह महीनों के भीतर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की चोरी के मामलों की पहचान की है जो पिछले वर्ष के आंकड़ों को पार कर गया है.
मंत्रालय ने बताया कि कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2023-24 में कुल जीएसटी चोरी (फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट या आईटीसी सहित) के रूप में 1.36 लाख करोड़ रुपये का पता चला है. स्थिति को सुधारने के लिए 14,108 करोड़ रुपये का स्वैच्छिक भुगतान किया गया है. आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान धोखाधड़ी वाले आईटीसी के कुल 1,040 मामले सामने आए हैं, जिसमें 14,000 करोड़ रुपये की आश्चर्यजनक राशि शामिल है, जिसमें अब तक 91 धोखेबाजों को गिरफ्तार किया गया है.
अप्रैल 2020 और सितंबर 2023 के बीच की अवधि के दौरान टैक्स चोरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट (ICT) के रूप में पता चला था. जीएसटी खुफिया अधिकारियों ने इन मामलों में 57,000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की पहचान की थी. मंत्रालय ने कहा कि अप्रैल 2020 से सितंबर 2023 तक 6,000 से अधिक फेक आईटीसी मामलों का पता चला है, जिसमें 57,000 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी शामिल है. इसमें कुल 500 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है.




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments