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समय की जरूरत है श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर का निर्माण

Anil Choubey 04-10-2023 19:03:31


नरेन्द्र कुमार वर्मा

वृंदावन के ठाकुर जी बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर के पट खुलने से पहले ही हजारों लोग मंदिर के चारों तरफ इस आशा में खड़े रहते हैं कि अपने अराध्य देव के दर्शन कर परम आनंद को प्राप्त कर पाएंगे। विशेष दिनों के समय तो यहां विद्यापीठ चौराहा से लेकर हरिनिकुंज तक और जुगलघाट से लेकर बिहारीपुरा तक और मनीपाड़ा से लेकर गोवर्धन दरवाजा तक एवं पुराने शहर से लेकर जंगलकट्टी तक लाखों श्रध्दालुओं से वृंदावन की गलियां अटी रहती है। ऐसे में हालत इतने लचर हो जाते हैं कि पुलिस और प्रशासन भी हाथ खड़े कर देता है। कई बार तो मंदिर के आसपास भीड़ इतनी ज्यादा हो जाती है कि सांस थम जाने से कई श्रध्दालुओं की मृत्यु तक हो जाती है। श्रद्धालुओं की भीड़ में महिलाएं, बच्चे और बुर्जुग चीखते रहते हैं मगर कोई उनकी सुनने को राजी नहीं होता। दरअसल वृंदावन में ठाकुर जी बांकेबिहारी जी का मंदिर संकरी गलियों के बीच स्थित हैं। प्राचीन काल में यहां आसपास खुला वातावरण था। मगर आज मंदिर चौक से लेकर भवन तक जाने में श्रध्दालुओं का धैर्य जवाब देने लगता है। देश में बांकेबिहारी जी जैसी ही आस्था के बड़े केंद्र और भी है जहां व्यवस्था इतनी उच्च कोटि की है जिनसे श्रध्दालुओं को रत्तीभर भी परेशानी नहीं होती। तिरुपति बालाजी, वैष्णोदेवी, साईंबाबा मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिरों में आज इतनी सुंदर और व्यापक व्यवस्था है कि वहां पर श्रध्दालु पूरे प्रेम और भक्तिभाव के साथ दर्शन करते हैं।

                     बांकेबिहारी मंदिर में अव्यवस्थाओं के आलम को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने ब्रज तीर्थ विकास परिषद को मंदिर के कॉरिडोर का प्रस्ताव बनाने का आदेश दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्य नाथ स्वयं एक बड़े संत हैं। वह गोरखधाम पीठ के पीठाधीश्वर महंत भी हैं। योगी आदित्यनाथ स्वयं ठाकुर जी के मंदिर के कॉरिडोर निर्माण में रुचि ले रहे हैं। मगर मंदिर से जुड़े सेवायत इस प्रस्ताव के विरोध में खड़े हो गए। उन्होंने न्यालय का रुख कर लिया। दरअसल बांकेबिहारी मंदिर एक प्राइवेट मंदिर है जिसकी व्यवस्था एक निजी ट्रस्ट देखता है। 1860 में इस तीन मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया था। बांके बिहारी जी के अनन्य भक्त स्वामी हरिदास जी ने उनकी प्रतिमा को निधिवन से खोजा था। स्वामी हरिदास जी निम्बर्क पंथ से थे। उनके जीवनकाल में मंदिर की सभी व्यवस्थाओं और ठाकुर जी की सेवा-भोग का प्रबंध उनके शिष्यों व्दारा किया जाता था। 1921 में हरिदास जी के अनुयायियों ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। उसी समय से इस मंदिर पर गोस्वामी पंडितों का अधिकार है।

                इस समय बांकेबिहारी जी मंदिर का प्रबंधन एक चार सदस्यीय समिति देखती है। इन चार सदस्यों का चुनाव मंदिर की राजभोग और शयन भोग शाखा से होता है। इन्हीं दोनों शाखाओं के सदस्य एक-एक बाहरी सदस्य का भी चुनाव आपसी सहमति से करते हैं। इन चुने हुए सदस्यों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाता है। मंदिर की समिति का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। विश्व प्रसिध्द इस मंदिर की व्यवस्थाओं, सुरक्षा, खर्चों एवं अन्य कार्यों के लिए समिति सरकार से व्यवस्था करने को कहती है। मगर मंदिर पर से अपना अधिकार नहीं छोड़ना चाहती। मंदिर के सेवायतों (गोस्वामियों) का कहना हैं कि 150 साल पहले इस मंदिर का निर्माण उनके पूर्वजों ने कराया था। उनके पैसों से बने इस मंदिर पर वह अपना अधिकार कैसे छोड़ दें। ब्रज तीर्थ विकास परिषद व्दारा मंदिर के अधिग्रहण के विरोध में गोस्वामियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया हैं। मगर वह न्यायालय में मंदिर में अव्यवस्थाओं, तंग गलियों के रास्तों, साफ-सफाई, सुगम दर्शन, भक्तों के हित, सुरक्षा व्यवस्था और उमड़ते जन सैलाब के संदर्भ में कोई हल प्रस्तुत नहीं कर पाते।

                 दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ने बांकेबिहारी जी कॉरिडोर का जो प्रस्ताव तैयार किया है। वह बेहद उदार और लोकतांत्रिक है। 5 एकड़ में बनने वाले कॉरिडोर पर 500 करोड़ रुपये से अधिक का खर्चा होगा। जिसके लिए 300 से अधिक दुकानों और मकानों के अधिग्रहण का प्रस्ताव है। उत्तर प्रदेश सरकार का यह प्रस्ताव सर्वहितकारी भाव वाला है। दुकान स्वामियों एवं मकान मालिकों को कॉरिडोर के समीप ही दुकान और फ्लैट बना कर दिए जाएंगे। मंदिर के सभी सेवायत परिवारों का पूरा समायोजन और पुनर्वास किया जाएगा। उन्हें सरकारी नौकरी से लेकर दुकान-मकान की सुविधा दी जाएगी और सभी सेवायतों के परिवार को योग्यता के अनुसार नौकरी मिलेगी। बांकेबिहारी मंदिर के कॉरिडोर की आभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता हैं कि वहां परिक्रमा मार्ग, खुला क्षेत्र, अमानती समानघर, चिकित्सालय, प्रशासनिक भवन, प्रतीक्षालय, जूताघर, शिशुवाटिका, खुला गलियारा, वीवीआईपी मार्ग, पूजा प्रसाद की दुकानें, यात्रियों के विश्रामगृह और वाहनों की विशाल पार्किग की व्यवस्था की जाएगी। सबसे बड़ी बात यह कि नया कॉरिडोर बनने के बाद वृंदावन की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी हो जाएगी और बड़ी संख्या में वहां लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

श्रीठाकुर जी बांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर निर्माण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा साफ हैं। सरकार चाहती है कि मंदिर सरकार के अधिकार क्षेत्र में आए और ब्रज तीर्थ विकास परिषद उसका प्रबंधन संभालें। मंदिर से प्राप्त सभी दान एवं आय पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद का अधिकार रहे। विशेष बात यह हैं कि मंदिर के प्राचीन स्वरुप से सरकार कोई छेड़छाड़ करने के पक्ष में नहीं है। मगर फिर भी सरकार और सेवायतों के बीच आपसी सहमति नहीं बन पा रही है। सेवायतों का कहना हैं कि सरकार कॉरिडोर के निर्माण के नाम पर प्राचीन कुंज गलियों खत्म कर देना चाहती है। यहां यह बात स्पष्ट हैं कि काशी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण में भी ऐसी अनेक बाधाएं आई थी। मगर सभी का सरकार ने समाधन कर कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ किया। बांकेबिहारी मंदिर से जुड़े गोस्वामी न्यायालय में जिन कुंज गलियों की बात कह रहे हैं वह आज के संदर्भ में सटिक नहीं बैठती। आज श्रध्दालुओं का भार वह गलियां उठाने में समर्थ नहीं है इसलिए हर साल कई श्रध्दालुओं की जान दर्शन करते समय चली जाती है।

वृंदावन की पहचान सारी दुनिया में ठाकुर जी के प्राचीन मंदिर के कारण ही है। आने वाले दिनों में वृंदावन में विश्व का सबसे ऊंचे मंदिर चंद्रोदय भी भक्तों के दर्शनों के लिए खोल दिया जाएगा। यह मंदिर 70 मंजिल जितना ऊंचा होगा। उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा हैं कि चंद्रोदय मंदिर के पट खुलने से पूर्व श्री बांकेबिहारी जी मंदिर के कॉरिडोर के निर्माण की अड़चनें खत्म हो जाएं। ताकि भगवान श्रीकृष्ण के भक्त सुगमता और पूर्ण प्रेम के साथ उनके दर्शनों का लाभ उठा सकें।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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