रायपुर// लोकसभा में पारित एनएमसी बिल को
लेकर आज पूरे देश में डॉक्टर , मेडिकल स्टूडेंट 1 दिन की सांकेतिक हड़ताल पर चले गए
ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों ने भी इस बिल के
विरोध में 24 घंटे के
लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बंद कर दिया है बिल का विरोध करते हुए डॉक्टरों का कहना
है कि मोदी सरकार इस पवित्र प्रोफेशन में जबरन अपनी दखलअंदाजी
कर चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा सेवा में अपनी
पैठ बनाना चाहती है
मोदी सरकार
इस बिल को लाकर उन तमाम ऑटोनॉमस बॉडी से चल रही संस्थाओं में
दखलअंदाजी कर सिस्टम को खराब करने में जुट गई है, बिल के विरोध में कल से लाखों
डॉक्टर, और
मेडिकल स्टूडेंट सड़क पर थे वही डॉक्टर
हर्षवर्धन जो कि स्वयं एक डॉक्टर हैं इस बिल को लोकसभा में पास कराने में जुटे हुए
थे लोकसभा में उन्होंने कुछ कथित पत्रों
भी दिखाकर दावा किया कि इस बिल से
तमाम चिकित्सा विद्यार्थी और डॉक्टर बहुत खुश हैं जबकि ऐसा नहीं है डॉक्टर
एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश गुप्ता से जब यह पूछा गया कि इस बिल में खराबी क्या है
उन्होंने कहा इस बिल से झोलाछाप डॉक्टरों को इलाज करने की इजाजत मिल जाएगी जो बहुत
ही खतरनाक है उन्होंने कहा कि झोलाछाप डॉक्टरों के आने से मेडिकल सर्विसेज में
भारी गिरावट आएगी दूसरा उन्होंने कहा ऐम्स ,पीजीआई चंडीगढ़ जैसी संस्थाएं जो
अभी ऑटोनॉमस बॉडी के द्वारा पारदर्शिता से चलाई जा रही थी उन संस्थाओं के हक को खत्म कर राजनीतिक
हस्तक्षेप बढ़ जाएगा और बिना क्वालीफिकेशन के सरकार इन संस्थाओं में जिन्हें
चाहेगी उनकी नियुक्ति सदस्य के रूप में करेगी जो बहुत ही घातक है नीट परीक्षा को लेकर भी
उन्होंने कहा कि इस परीक्षा से जो स्टूडेंट मेडिकल साइंस में आएंगे वह अपनी मेहनत से कड़ाई से पढ़ाई
करके आएंगे इसे बिल के आने से चिकित्सा शिक्षा पर बहुत बुरा
असर पड़ेगा इस मैं सरकारें चाहती है
कि निजी मेडिकल कॉलेजों मैनेजमेंट कोटे से
50% सीटें भरी
जाए यह एक उच्च स्तरीय व्यापार षडयंत्र है अभी तक 15% सीटें मैनेजमेंट कोटे के पास होती
थी जिसे वह धनाढ्य को बेचकर कॉलेज चलाते थे धनाढ्य कहने का मतलब यह है की यदि
मेरे पास पैसा है तो मेरा गधा बच्चा भी एमबीबीएस कर सकता है डॉक्टर बन सकता है यह
उस बच्चे के हितों पर कुठाराघात है जो अपनी मेहनत से पढ़कर डॉक्टर बनना चाहता है
ऐसा लगता है कि सरकार का असली मकसद यही है
दूसरा झोलाछाप डॉक्टरों को लेने से सरकार उनके द्वारा जनता
का इलाज करवाएगी उसके पीछे डॉ राकेश गुप्ता ने कहा है कि सरकार की यह मंशा है की
कम पैसे में मजदूर डॉक्टरों को स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी देकर सरकार इस मद
में बजट की कटौती कर सकती है झोलाछाप डॉक्टर को तो सिर्फ नौकरी चाहिए लेकिन
एमबीबीएस डॉक्टर को नौकरी के साथ हैंडसम सैलेरी और चिकित्सा को लेकर पूरा
एंफीस्ट्रक्चर चाहिए जिससे सरकार बचना चाहती है
कुल मिलाकर लोकसभा में तो है बेल
भारी हंगामे के बीच पास हो गया है इस बिल को से
लेकर सड़क सदन तक विरोध हो रहा है लेकिन सरकार अपनी संख्या बल के आधार पर इस बिल
को पास कराने में सफल हो गई है लेकिन अभी राज्यसभा में बिल पास होना बाकी है जिस तरीके से सरकार ने अपना मन बनाया है यदि राज्यसभा में यह बिल पास नहीं भी होता है तो ऑर्डिनेंस लाकर इस बिल को लागू कराने
के लिए आगे बढ़ सकती है जो हमारे देश की सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य सेवाओं पर कुठाराघात है इसको लेकर आज 24 घंटे के लिए आपात सेवाओं को
छोड़कर बाकी सेवाएं बंद रहेंगी |




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