दिल्ली ने जी-20 देशों का दिल जीता
-नरेन्द्र कुमार वर्मा
***** दुनिया में आसियान, ब्रिक, सार्क, नेटो और ओपेक जैसे अनेक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन होते हैं। मगर दिल्ली में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन की भव्यता ने सभी को पीछे छोड़ दिया। अतिथि देवो भव की अपनी परंपरा को निभाते हुए भारत ने जी-20 देशों का दिल्ली में भव्य और दिव्य स्वागत किया। शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे देश भारत की मेजबानी और स्वागत देखकर अभिभूत थे। जी-20 शिखर सम्मेलन पर आफ्टर ब्रेक की आवरण कथा *****

नई दिल्ली 09/09/2023 /// भारत ने दुनिया के बड़े राजनीतिक और कूटनीतिक मंच जी-20 के पर जो जीत हासिल की उसे दुनिया हमेशा याद रखेगी। चीन की सारी चालाकी को पीछे छोड़ते हुए भारत ने जी-20 शिखर सम्मेलन मे जुटे सभी देशों के राजनेताओं की सहमति के बाद दिल्ली घोषणा पत्र जारी किया। 37 पृष्ठों का यह घोषणा पत्र एतिहासिक रहा। ऐसा पहल बार हुआ कि सभी देशों एक स्वर में दिल्ली घोषणा पत्रपर सहमत जताई। दिल्ली घोषणा पत्र का सबसे खास बात यह रही कि भारत ने अपने मित्र देश रूस-यूक्रेन के युध्द पर इस घोषणा पत्र में सधी हुई भाषा का इस्तेमाल किया। साझा घोषणा पत्र में क्षेत्रीय अखंड़ता, संप्रभुता, राजनीतिक स्वंतत्रता, आतंकवाद, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को महत्व दिया गया। दिल्ली घोषणा पत्र के माध्यम से भारत ने एक बार फिर दुनियाभर के देशों के सामने अपनी रणनीति और कूटनीति का डंका बजा दिया।
भारत ने दिल्ली के पटल पर जुटे जी-20 के देशों की मेजबानी करते हुए अफ्रीकन यूनियन को जी-20 में शामिल करके कूटनीतिक सिक्सर मार कर सभी को चौंका दिया। भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने जब अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष अजाली औसमानी की अगुनवाई करते हुए उन्हें जी-20 के आसन तक लेकर पहुंचे तो समूचा भारत मंडपम जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दिल्ली में होने वाली जी-20 समिट के आयोजन से पूर्व किसी भी देश को इस बात की आहट भी नहीं थी। मगर भारत ने अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल करने का प्रस्ताव रख कर सभी को चौंका दिया। भारत की इस बड़ी कूटनीतिक चाल से चीन के सभी मोहरे धरे के धरे रह गए। नरेन्द्र मोदी ने राजनीतिक शतरंज की बाजी में चीन को एक तरफा मात दे दी। दरअसल भारत का संदेश साफ है वह समूची दुनिया में मानवता के कल्याण की बात करता है।
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दुनिया के सर्वाधिक पिछड़े देशों में शामिल अफ्रीकन यूनियन के 55 देशों के साथ जी-20 देशों के व्यापारिक, कूटनीतिक और निवेशिक संबंध व्यापक होंगे। इसका बड़ा लाभ 55 अफ्रीकन देशों की जनता को सीधे प्राप्त होगा। दरअसल चीन चाहता था कि वह अफ्रीकन यूनियन के देशों का एक तरफा दोहन करता रहे। वहां के संसाधनों पर अपना अधिपत्य स्थापित करें और दुनिया के किसी देश की वहां पहुंच न होने दे। मगर भारत सरकार ने जी-20 समिट के दौरान वैश्विक राजनीतिक का जो दांव चला अमेरिका भी उसका कायल हो उठा।
दिल्ली के प्रगति मैदान में बने भव्य और दिव्य भारत मंडपम में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक का भव्य स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-20 के सभी राष्ट्राध्याक्षों और आमंत्रित मित्र देशों के प्रतिनिधियों का जोरदार स्वागत किया। दिल्ली में होने वाली जी-20 समिट में जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, वैश्विक निवेश, कृषि, आतंकवाद, वित्तीय उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय ऋण प्रणाली, खाद्य सुरक्षा, क्रिप्टोकरेंसी, सौर ऊर्जा और बदलती भूगर्भिय परिस्थितों के प्रभाव पर विस्तृत रुप से चर्चा हुई। देश की राजधानी दिल्ली में जी-20 के शक्तिशाली देशों में अर्जेटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया, मैक्सिको,रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हुए। दुनिया के यह 20 देश एक धरती एक परिवार के संदेश के साथ विश्व कल्याण के लिए दिल्ली में एकत्र हुए। इससे पहले जब इंडोनेशिया से भारत को जी-20 की अध्यक्षता का दायित्व मिला था। तब भारत ने देश के 60 शहरों में 200 सम्मेलन करा कर सारी दुनिया को संदेश दिया था भारत वैश्विक मेजबानी के लिए तैयार हैं। भारत ने श्रीनगर से लेकर कोहिमा तक और कच्छ से लेकर त्रिरुवनंतपुरम तक देशभर के शहरों में बैठकों का आयोजन कर दुनियाभर के प्रतिनिधियों को भारत की मेजबानी और पुरातन संस्कृति से अवगत कराया।
भारत के पास जी-20 की अध्यक्षता का दायित्व 1 दिसंबर 2022 को आया था। 30 नवंबर 2023 तक यह दायित्व भारत के पास रहेगा। 16 नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जी-20 का अध्यक्षता सौंपी गई थी। भारत ने जी-20 की प्रेसीडेंसी थीम को वसुधैव-कुटुंबकम का नारा दिया और वन-अर्थ-वन-फैमली-वन-फ्यूचर का संदेश दुनियाभर को दिया। दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन, सतत मानव विकास, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, भ्रष्टाचार, पर्यावरण, आतंकवाद और वैश्विक निवेश जैसे बड़े मुद्दों पर दुनिया के 20 देश मिलकर मंथन करते हैं। इस दौरान एक दूसरे के साथ व्यापारिक, रणीतिक, राजनीतिकं संबंधों को बढ़ाने के लिए आपसी समझौते भी किए गए। जी-20 देशों की खासबात यह हैं कि इस संगठन में शामिल देश दुनिया की 60 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन 20 देशों की जीडीपी मिलकर 85 फीसदी बैठती है। वैश्विक व्यापार में इन 20 देशों की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी बैठती है।
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भारत ने दिल्ली में होने वाली जी-2- समिट के लिए अपने मित्र देशों बंग्लादेश, मिस्र, मॉरीशिस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात को भी विशेष मेहमान के तौर पर इस शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया हैं। वहीं दुनियाभर में काम करने वाले अनेक अंतरराष्ट्रीयसंगठनों जैसे यूएन (संयुक्तराष्ट्रसंघ), आईएमएफ(अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष), डब्ल्यूबी, डब्ल्यूएचओ(विश्व स्वास्थ्य संगठन), डब्ल्यूटीओ(विश्व व्यापार संगठन),आईएलओ (अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन), एफएसबी (वित्तीय स्थिरता बोर्ड), आईसीडी( अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण), एयू एयूडीए-एनईपीएडी(अफ्रीकन विकास साझेदारी) , आईएसए, सीडीआरआई, एडीबी (एशियन विकास बैंक) और आसियान देश के अध्यक्षों को भी इस शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया।
जी-20 देशों का एक स्पष्ट संदेश है कि विकासशील देशों की सूची से निकल कर विकसित देशों में शामिल हों। और सारी दुनिया के देशों और मानवता की मदद के लिए हमेशा खड़े रहें। दक्षिण एशिया में भारत का नेतृत्व शक्तिशाली होकर उभरा है यही निराशा चीन को लेकर डूबो रही है। चीन में विगत कई वर्षों से औद्योगिक मंदी और कर्मचारियों में बढ़ता असंतोष उसकी चिंताओं को बढ़ा रहा है। दुनिया के कई देशों में चीन का व्यापारिक लेन-देन बंद हो चुका है। ऐसे में दक्षिण एशिया में भारत के प्रति दुनियाभर के देशों को विश्वास बढ़ा हैं। भारत ने जिस शक्ति के साथ जी-20 शिखर सम्मेलन का नेतृत्व किया है उसका लोहा अमेरिका और ब्रिटेन ने भी माना है। अमेरिका का कहना हैं कि दुनिया के मंच पर भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत के प्रति विश्वास बढ़ाते हुए अमेरिका ने उसे अपना सबसे विश्वसनीय सहयोगी राष्ट्र बताया है।यही कारण हैं कि दिल्ली में संपन्न हुए जी-2- शिखर सम्मेलन में दुनिया का सबसे बड़ा भारत पश्चिम एशिया-यूरो इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने पर सहमति हुई। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर में भारत, अमेरिका, यूएई,सउदी अरब, फ्रांस, इटली, जर्मनी और यूरोपीय संघ की भागिदारी होगी। इसके निर्माण के बाद भारत रेल और पोर्ट के माध्यम से सीधे पश्चिम एशिया और यूरोप के देशों से जुड़ जाएगा।इस कॉरिडोर पर विश्व के शक्तिशाली देशों को साथ लाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के बीआरआई कॉरिडोर को ध्वस्त करने का काम किया है।भारत का कहना हैं कि इस नए कॉरिडोर का लाभ दुनिया के 55 देशों को मिलेगा जिससे मानव कल्याण होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विगत एक दशक में दुनियाभर में एक विशाल बाजार के तौर पर विकसित हो रहा है। यही कारण हैं कि दुनिया के अधिकांश विकसित देश भारत में अपना ज्यादा से ज्यादा व्यापार करना चाहते हैं। भारत के आर्थिक सुधारों और व्यापारिक निवेश की नई परिस्थितियों की तरफ सभी आकर्षित हो रहे हैं। भारत जिस तरह से डिजिटल अर्थव्यवस्था में नए रिकॉर्ड कायम कर रहा है उससे अमेरिका और ब्रिटेन भी पीछे छूट चुके हैं। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी के प्रति अमेरिका सर्वोधिक रुचि दिखा रहा है। विकासशील देशों में भारत की श्रेष्ठता का लोहा जी-20 देश पहले से ही मान चुके है लिहाजा सभी का मानना हैं कि 2047 से पहले भारत विकसित देशों की सूची में जोरदार धमक के साथ शामिल हो जाएगा।
दुनियाभर में आर्थिक मंदी और वैश्विक महामारी कोरोना के बीच भारत का शक्ति के साथ खड़े रहना दुनिया भर में चर्चा का विषय बना रहा। मानव कल्याण की भावना और प्रकृति के संरक्षण की भारत की प्राचीन परंपरा को देखते हुए आज दुनिया के अनेक विकसित देश भारत के साथ दोपक्षीय व्यापारिक समझौते के लिए बांहे पसार कर खड़े हैं। दिल्ली में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन की सफलता के बाद आने वाले पांच वर्षों में भारत की जीडीपी विश्व में 3 नंबर पर पहुंचने की संभावना है। इस शिखर सम्मेलन के बाद भारत में शिक्षा, रक्षा, टेक्नोलॉजी, कृषि, पर्यावरण, स्वास्थ्य, सौर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्टर के क्षेत्र में प्रबल निवेश को लेकर एग्रीमेंट हुए है। आने वाले वर्षों में भारत में रोजगार और उत्पादन की संभावनाएं विकसित होंगी। जिसका लाभ समूची भारतीय आबादी को प्राप्त होगा। दिल्ली में संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन इस लिए भी विश्वभर में चर्चित रहा क्योंकि इस सम्मेलन में श्रमिक, युवा, महिलाओं, सांसदों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियो, शोधकर्ताओं और कारोबारियों को भी शिरकत करने का मौका मिला। हालांकि अभी तक जी-20 का कोई स्थायी दफ्तर नहीं है मगर भारत में हुए सम्मेलन को देखते हुए लगा कि सबकुछ कुशल प्रबंधन एवं पेशेवर ढ़ंग से संचालित किया गया।
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चीन की चिढचिड़ापन
चीन की चिंता भारत और अमेरिका के बीच पनपे नए राजनीतिक रिश्तों को लेकर गहरी होती जा रही है। इसी हताशा और निराशा में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जी-20 के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत नहीं आए। दुनिया के हर मोर्चे पर अमेरिका ने भारत की नीतियों का समर्थन किया है जबकि चीन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को स्पोर्ट नहीं करता। साल 2008 से 2022 तक होने वाली जी-20 की बैठकों में चीन की उपलब्धी बहुत ज्यादा चर्चा का विषय नहीं रही। इसके कई अहम कारण है जैसे चीन का एजेंडा हमेशा छिपा हुआ रहता है। वह किसी भी सम्मेलन को लेकर आपसी विश्वास के साथ चर्चा नहीं करता। चीन दुनिया के गरीब देशों को अपनी आर्थिक ताकत के तौर पर मैनेज करने की रणनीति पर काम करता है। वह लोकतंत्र और मानवीय विकास पर विश्वास नहीं करता। भारत में पिछले एक दशक में होने वाले बदलावों से चीन की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। भारत ने जिस तरह से चीन को अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर निपटाने का काम किया उसे देखकर चीन भारत की कूटनीति को देखकर हैरान है। यही कारण हैं कि वह भारत की आवाज पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अड़ंगा लगाने का काम करता है। भारत ने दिल्ली में संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत पश्चिम एशिया-यूरो इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण पर सहमति बनाते हुए चीन को बहुत पीछे छोड़ दिया हैं।
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आतिथ्य सत्कार देख झूम उठे मेहमान
जी-20 में शामिल होने वाले विदेशी मेहमानों के लिए भारत ने पलके बिछा कर स्वागत किया। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से लेकर उनके साथ आने वाले प्रतिनिधि मंड़ल के सदस्य भारतीय कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, परिधान, खानपान, आयुर्वेदिक उत्पादन और प्राचीन कलाकृतियों को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठे। विदेशी मेहमानों ने लजीज भारतीय व्यंजनों का स्वाद लिया और भारतीय हस्तशिल्प और परिधानों की सुंदरता देखकर जमकर खरीददारी भी की। विदेशी राष्ट्राध्यक्ष भारत की अतिथि स्वागत की परंपरा देखकर अभिभूत हो उठे। जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका और स्पेन के राष्ट्राध्यक्षों ने अपनी इस यात्रा को कभी न भूलने वाली यादगार यात्रा बताया। प्रगति मैदान के भारत मंडपम में देशभर के राज्यों की कला,संस्कृति, शिल्प, खानपान और भारत की डिजिटल क्रांति की झलक देखकर विदेशी मेहमान आर्श्चय से भर उठे। भारत सरकार ने विदेशी मेहमानों के लिए इस तरह की व्यवस्था की थी कि उन्हें एक ही छत के नीचे सारे भारत के दर्शन हो गए। दुनियाभर से दिल्ली आने वाले पत्रकार भारत का आयोजन देखकर आर्श्चयचकित थे। इस दौरान दिल्ली में अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था रही। दिल्ली के होटलों से लेकर सड़को और बाजारों तक सुरक्षा कर्मी चौकसी के साथ तैयार रहे। विदेशी मेहमानों के सम्मान में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कि तरफ से भोज का आयोजन किया था। इस भोज में भारत के सभी राज्यों को भोजन और मोटे आनाज से बने भोजन को परोसा गया। विदेशी मेहमान भारतीय भोजन के स्वाद और वैरायटी को देखकर मंत्रमुग्ध नजर आए।




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