***** जिलापाल ने दिया जांच का आदेश लोगो ने क्राइम ब्रांच से जांच की मांग की *****
झारसुगुड़ा/ओडिशा/31/08/2023/// डीएमएफ फंड को लेकर उड़ीसा में भारी भ्रष्टाचार की खबरें लगातार आती रहती है इसी सिलसिले में झारसुगुड़ा के एक सरकारी स्कूल मैं फंड को लेकरजबरजस्त जनाक्रोश है जनता ने जिला कलेक्टर से शिकायत की है और मांग की है की मामला आपराधिक है इसलिए क्राइम ब्रांचसे जाँच कराइ जाये कलेक्टर ने ज्ञापन लेते हुए कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी
आजकल गरीब बच्चों का अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ना एक सपने जैसा है। इच्छा होने के बावजूद पैसों की कमी के कारण गरीब बच्चे अंग्रेजी माध्यम स्कूल में नहीं पढ़ पाते। परंतु वर्ष 2018 में राज्य के पहले जिला के तौर पर झारसुगुड़ा में डीएमएफ कोष से गरीब बच्चों को निशुल्क अंग्रेजी माध्यम स्कूल में शिक्षा देने की व्यवस्था आरंभ हुई थी। खदान प्रभावित अंचल के गरीब बच्चों की शैक्षिक विकास का लक्ष्य लेकर महत्वकांक्षी परियोजना ‘ज्वेल’ आरंभ हुआ था। किन्तु इस परियोजना जमीनी स्तर पर कितनी कार्यकारी हुई है, बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है, बच्चों के पीछे पैसे किस प्रकार खर्च किए जा रहे हैं तथा अनुदान के खर्च में कोई पारदर्शिता है या नहीं इस बारे में जिला प्रशासन के पास कोई खबर नहीं है। इससे आसानी से अनुमान लगाया जा रहा है कि यह परियोजना कैसे चल रहा होगा।
पिछले चार साल में जिला खदान कोष से करीब 2 करोड़ 61 लाख 89 हजार 350 रुपये खर्च किया गया है, किन्तु परिणाम शून्य है। परियोजना की न तो मॉनिटरिंग की जा रही है, और ना ही किसी का उत्तर दायित्व है। वर्ष 2018 में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन की एक बैठक में निर्णय लेने के बाद डीपीआर प्रस्तुत कर परियोजना सुरू किया गया था। इस शिक्षादान व्यवस्था के संचालन हेतु ब्रजराजनगर में स्थित डेनिएल स्कूल का चयन कर शिक्षा वर्ष 2018-19 से एलकेजी एवं यूकेजी श्रेणी में 25-25 विद्यार्थी अर्थात कुल 50 विद्यार्थियों का दाखिल कर पढ़ाई शुरु की गई थी। इन गरीब बच्चों के हॉस्टेल में रहने, खाना, कपड़ा, दवाईया, पाठ्य उपकरण आदि सुविधा डीएमएफ कोष से उपलब्ध कराने की व्यवस्था थी। इसके संचालन के लिए एक कमेटी का भी गठन किया गया था। जिला के खदान प्रभावित अंचल में रहने वाले गरीब बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम शिक्षा व्यवस्था हेतु डीएमएफ अनुदान से यह परियोजना सुरु हुआ था। इस परियोजना के संचालन हेतु जिला कल्याण अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, सर्वशिक्षा अभियान के डीपीसी, डीसीपीओ, डीएमएफ के एक प्रतिनिधि एवं कार्य संचालन के दायित्व पर मौजूद संस्था डेनिएल के एक प्रतिनिधि को लेकर कमेटी का गठन किया गया था। हर साल 25 बच्चों को चयन कर अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाई करने का अवसर देने की व्यवस्था की गई थी। बच्चों का बीमा करने भी निर्णय हुआ था। प्रति एक बच्चे के पीछे सालाना करीब 60 हजार रुपये खर्च होने का आकलन किया गया था। ब्रजराजनगर में यह स्कूल खुलने सहित नवोदय एवं अन्वेषा गाइड लाइन अनुसार बच्चों का चयन किया गया था। मॉनिटरिंग एवं गुणात्मक शिक्षा के लिए कमेटी को दायित्व दिया गया था। जिला में ब्रजराजनगर, बेलपहाड़ शहरांचल से जुड़ी खदान अंचल सहित लखनपुर ब्लॉक के खदान प्रभावित अंचल के बच्चों को यह अवसर मिला था। जिला में खदान प्रभावित 126 गांव सूची में शामिल थे, जिनमें से 99 सीधे तौर पर खदान प्रभावित गांव के बच्चों को इस योजना का लाभ मिलने की घोषणा की गई थी। फुटकर दुकानदार, क्षुद्र एवं नाममात्र के किसान, मजदूर, खदान के चलते विस्थापित हुए परिवार को इस योजना में शामिल करने की व्यवस्था थी। स्क्रूटनी एवं काउंसिलिंग के बाद बच्चों का चयन कर दाखिला देने की व्यवस्था थी। बच्चों को नर्सरी से बारहवीं तक पढ़ाने का लक्ष्य लेकर आरंभ हुई इस परियोजना को चलाने का दायित्व डेनिएल संस्था पर छोड़ दिया गया था। परंतु इस परियोजना की स्थिति देखने पर ऐसा लगता है बच्चों में कुछ खास शैक्षिक विकास नहीं हुआ है। कुछ साल जिला शिशु सुरक्षा अधिकारी के तत्वावधान में चला, किन्तु पिछले वर्ष से इसकी देखरेख का दायित्व जिला शिक्षा अधिकारी को दिया गया था।
इस विषय पर पूछे जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी पुष्पा मिंज ने कहा कि इस परियोजना की अग्रगति एवं पढ़ाई कैसे चल रही है उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। काम में व्यस्त होने के कारण उन्हें कभी भी परिदर्शन करने का मौका नहीं मिला है।
जिला शिक्षा अधिकारी का यह उत्तर काफी चौकाने वाला एवं चिंताजनक है। इस परियोजना में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भी परियोजना में कोई पारदर्शिता नहीं है, और ना ही कोई जांच हो रही है। यहां तक कि बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है उस पर तक ध्यान नहीं किया जा रहा है। इस संदर्भ में जब पत्रकारों ने जिलापाल महोदया से पूछा तो उन्होंने कहा की हां मेरे पास इस बाबत शिकायत आई है तथा मेने जिला सीक्षा अधिकारी को इसकी विस्तुत जांच कर रिपोर्ट पेस करने को कहा है रिपोर्ट आने के बाद ही जो कानूनन कदम उठाना होगा वह उठाएंगे इसी कड़ी में हमने ब्रजराजनगर के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष तथा पूर्व उप नगरपाल वरिष्ठ नेता प्रमोद पंडा से पूछा तो उनका कहना था की डिस्ट्रिक मिनरल फंड को ब्रजराजनगर के विकास के लिए खर्च किया जाना चाहिए किंतु इसे जिले के एक पूर्व बड़े अधिकारी द्वारा बिना किसी जांच अथवा टेंडर के एक स्कूल को इतना पैसा देना तथा वह पैसा का सदुपयोग हो रहा है की नही उसका कोई भी देखभाल नही करना यह बड़े भ्रष्टाचार होने का इसारा कर रहा है उसे तुरंत जांच के दायरे में लाना चाहिए तथा इसका जांच भ्रष्टाचार निरोधक संस्था से करवाना चाहिए वही जब हमने बरगढ़ के सांसद प्रतिनिधि तथा समाज सेवी तपन स्वाई से इस विषय में पूछा तो उनका कहना था की यह हमारे पैसे का सीधा सीधा दुरपयोग किया गया है इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाना चाहिए की वास्तव में कोई पढ़ा है की नही क्या इस पैसे का सदुपयोग हुआ है की नही श्री स्वाई ने कहा की ब्रजराजनगर में और भी अनेक स्कूल है तो फिर इतना बड़ा अमाउंट सिर्फ एक ही स्कूल को किसके कहने पर दिया गया क्या इस पैसे को देने तथा इस स्कूल को इस नियम में लाने के लिए कोई पारदर्शिता अपनाई गई थी की नही यह सभी की जांच सी बी आई तथा क्राइम ब्रांच से करवाई जानी चाहिए तथा पैसे देने वाले अधिकारी तथा लेने वाले स्कूल दोनो से ही वसूली की जानी चाहिए मालूम हो की जिला मिनरल फंड का पैसा खदान के आसपास के लोग तथा अंचल के विकाश में खर्च होना चाहिए किंतु कुछ भ्रष्ट अधिकारी तथा कुछ भ्रष्ट लोगो के द्वारा इस पैसे का दुरपयोग कर इसे हड़पा जा रहा है जिसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग ब्रजराजनगर के लोगो के द्वारा की जा रही है।




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