महत्वपूर्ण तथ्य एवं लाभ
1--
नो बोन कट-- इस विधि द्वारा सीने की बड़ी बोन
को काटने की जरूरत नहीं होती हृदय तक
पहुंचने के लिए सिर्फ एक छोटा छेद जो पसलियों के बीच बना कर इसकी सर्जरी की जाती
है |
2--
छोटा कॉस्मेटिक चीरे
का निशान पुरानी पद्धति के 10 -12 इंच चीरे के मुकाबले 2 से 3
इंच तक का चीरा लगता है वह
भी सीने के साइड में लगाया जाता है जो
किसी भी हालत में दिखता नहीं है पुरानी पद्धति में चीर फाड़ के निशान दिखने से मरीज गिल्टी महसूस करता था वह आप इस छोटे चीरे से पूरा समाप्त हो गया है |
3--
इसमें ब्लड लॉस कम होता है
4--
इसमें दर्द कम जल्दी रिकवरी होती है
5-- इन्फेक्शन का डर कम होता है
6--
इन्फेक्शन का डर कम होता है
7--
की होल हार्ट सर्जरी द्वारा
बाईपास सर्जरी वॉल सर्जरी, दो बाल सर्जरी, दिल के छेद बंद करने जैसे ऑपरेशन किए
जाते हैं जिनका सिलेक्शन रेट 98% से ज्यादा है
की होल हार्ट सर्जरी के बाद जीवित व्यक्ति कुछ दवाइयों के साथ सामान्य
जीवन दो
हफ्ते में पहले जैसे हीअपना
काम के साथ अपना सामान्य जीवन आसानी से
जी सकता है
भारत
में हृदय चिकित्सक और तकनीकी विकास पहले बहुत
कम था इलाज भी बहुत महंगा था हृदय में आई तकलीफ से जहां मरीज भारी चिंता
में पड़ जाता था वही परिवार भी सकते में आ जाता था देश के गिने-चुने महानगरों में
यह सुविधा उपलब्धि थी जो आम लोग की पहुंच से कोसों दूर थी हार्ट अटैक का फोबिया आज
भी है लेकिन अति आधुनिक तकनीकी और अविष्कारों ने काफी हद तक इस फोबिया को जनमानस
के मस्तिष्क से अलग करने की कोशिश की है और और सफलता भी मिली है आज से 5 वर्ष पहले यदि हृदय की शल्य चिकित्सा करना होती
थी तो छाती को चीर कर ही संभव था जिसके दुखद परिणाम यह होते थे की हृदय की शल्य
चिकित्सा तो डॉक्टर ने ठीक-ठाक कर दी है हृदय काम भी ठीक कर रहा है. लेकिन छाती
का पंजर यदि ठीक से नहीं जुड़ने के से वह मृत्यु का कारण बन जाता
था अधिकांश केसों में तो यही होता था
जिसके कारण हृदय रोगी के मरीजों का सर्वाइवल रेट
बहुत कम था लेकिन आज सब कुछ बदल गया है नई तकनीकी ने हृदय की जटिल
बीमारियों को बहुत ही आसानी से शल्य चिकित्सा
कर के सर्वाइवल का रेट 99% अचीव कर
लिया है यह हृदय शल्य चिकित्सा क्षेत्र में अच्छा संदेश है
आज नारायणा हृदयालय के सानिध्य में एम एम आई
नारायणा हृदयालय रायपुर ने इस तकनीकी को अपनाकर छत्तीसगढ़ के अलावा उड़ीसा,
झारखंड, मध्य प्रदेश और विदर्भ के हृदय रोगियों को बहुत राहत दे रखी
है. एम एम आई नारायण हृदयालय रायपुर के
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नितिन राजपूत ने पिछले 2 वर्षों में 1000 से अधिक हृदय
रोगियों को उनके विभिन्न रोगों से मुक्ति दिलाई है. डॉ नितिन राजपूत का सर्वाइवल रेट 99.8 % तक है यह अपने आप में एक अच्छा
रिकॉर्ड है डॉ नितिन राजपूत ने हृदय को लेकर जो नवीनतम तकनीकी का उपयोग करने में
सफलता हासिल की है इसके पीछे नारायणा हृदयालय की इच्छा और मैनेजमेंट टीम ने उन्हें पूरा सहयोग दिया है. डॉ नितिन राजपूत
इस उच्च तकनीकी शिक्षा को हासिल करने जर्मनी भी गए वहां पर उन्होंने पुरानी बड़ी
शल्य चिकित्सा पद्धति को पीछे ढकेलते हुए छोटी शल्य चिकित्सा से हृदय की बीमारियों
को दूर करने की पूरी शिक्षा और ट्रेनिंग ली जर्मनी से लौटकर उस आधुनिक तकनीक को
छत्तीसगढ़ के एम एम आई नारायणा हृदयालय में स्टेबल कर ली है, डॉ नितिन राजपूत दावा है की अब मरीजों को महानगरों की ओर हृदय चिकित्सा के
लिए नहीं जाना पड़ेगा साथ में यह भी कहा है कि कई महानगरों में तो इस तकनीकी का
अभी भी उपयोग नहीं हो रहा है छोटी शल्य चिकित्सा से जहां मरीजों को पांच -सात दिन
में घर जाने की इजाजत मिल जाती है वही बड़ी सर्जरी के साथ दी जाने वाली हिदायतो से भी मुक्ति मिल
गई है बड़ी सर्जरी के होने पर डॉक्टर उन
मरीजों को जो सलाह देते थे उसमें मरीज काफी अनइजी फील करता था ,मसलन हृदय में किसी भी तरीके का दबाव नहीं आना चाहिए उसका कारण हृदय की
शल्य चिकित्सा से नहीं था. वह दबाव बड़ी शल्य चिकित्सा को लेकर था यह एक बड़ी समस्या थी मरीज उसको
फॉलो करने में चूक कर ही लेता था .जिसके दुखद परिणाम सामने आते थे. और अधिकांश
मरीजों की जान चली जाती लेकिन छोटी शल्य चिकित्सा से इस समस्या को पूर्ण रूप से
दूर कर लिया गया है |
डॉ नितिन राजपूत का यह मानना है कि
ह्रदय रोगियों को समय पर इलाज कराना जरूरी है अधिकांश रोगी इस समस्या को टालते
रहते हैं जो बड़ा रूप ले लेती है एमएमआई नारायणा ह्रदय अस्पताल में हृदय केयर करने की नई पद्धति को शुरू किया है
जिसमें हृदय फेलियर को समय पर चिकित्सा देना मकसद है हृदय फेलियर का मतलब हृदय का
कमजोर होना है अक्सर लोग हार्ट फैलियर ओर हार्ट अटैक को एक ही मान लेते हैं लेकिन
ऐसा नहीं है यह लगभग अलग -अलग है हॉट फैलियर का मतलब है हृदय शरीर की आवश्यकता के
अनुरूप रक्त प्रवाह नहीं कर रहा है. इसकी
जांच करना आवश्यक है हार्ट फैलियर के कारण
शरीर अंगों में जरूरी ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही होती है. जबकि हटक रेट के मामले
में हृदय की मांसपेशियों को ठीक तरीके से ऑक्सीजन नहीं मिलती
है सामान्यतः हार्ट फेलियर और हार्ट से जुड़ी अन्य समस्याओं का नतीजा होता
है कि कॉर्निया धमनियों में ब्लॉकेज, हार्ट
अटैक, विद्युत यंत्र
में समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं हृदय फेलियर एक गंभीर समस्या है जो अधिकांश
मामलों में कई सालों तक धीरे-धीरे बढ़ती है जिससे हृदय को क्षति पहुंचाने पर हृदय
की मांसपेशियां ठीक तरीके से काम नहीं कर पाती और हृदय रोगी गंभीर समस्या में
पहुंच जाता है हार्ट फैलियर पद्धति से उसे
इस समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाती है सेंट्रल इंडिया में इस पद्धति का उपयोग
सिर्फ एमएमआई नारायणा हृदयालय में ही हो रहा है
जिसका लाभ छत्तीसगढ़ के अलावा आसपास के राज्यों के मरीजों को भी मिल रहा है
| हृदय की गंभीर बीमारी इसके पहले मरीज को अपनी गिरफ्त में
ले उसे इस पद्धति से कॉफी हद तक कम किया जा सकता है |




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