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कोऑपरेटिव गुणवत्ता बढ़ाकर कार्पाेरेट को दें चुनौती - श्री भूपेश बघेल

Anil Choubey 27-07-2019 17:24:16


मध्य क्षेत्र के राज्यों में सहकारी आंदोलन के समक्ष अवसर और चुनौतियां‘

रायपुर,/ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज यहां ‘मध्य क्षेत्र के राज्यों में सहकारी आंदोलन के समक्ष अवसर और चुनौतियां‘ विषय पर आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता ने भारत में लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने मंे महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज के कड़ी प्रतिस्पर्धा के युग में यह जरूरी है कि कोऑपरेटिव क्षेत्र अब अपनी गुणवत्ता बढ़ाने पर पूरा जोर दे और कार्पाेरेट को चुनौती दे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए नया रायपुर मंे भवन उपलब्ध कराने की घोषणा की।

 

यह सम्मेलन भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित किया गया था। सहकारिता से जुडे करोड़ों लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए यह भी जरूरी है कि सहकारिता के कार्याें के प्रति व्यवसायिक दृष्टि अपनाई जाए और क्वालिटी पर सर्वाधिक जोर दिया जाए। अगर गुणवत्ता पर जोर नहीं दिया गया तो सहकारिता मार्केट में अपने आप को स्थापित नहीं कर पाएगा और सरकार पर निर्भर हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार का उद्देश्य सहकारिता को प्रोत्साहित करना है पंगु बनाना नहीं। 

 

        मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी जरूरी है कि सहकारिता से जुड़े उत्पाद और सेवाएं हमारे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी योजना के माध्यम से हम उन चुनौतियांे और समस्याओं का सामना कर सकते है। जो आज केवल देश की नहीं बल्कि दुनिया की भी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ मंे अब ओनहारी और उतेरा की फसल करीब-करीब बंद सी हो गई है। इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए फसलों को पशुओं के चराई से बचाने, वर्मी कम्पोस्ट को बढावा देने और जल संसाधन बढ़ाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने सहकारी संस्थाओं द्वारा नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी योजना मंे भूमिका निभाने की इच्छा व्यक्त किए जाने पर उनका स्वागत किया और कहा कि सबके द्वारा मिलकर कार्य किए जाने से छत्तीसगढ़ देश भर के लिए रोल मॉडल बनेगा। 

 

     मुख्यमंत्री ने कहा भारत सरकार ने तीन वर्षाे तक लगातार वर्मी एवं कम्पोस्ट खाद से फसल लेने पर उसे जैविक उत्पाद घोषित करनी की घोषण की लेकिन इस अवधि को बढा कर अब पांच वर्ष कर दिया है। मुख्यमंत्री ने भारत सरकार पुनः विचार करते हुए फिर से जैविक उत्पाद घोषित करने की समय-सीमा घटा कर पूर्व के अनुसार तीन वर्ष रखने की मांग की। 

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय ंिसंह ने कहा कि कृषि, कृषक और सहकारिता एक दूसरे के पूरक है। इनमें बेहतर सामंजस्य की जरूरत है। छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य है जिसमें किसानों का लगभग साढ़े ग्याहर हजार रूपये की राशि का कृषि ऋण माफ किया है। नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी योजना एक ऐसी योजना है जिसमें देश को प्रकृति की रक्षा, जल संसाधन को बचाने, पशुधन को बढ़ाने और जैविक कृषि उत्पादों को बढ़ाने की दिशा में देश को अच्छी राह दिखाई है। 

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. चन्द्रपाल यादव ने बताया कि देश में अनेक सहकारी संस्थाएं अदभुत कार्य कर रही हैं। किसानों की खुशहाली और मजबूती के लिए सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाने की आवश्यकता हैै। उन्होंने कहा हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और नीली क्रांति लाने में सहकारिता की भूमिका रही है। 

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. पाटील ने बताया कि उनका विश्वविद्यालय सहकारिता के क्षेत्र में अनुसंधान करने को तैयार है। सहकारिता के माध्यम से छत्तीसगढ़ के उत्पादों के प्रसंस्करण का कार्य बेहतर तरीके से कराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आई.सी.ए.आर. ने इस विश्वविद्यालय को देश के टॉप टेन विश्वविद्यालयों की रेंकिंग में स्थान दिया है।  


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