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घर पहुंच सेवा के साथ उधार में भी शराब देने का प्रचलन है शायद ही देश के किसी प्रदेश में ऐसी सुविधा हो
छत्तीसगढ़ //// विधानसभा में हाल ही में आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा है
कि अभी तक करीब 6000 करोड़ के शराब बिक्री से राजस्व की प्राप्ति हुई है खुशी की
बात नहीं है आंकड़े बतला रहे हैं की छत्तीसगढ़ में शराब सेवन का
प्रचलन कितना अधिक हो गया है वैसे तो करीब-करीब अधिकांश घरों
में एक न एक सदस्य शराब का स्वाद चख रहा है गांव में सबसे बुरी स्थिति है जिस
तरीके से व्यापार में तरक्की होती है उसी तरीके से अवैध शराब की बिक्री में भी
इतनी तरक्की हो गई है की बाकायदा अवैध शराब बिक्री करने वालों के व्हाट्सएप पर
सेवन करने वाले की रिक्वायरमेंट आती है पते के साथ मोबाइल नंबर के साथ किस ब्रांड
की कौन सी शराब चाहिए है यह भी उस व्हाट्सएप में मैसेज
होता है. शराब कोच्चिया आए हुए व्हाट्सएप संदेश के अनुसार
निश्चित जगह पर शराब, चखना. प्लास्टिक के गिलास और ठंडे पानी की बोतल पहुंचा देता है, इस सेवा के बदलें वह अधिक दाम पर शराब उपलब्ध कराता है इसे घर
पहुंच सेवा कहते हैं. इस सेवा में एक और सुविधा है कि
यदि तत्काल आपके पास पैसे नहीं है तो बाद में दे दीजिए आप शराब पीते रहिए अवैध शराब विक्रेता का कलेक्शन एजेंट आपसे
आकर पैसा ले लेगा इतनी अच्छी सुविधा शायद ही किसी और प्रदेश में हो इसलिए भी शराब
वैध तरीके से तो लाइन में लगकर मिलती है लेकिन घर पहुंच सेवा में इस व्यापार को
अच्छी खासी तरक्की दे रखी है
अवैध शराब का कारोबार पहले ठेकेदार, आबकारी अधिकारी और पुलिस मिलकर सिंडिकेट की तरह चलाती थी. उस वक्त इस व्यापार में कॉफी अंकुश लगाया जाता था इतनी छूट
नहीं होती थी ठेकेदार के बाहुबली इलाकों में घूम घूम कर कोचीओं की धर पकड़ कर पुलिस और आबकारी
विभाग को सूचित करते थे पूर्व में अवैध शराब जिन थानेदार आबकारी अधिकारियों के
इलाकों में प्रचलित थी उन पर भी उच्च अधिकारी शिकंजा कसते थे यह एक प्रशासनिक
प्रक्रिया थी जिसके दबाव के कारण अवैध शराब विक्रेता के मन में हमेशा डर बना रहता
था लेकिन आज परिस्थितियां बिल्कुल उल्टी हो गई है बड़ा ही दिलचस्प वाक्य है कि
शराब के धंधे से प्रशासन को आबकारी विभाग को पुलिस विभाग को जो एक बड़ी रकम बिना
किसी मेहनत के मिल जाए करती थी. जब सरकारी ठेके सरकार ने खुद
चलाने का फैसला किया तो भारी भरकम अवैध कमाई
बंद हो गई अब सरकार प्रशासनिक अधिकारियों को कैसे एक्साइज का कमीशन देगी सरकार ने
जैसे ही घोषणा की की अब हम शराब की दुकान खुद संचालित करेंगे इन तमाम अधिकारियों के चेहरे
पर चिंता की लकीरें आ गई वही 3000 करोड़ से ऊपर के अवैध शराब बिक्री
के धंधे को भी चोट लगी कोच्चिए भी इस फरमान से काफी दुखी थे इस अवैध शराब के धंधे में वह तमाम बड़े
ठेकेदार हैं जो वैध तरीके से दुकान है सिंडीकेट के कारण नहीं ले पाते थे लेकिन शराब का धंधा तो उनको करना ही था अवैध
शराब कारोबारियों ने तत्काल सिंडिकेट बनाकर छत्तीसगढ़ शासन और पुलिस
विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क किया और एक अघोषित समझौता कर लिया की सरकारी शराब ठेके से भले ही आपको मंथली का पैसा ना आए हम आपको अग्रिम राशि
के रूप में यह क्षतिपूर्ति रकम पहुंचाते रहेंगे आप की छत्रछाया में सिर्फ
हमारे अवैध शराब के धंधे को फलने फूलने दीजिए मामला पैसे का था चाहे ठेकेदार दे या
अवैध शराब का विक्रेता दे शो समझौता हो गया और उसी समझौते के तहत अवैध शराब बिक्री का कारोबार धड़ल्ले से जिलों
में थानेदार की कृपा चलने लगा अब
प्रश्न उठता है कि पहले तो ठेकेदार बिना
बिल की शराब इन कोचीओं को उपलब्ध करा देती थी लेकिन अब तो सरकार ही शराब बेच रही है उसका भी
हल निकाल लिया गया शराब मैन्युफैक्चरिंग से संपर्क कर बिना बिल की शराब जिसमें किसी भी तरीके की कोई ऑथेंटिक जानकारी उसके रैपर
में नहीं होती है को इन अवैध शराब कारोबारियों को उपलब्ध करा दी
जाती है फिर वह अपने नेटवर्क के द्वारा उस व्हाट्सएप मैसेंजर को शराब पहुंचा देते
हैं
सरकार मुगालते में रहते हुए या बयान दे रही है कि जब से हमने
शराब बिक्री शुरू की है तब से अवैध शराब बिक्री में कमी आई है लेकिन यह गलत है वस्तु स्थिति है की अवैध शराब
विक्रेताओं ने पीने वालों को इतनी सुविधाएं दे रखी है की पियक्कड़ सरकारी ठेके की महंगी शराब नहीं
पीते अवैध शराब विक्रेताओं की शराब ठेके पर बिक रही शराब की कीमत से कम भी होती है
घर पहुंच सेवा भी होती है उधारी भी मिलती है इतनी सुविधा मिलने पर अवैध
कारोबारियों का व्यापार सरकार से दुगना है सरकार भी जानती है उच्च अधिकारी भी है
जानते हैं अबकारी वाले भी जानते हैं लेकिन सबकी मिली भगत से हिस्सेदारी से यह काम सुचारू रूप से चल रहा है




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