**** कम्पा मद में शिष्टाचार की बानगी कुछ इस तरह है कि रायपुर CCF जे आर नायक के यहां यदि केम्प मद में काम लेना है तो CCF को 15 % पहले जमा करो फिर तमाम डीएफओ को 10 % के हिसाब से शिष्टाचार भेंट करो फिर रेंजर 5% के हिसाब से तो अकाउंटेंट 2% के हिसाब से शिष्टाचार करते हैं यह जग जाहिर हे , तमाम ठेकेदार और सप्लायर को यह आंकड़े पता है खुलकर कोई नहीं बोलता लेकिन जैसे ही काम मांगने जाओ तो शिष्टाचार पहले बता दिया जाता है कटघोरा ,बिलासपुर, जगदलपुर में यह राशि 50% से ऊपर जाती है ***
रायपुर 30/04/2023 ///// कैंपा मद में जो भी काम हुए हैं उन कामों को विभाग के द्वारा ही किया गया है , विभाग ने बड़ी चतुराई से मटेरियल के रेट बुलाए खाना पूर्ति की और अपने चहेते अधिकारियों को अपनी शिष्टाचार की शर्तों पर कैंपा मद से हजारों करोड़ के काम आवंटित कर दिए जंगल में मोर नाचा किसने देखा की तर्ज पर सरकार आंकड़े प्रस्तुत करती रही सरकार ने कहा 25 लाख नालों का उन्नयन कर दिया और 39 सो करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए अब यदि उन नालों का उन्नयन हुआ होता तो जंगली जानवर शहर की तरफ पानी की तलास के लिए नहीं भागते और सडक दुर्घटना में मोट नहीं होती नहीं ना ही चीतलों का शिकार कुत्ते करते |
जैसे ही कांग्रेस सरकार बनी केंद्र सरकार से सबसे पहले 6 हजार करोड़ रुपए कैपा मद मे जंगलों के उन्नयन के लिए आया था उस वक्त भी श्रीनिवास कैंपा के सर्वे सर्वा होते थे आज भी हैं इनके बाद अब यह कार्यभार किसे दिया जाएगा यह देखने वाली बात है कैंपा का फंड एक निश्चित गाइडलाइन के तहत ही खर्च किया जा सकता है उनके रहते गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया और तमाम तरह के कार्य विभाग द्वारा करावा कर पूरा पैसा बुक कर दिया गया |
इसी तरह पिछले 4 वर्षों का कैंप आमद का फंड गाइडलाइन के विपरीत जाकर किए गए कार्यों में बुक करा दिया गया जंगलों का उन्नयन तो हुआ नहीं ऐसे - ऐसे नालों में बांध बना दिए गये जिनमें पानी ही नहीं रहता पगडंडियों को नाला दिखाकर नाला किलोजर कर दिए पहली ही बरसात में ताजे बने स्टॉप डेम बह गए सबसे ज्यादा शिष्टाचार कट्घोरा वन मंडल. बिलासपुर वन मंडल . कोंडा गांव वन मंडल, बस्तर के वन मंडलों में हुआ जिसकी कोई जांच नहीं हो रही है ना ही कोई पूछने वाला कैंपा का कार्य और उसका मद वन विभाग के अधिकारियों के लिए एक जर्सी गाय की तरह है जो बिना जांच-पड़ताल के शिष्टाचारी अधिकारियों को भरपूर दूध पिलाती है , दोहन रेंजर के हाथों से शुरू होता है \
शिष्टाचार का मद इतना तगड़ा था की जिसकी बंदरबांट रेंजर से लेकर कैंपा प्रभारी तक हुई है और जो पैसा जंगलों के उन्नयन में लगना था वह शिष्टाचार की भेंट चढ़ गया उसी का ईनाम है की पांच -- पांच सीनियर आईएफएस को दरकिनार कर श्रीनिवास को प्रमुख बना दिया गया




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