गोधन न्याय योजना से 3.30 लाख से अधिक ग्रामीण पशुपालक लाभान्वित
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बीते एक साल में लाभान्वितों की संख्या 58 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
रायपुर, 15 मार्च 2023 //// राज्य में गोधन न्याय योजना की लोकप्रियता और इससे ग्रामीणों का जुड़ाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। गौठानों में इस योजना के तहत 2 रूपए किलो में गोबर की खरीदी से गांवों में रोजगार और आय का बेहतर अवसर सुलभ हुआ है। गोबर बेचने से हो रहे लाभ के चलते ग्रामीण अंचल में पशुपालन को बढ़ावा मिला है। गौठानों में गोबर खरीदी से वर्तमान में 3 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण पशुपालक किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। बीते एक साल में इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित पशुपालक ग्रामीणों की संख्या 2.08 लाख से बढ़कर 3.30 लाख से अधिक हो गई है। लाभान्वितों की संख्या में यह वृद्धि 58 प्रतिशत है।
राज्य में सुराजी गांव योजना के गरूवा कार्यक्रम के अंतर्गत गोधन के संरक्षण और संर्वधन के लिए गांवों में गौठानों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। राज्य में अब तक 10,687 गांवों में गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 9757 गौठान निर्मित एवं 753 गौठान निर्माणाधीन है। अभी 178 गौठानों का निर्माण कार्य शुरू कराया जाना है। निर्मित गौठानों में छत्तीसगढ़ सरकार की मंशानुरूप गौठान समितियों द्वारा पशुधन देख-रेख, उपचार एवं चारे-पानी का निःशुल्क प्रबंध है।
गौरतलब है कि राज्य में गोधन न्याय योजना की शुरूआत 20 जुलाई 2020 हरेली पर्व से हुई थी। इस योजना के तहत गौठानों में 28 फरवरी 2023 तक 107.75 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है, जिसके एवज में गोबर विक्रेता ग्रामीण पशुपालकों को 215.50 करोड़ रूपए का अतिरिक्त लाभ हुआ है।
गौठानों में 28.98 लाख क्विंटल कम्पोस्ट खाद का उत्पादन

22.17 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय से 206.57 करोड़ की आय
गोधन न्याय योजना के तहत राज्य के गौठानों में 2 रूपए किलो में क्रय किए जा रहे गोबर से महिला समूहों द्वारा अब तक कुल 28 लाख 98 हजार 303 क्विंटल कम्पोस्ट खाद का उत्पादन किया गया है, जिसमें 23 लाख 24 हजार 864 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट, 5 लाख 54 हजार 515 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट एवं 18,924 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट प्लस खाद शामिल है, जिसे सोसायटियों के माध्यम से क्रमशः 10 रूपए, 6 रूपए तथा 6.50 रूपए प्रतिकिलो की दर पर विक्रय किया जा रहा है।
गौठानों में उत्पादित कम्पोस्ट में से 18.22 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट, 3.91 लाख क्विंटल सुपर कम्पोस्टर तथा 3192 क्विंटल सुपर प्लस कम्पोस्ट का विक्रय हो चुका है। जिसकी कीमत 206 करोड़ 57 लाख रूपए है। राज्य के 6158 गौठानों में फिलहाल 5.02 लाख वर्मी कम्पोस्ट तैयार है, जिसके विक्रय के लिए पैकेजिंग की जा रही है।
गौठानों में गोबर से जैविक खाद, जैविक कीटनाशक उत्पादन के अलावा महिला समूह गो-काष्ठ, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां एवं अन्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय कर लाभ अर्जित कर रही हैं। गौठानों में महिला समूहों द्वारा इसके अलावा सब्जी एवं मशरूम का उत्पादन, मुर्गी, बकरी, मछली पालन एवं पशुपालन के साथ-साथ अन्य आय मूलक विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे महिला समूहों को अब तक 113 करोड़ 11 लाख रूपए की आय हो चुकी है। राज्य में गौठानों से 13,063 महिला स्व-सहायता समूह सीधे जुड़े हैं, जिनकी सदस्य संख्या 1,50,036 है। गौठानों में गोबर से विद्युत एवं प्राकृतिक पेंट सहित अन्य सामग्री का भी उत्पादन हो रहा है।
राज्य में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की 19 यूनिट शुरू गोबर से 44 हजार 160 लीटर प्राकृतिक पेंट उत्पादित
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26 हजार 292 लीटर प्राकृतिक पेंट के विक्रय से 47.71 लाख की आय गोबर से प्राकृतिक पेंट उत्पादन की 45 इकाईयां स्वीकृत
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप राज्य में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए स्थापित गौठान तेजी से ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित होने लगे हैं। गौठानों में विविध आयमूलक गतिविधियों के संचालन के साथ-साथ नवाचार के रूप में गोबर से प्राकृतिक पेंट का उत्पादन तेजी से होने लगा है। वर्तमान में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए 19 यूनिट शुरू हो चुकी है। क्रियाशील यूनिटों के माध्यम से अब तक 44,160 लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन किया गया है, जिसमें से 26,292 लीटर प्राकृतिक पेंट के विक्रय से 47 लाख 71 हजार रूपए की आय हासिल हुई है। राज्य में फिलहाल 45 यूनिट स्थापित किए जाने की मंजूरी दी गई है, जिसमें से अभी 26 गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की यूनिट स्थापना की जा रही है।
गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए कुल 45 पेंट उत्पादन यूनिट की स्वीकृति दी गई है, जिसमें 19 की स्थापना पूरी कर वहां उत्पादन शुरू हो चुका है। रायपुर एवं दुर्ग जिले में 3-3, कोरबा जिले में 2 यूनिट स्थापित हुई है, जबकि कांकेर, बालोद, कोरिया, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, बीजापुर, बेमेतरा, सूरजपुर, सरगुजा, नारायणपुर एवं बस्तर जिले में 1-1 यूनिट स्थापित एवं क्रियाशील हो चुकी हैं। रायपुर जिले की 3 यूनिटों में अब तक सर्वाधिक 20,841 लीटर, कांकेर में 7878 लीटर, दुर्ग में 2900, बालोद में 1300, कोरबा में 200, कोरिया में 800, कोण्डागांव में 3868, दंतेवाड़ा में 1343, बीजापुर में 1090, बेमेतरा में 500, सूरजपुर में 500, बस्तर में 1840 लीटर, सरगुजा में 400 एवं नारायणपुर में 700 लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन हुआ है। उत्पादित पेंट के विक्रय से अब तक 47.71 लाख रूपए की आय अर्जित हुई है।




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