महावीर कोलवासरी की जनसुनवाई को रद्द
रायगढ आखिर रायगढ जिले में घरघोड़ा
ब्लाक के भेगारी में स्थित महावीर कोलवासरी की जनसुनवाई को रद्द कर दिया गया है ।
इसके पहले महाजेको की जनसुनवाई भी रद्द कर दी गई थी. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के
बाद यह आशंका की जा रही थी कि यह जनसुवाई भी होना संभव नहीं हैं।सभी गांवों में
भारी जन विरोध हो रहा था। गांव के गांव की बर्बादी और लोगों जमीन प्रदूषण और पूरी
तरह गैर कानूनी तरीके से जन सुनवाई का ग्रामीण कर रहे थे.धरना प्रदर्शन और
हाईकोर्ट तक इसका विरोध किया गया. हाईकोर्ट ने अपने आदेश मे कहा की जनसुवाई की
तारीख ,स्थान और जनसुवाई के दिन उपस्थित
रहने की अनिवार्यता पर्यावरण विभाग के मेंबर सेक्रेटरी को है न कि कलेक्टर का.वह
सामान्य कानून व्यवस्था का काम कर सकते हैं .मूलतः जनसुनवाई नहीं कर सकते.
जनसुनवाई मात्र एक माध्यम है
पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया के लिए जिसके माध्यम से प्रभावित लोग सरकारी अधिकारियों
के साथ सीधी बात कर सकते हैं और परियोजना से संबंधित चिंताओं के बारे में परियोजना
के प्रस्तावक जनसुनवाई की प्रसंगिकता रेखांकित लोकतंत्रिक भागीदारी शासन के
सिद्धांत
और सतत विकास के लिए प्रकृति न्याय को लेकर लोगों के हितों को -कभी भी कम
नहीं किया जा सकता हालांकि यह कल प्रतीकात्मक कदम है इतने सारे कानून के केंद्र
में भारतीय अदालत हैं सर्वोच्च न्यायालय और
उच्च न्यायालय में विवादित अदालतें और नेशनल की चुनर को जो करना पड़ता है वह सार्वजनिक रूप से बार-बार कदम बढ़ाने और उसका महत्व स्पष्ट करना
नीति और पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया है इस लेख न्याय और अन्याय की एक श्रंखला को समावेश करता है ।
वैसे तो जनसुनवाई की गाइडलाइन जनहितकारी है पर उस जनसुनवाई में कुछ ऐसे उपद्रवी
तत्व भी शामिल हो जाते हैं जिनका उस क्षेत्र से कोई लेना देना नहीं है वह सिर्फ
हितों की बात को कुतर्कों के आधार पर करके माहौल बिगाड़ देते हैं और जिस उद्योग को
जन सुनवाई
करना है उस पर अनैतिक दबाव बनाकर
लेन-देन में सक्रिय हो जाते हैं यहीं से स्वच्छ निष्पक्ष और पारदर्शी जनसुनवाई में
बाधा आती है गाइडलाइन में साफ विदित है कि जो लोग प्रभावित हो रहे हैं उनके अलावा
किसी को भी अगर ऑब्जेक्शन है तो वह सुनिश्चित अदालतों में जाकर अपनी बात रख सकता
है लेकिन ऐसा होता ही है ऐसे तत्व
जो अपने आप को तथाकथित पर्यावरण
के संरक्षक कहते हैं वह जनसुनवाई में आए हुए लोगों को गुमराह कर जन सुनवाई की
प्रक्रिया में बाधा डालते हैं मूलतः जनसुनवाई में पर्यावरण को लेकर सरकार भी गंभीर
रहती है मुआवजे को लेकर भी सरकार गंभीर है फिर भी सुनवाई में पर्यावरण की आड़ में
अलग-अलग हितों के लोग बाधा पहुंचाकर विकास के कार्यों में रोक लगाने की कोशिश करते
हैं इस पर सरकार को स्पष्ट गाइडलाइन तैयार कर सामने रखना चाहिए ताकि प्रभावित
लोगों के जनजीवन पर भी इस जनसुनवाई से होने वाले नुकसान को बचाया जा सके और कतिपय
पर्यावरण विदों को भी उपद्रव करने का मौका ना मिले
महाजेनको की जनसुनवाई निरस्त करते हुये
कलेक्टर ने लिखा था कि एसपी रायगढ की रिपोर्ट के आधार पर यह निरस्त कर रहे है ,जब कि पुलिस की रिपोर्ट तो एक
सप्ताह पहले ही आ गई थी.
अब यह माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
के हस्तक्षेप तथा भारी जन दबाव के चलते कलेक्टर ने यह निरस्त किया है ।
जनसुनवाई
को स्थगित करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी । इसके लिए ग्रामीणों ने मोर्चा
भी खोल दिया था । कलेक्टर रायगढ़ ने इस विषय पर सोच समझ कर जनसुनवाई को स्थगित
करने की बात कही है ।
<!--[if !supportLineBreakNewLine]-->
<!--[endif]-->




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments