रायपुर//
पूरे देश में छत्तीसगढ़ी एक ऐसा प्रदेश है जहां पर खुली सड़क पर मोटरसाइकिलओ की
आपसी भिड़ंत में हर वर्ष मोटरसाइकिल चालकों की
सैकड़ों जाने चली जाती है, यह तो मान लिया जाता है की
मोटरसाइकिल किसी बड़े वाहन से टकराई और उसमें मौत हो गई तो कारण समझ में आता है , लेकिन मोटरसाइकिल से मोटरसाइकिल
के टकराने पर मौतें हो जाना आश्चर्यजनक और चिंता का विषय है इस तरह की की खबरें
पिछले 10 वर्षों से
अधिक आ रही है
मोटरसाइकिल
चलाने वाले अक्सर तीन सवारी मैं होते
हैं हेलमेट नहीं लगाते हैं और रफ्तार का तो कुछ पूछो ही नहीं किस्मत से सड़कें भी
काफी कुछ सुधरी और सपाट हो गई है. लेकिन आमने सामने मोटरसाइकिल से टकराना यह एक
शोध और चिंता का विषय है मेरा मानना है की खुली सड़क पर जब मोटरसाइकिल सवार उसे 70 80 की स्पीड से चला रहा होता है और
सामने से दूसरी मोटरसाइकिल आ जाए तो वह या तो घबरा जाता है, यह उसे पता ही नहीं होता कि उससे
किस तरीके से बचके निकला जाए साइकिल चलाने वाला अनाड़ी यह नहीं समझता और मोटरसाइकिल को किस तरह से बच के चलाए जाए और दोनों मोटरसाइकिले आमने सामने से टकरा जाती है मौतें तो होती ही है हाथ पैर तो टूटते ही हैं ।
राज्य बनने के बाद धान के कटोरा कहलाने वाले
छत्तीसगढ़ के छोटे बड़े किसानों से सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदना शुरू किया इस
प्रक्रिया ने किसानों को एक मुफ्त अच्छी रकम हाथ में लगने लगी किसानों को मिलने
वाली इस मोटी रकम पर मोटरसाइकिल डीलरों की नजर पहले से थी उन्होंने अपने एजेंटों
को गांव में नियुक्त कर ग्रामीण किसानों को मोटरसाइकिल खरीदने के लिए मोटिवेटेड
किया समर्थन मूल्य में पैसा मिलते ही अधिकतर किसान सबसे पहले मोटरसाइकिल खरीदता है
फिर टीवी खरीदता है
फिर मोबाइल खरीदता है और मोटरसाइकिल
खरीदने की खुशी में वाह शराब दुकान जरूर जाता है आज पूरे छत्तीसगढ़ के गांव गांव
में साइकिले गायब हो गई हैं उनकी जगह मोटरसाइकिल ने ले ली है मोटरसाइकिल अब गांव का स्टेटस सिंबल भी है इतनी बड़ी संख्या में बिना नव शिखिये
मोटरसाइकिल चलाना जाने वालों के हाथों में नई
तकनीकी की मोटरबाइक आ गई है ।
यह भी जगजाहिर है की पैसे खिलाकर
टू व्हीलर का लाइसेंस प्राप्त करना सबसे सरल है लाइसेंस भी आसानी से मिल रहा है
मोटरसाइकिल भी आसानी से मिल रही है मोटरसाइकिल को चलाने के लिए पेट्रोल हर गांव की
किराना दुकान में उपलब्ध है यह तमाम सुविधाओं के कारण होड़ मची हुई है की हर गांव
में हर घर में खाने को हो या ना हो मोटरसाइकिल जरूरी है और इस होड़ ने उन तमाम अनट्रेंड मोटरसाइकिल चलाने वालों
को सड़क पर उतार दिया है साइकिल चलाने वाला जब 70 की स्पीड पर मोटरसाइकिल चलाता है
तो वह मोड़ पर मुड़ता ही नहीं सीधे
जाकर टकरा जाता है यही विडंबना है की छत्तीसगढ़ में मोटरसाइकिल की आपसी भिड़ंत में
सैकड़ों जाने हर साल जा रही है




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