रायपुर// घोटालों का समुंदर जनसंपर्क विभाग
मैं किस तरीके से लूट हुई उसका जीता जाता उदाहरण यही भी है की कयूमई प्रेस नाम की
एक संस्था ने स्कूल कॉलेज के विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की विकास गाथा नाम की पुस्तक को छापने
के लिए 86 लाख रुपय का भुगतान कर दिया गया मामला यह है कि इस पुस्तक को संवाद की
नोडल एजेंसी के द्वारा ही छापा जाना था
जाना था लेकिन भ्रष्टाचार की चासनी में डूबे अधिकारियों ने कयूमी प्रेस को इसका
आदेश दे दिया और पुस्तके छापने के पहले ही भुगतान भी कर दिया ।
छत्तीसगढ़ संदर्भ 2017 की विकास गाथा को प्रदेश के
शासकीय विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 80000 छात्रों को बांटी जानी थी यह एक
कूट रचित विषय भी था कि इस किताब को पढ़ने के बाद इन युवाओं को प्रतियोगी
परीक्षाओं में लाभ मिल सकेगा लेकिन इस कूट रचित किताब के नाम पर घोटाला हो गया नियम
है कि पुस्तक के प्रकाशन को लेकर जनसंपर्क विभाग ने 3 मर्तबा आदेश जारी किए पहले 50000 प्रतियां छपवाने का आदेश दिए फिर उसे बढ़ाकर 80000 कर दिया गया यह सब कागजों में हुआ
ना तो इतनी पुस्तके आई और ना ही
उनकी इतनी संख्या में छुपाई हुई पिछले 10 वर्षो से इसी उक्त प्रेस इसी तरीके के हथकंडे अपनाकर करोड़ों रुपए के घोटाले करता रहा
है जगजाहिर है की नियमों के मुताबिक छपाई का कार्य जनसंपर्क की नोडल एजेंसी संवाद
से होना था लेकिन इस नियम का पालन नहीं हुआ और 80000 की कॉपियां की फर्जी प्रिंटिंग
के इस
मामले ने तूल पकड़ लिया है प्रिंटिंग प्रेस को 86 लाख का भुगतान भी कर दिया गया है जब यह शिकायत मुख्यमंत्री के पास पहुंची तो
मुख्यमंत्री ने उक्त प्रेस के खिलाफ कार्यवाही करने और जांच के आदेश जारी कर दिए हैं \




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