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कांग्रेस अधिवेशन की तैयारी पूरी

Anil Choubey 22-02-2023 20:58:34


कांग्रेस का अधिवेशन छत्तीसगढ़ में होना राज्य के लिये गौरव का विषय- मोहन मरकाम


रायपुर/22 फरवरी 2023।///  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस का 85 वां अधिवेशन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में होने वाले अधिवेशन की तैयारियां पूरी हो चुकी है।देश भर से अतिथियों का आना शुरू हो गया है।यह क्षण कांग्रेस के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के लिये भी ऐतिहासिक और गौरव पूर्व है। कांग्रेस देश का अकेला राजनैतिक संगठन है जिसका गठन आजादी के पहले हुआ था जिसने देश की आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया। कांग्रेस का पहला अधिवेशन स्थापना के तत्काल बाद 1885 में मुंबई में हुआ जिसमें व्योमेशचंद्र बेनर्जी अध्यक्ष बने। कांग्रेस के 40 वें अधिवेशन 1924 में बेलगांव महात्मा गांधी अध्यक्ष बने थे। 46 वे अधिवेशन में 1929 के लाहौर अधिवेशन में पं. जवाहर लाल नेहरू अध्यक्ष बने थे तथा कांग्रेस के 52 वें अधिवेशन 1938 में हरिपुर तथा 1939 को त्रिपुरी मध्यप्रदेश के अधिवेशन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस के अध्यक्ष बने। रायपुर के पहले दिल्ली में कांग्रेस का 84वां अधिवेशन 2018 में हुआ था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि 28 दिसंबर 1885 को कुछ बुद्धिजीवियों ने भारत के लोगों की जरूरतों उनकी समस्याओं के विमर्श के लिए एक मंच की जरूरत महसूस की जो तत्कालीन हुक्मरानों के समक्ष भारत की जनता की आवाज बन सके सरकार के द्वारा बनाई जा रही नीतियों में भारतीयों की जरूरतों को स्थान दिलवाया जा सके।इन्ही उद्देश्यों को ले कर 17 सदस्यों ने कांग्रेस की स्थापना की जिनमे एओ ह्यूम, दादाभाई नौरोजी, व्योमेश चन्द्र बेनर्जी, दिनशा वाचा प्रमुख थे। कांग्रेस का पहला अधिवेशन व्योमेश चन्द्र बेनर्जी की अध्यक्षता में मुंबई में हुआ। भारतीयों की समस्याओं को उठाने उद्देश्य के लिए गठित की गई कांग्रेस पार्टी बहुत जल्दी ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की मुखर विरोधी बन गयी। गठन से ले कर भारत की आजादी तक कांग्रेस के लगभग 15 मिलियन सदस्य बन गए थे।

 गुलाम भारत के लोगों में राजनैतिक चेतना जागृत कर उनमें आजाद मुल्क की ललक पैदा करना एक बड़ा कठिन काम था, जब तक लोगो मे आजादी और स्वराज की जरूरत की चेतना जागृत नही होगी अंग्रेजी शासन के खिलाफ कोई भी आंदोलन खड़ा नही हो सकता इस बात को कांग्रेस ने भली भांति समझ लिया था इसीलिए कांग्रेस ने शुरू से ही अपने विरोध के कार्यक्रमो में आम आदमी को जोड़ा और सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया।1915में महात्मा गांधी के भारत आगमन के बाद उन्हें कांग्रेस की अध्यक्षता सौपी गयी 1919 में गांधी जी कांग्रेस के प्रतीक पुरुष बन गए और इसके बाद कांग्रेस ने देश भर में अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के खिलाफ जनांदोलनों को खड़ा करना शुरू किया। छोटे-छोटे विरोध आंदोलनों की श्रृंखला धीरे धीरे राष्ट्रीय आंदोलन में परिवर्तित हो गयी। सविनय अवज्ञा, असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन, पूर्ण स्वराज आंदोलन में परिवर्तित हो कर 15 अगस्त 1947 को आजाद भारत के पूर्ण लक्ष्य को अंततः प्राप्त कर ही लिया।

कांग्रेस आजादी का लक्ष्य प्राप्त करने में इसलिए सफल हुई क्योकि वह लोकतांत्रिक मूल्यों को ले कर आगे बढ़ रही थी।आजादी की लड़ाई में कांग्रेस किसी एक वर्ग की नही बल्कि सम्पूर्ण भारत की अगुवाई कर रही थी।कांग्रेस में कई विचार धाराएं थी,गांधी जी सहित कांग्रेस के नेतृत्वकर्ताओ ने वैचारिक मतभिन्नता का पूरा सम्मान किया तथा विभिन्न विचारों को ले कर स्वतंत्र भारत के एक लक्ष्य के साथ कांग्रेस  दुनिया के सबसे बड़े सफल अहिंसक आंदोलन को चलाने में कामयाब हुई।यह कहना अतिशयोक्ति नही होगी कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस भारत के जनमानस की आईना थी।सारा भारत कांग्रेस के साथ था सिर्फ साम्प्रदायिक जातिवादी और अंग्रेजो के प्रति श्रद्धा रखने वाले दल जरूर कांग्रेस के खिलाफ थे।

आजादी के बाद छोटे बड़े रजवाड़ो रियासतों को समाहित कर लोकतांत्रिक भारत के निर्माण के साथ समानता वाले भारत का निर्माण, सबको समान आर्थिक अवसर के साथ सामाजिक और लैंगिक समानता का सुनिश्चित करना बहुत बड़ी चुनौती थी थी। आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू को जानते थे यह सारे लक्ष्य तभी फलीभूत हो सकते है जब भारत आर्थिक रूप से सुदृढ और सुक्षित और स्वस्थ हो। इसीलिये नेहरू जी ने सिचाई परियोजनाओं के साथ बड़े कल कारखानो की नींव साथ मे रखी।नेहरू जी विज्ञान और संस्कृति के सामंजस्य वाले भारत की कल्पना की थी।यही कारण था कि उन्होंने देश मे आईआईएम ,आईआईटी,जैसे अभियांत्रिकी प्रबन्ध संस्थानों से ले कर बेहतरीन चिकित्सा संस्थान अखिल भरतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना की। पंडित नेहरू के बाद की कांग्रेस सरकारों उनके द्वारा स्थापित इस मजबूत नीव पर आधुनिक भारत की शानदार इमारत की स्थापना पर कोई कसर नही छोड़ी।

देश की सामयिक जरूरत के अनुसार कांग्रेस ने समय समय पर प्राथमिकता को बदल कर योजनाओं को बनाया आजादी के पहले  स्वतंत्रता आंदोलन आजादी के बाद गणतंत्र का निर्माण संविधान निर्माण प्राथमिकता में थे नेहरू जी के बाद शास्त्री जी के समय अनाज देश की सुरक्षा को लक्ष्य रख कर जय जवान जय किसान का नारा दिया गया। इंदिरा जी हरित क्रांति बीस सूत्री कार्यक्रम ,अंतरिक्ष कार्यक्रम,परमाणु कार्यक्रम से सुदृढ भारत के लक्ष्य को प्राथमिकता में रखा । राजीव गांधी जब भारत के प्रधानमंत्री बने तब देश को 21 वी सदी की ओर ले जाने के लिए कांग्रेस की प्राथमिकता में सूचना प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर क्रांति थी पंचायतों को सशक्तिकरण कर सत्ता के विकेंद्रीकरण का मार्ग भी खोला गया। पीवी नरसिंहराव जी के समय आर्थिक उदारीकरण को अपना कर वैश्विक व्यापारिक जगत में भारत को मजबूती से खड़ा करने का प्रयास किया गया। यूपीए चेयर पर्सन श्रीमती सोनिया गांधी के मार्गदर्शन तथा मनमोहन सिंह के नेतृत्व में आर्थिक सुधारों के साथ खाद्य सुरक्षा कानून, सूचना के अधिकार, महात्मा गांधी रोजगार गारंटी, शिक्षा का अधिकार, भू-अधिग्रहण जैसे कानूनों को लाकर कांग्रेस ने आम आदमी के जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास किया।

2014 में केंद्र की सत्ता हाथ से जाने के बाद कांग्रेस एक सजग विपक्ष की भूमिका निभा रही है। बहुमत के अतिवादी चरित्र का विरोध जिस बेबाकी और निडरता से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, खड़गे जी कर रहे है वह कांग्रेस के उन्ही मूल्यों उपज है जिन मूल्यों को लेकर कांग्रेस ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आंदोलन और भारत के सबसे बड़े राष्ट्रवादी आंदोलन भारत की आजादी की लड़ाई को लड़ा था। लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपना कर तथा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे अनुभवी शख्स को पार्टी के निचले पायदान ब्लॉक अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना कांग्रेस जैसे दल में संभव है।

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