****** GSI ने 51 खनिज के ब्लॉक्स की रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंपी
62वीं CGPB की मीटिंग के दौरान GSI ने लिथियम और गोल्ड समेत 51 खनिज के ब्लॉक्स की रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंपी। इनमें से 5 ब्लॉक सोने के भंडार हैं। इनके अलावा, पोटाश, मोलिब्डेनम, बेस मेटल से जुड़े हुए हैं। ये मेटल्स 11 राज्यों के अलग-अलग जिलों में मिले हैं। इन राज्यों में जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। *****

नई दिल्ली ///// देश में पहली बार लिथियम का भंडार मिला। इसकी कैपेसिटी 59 लाख (5.9 मिलियन) टन है। लिथियम के साथ ही सोने के 5 ब्लॉक भी मिले हैं। लिथियम (G3) की यह पहली साइट है, जिसकी पहचान जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी में की है। लिथियम एक ऐसा नॉन फेरस मेटल (अलौह धातु) है, जिसका उपयोग मोबाइल-लैपटॉप, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) समेत अन्य चार्जेबल बैटरी बनाने में किया जाता है। यह एक रेअर अर्थ एलिमेंट है। भारत लिथियम के लिए अभी पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर है।
भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। 2020 से भारत लिथियम आयात करने के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर रहा। भारत अपनी लिथियम-ऑयन बैटरियों का करीब 80% हिस्सा चीन से मंगाता है। भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए अर्जेंटीना, चिली, ऑस्ट्रेलिया और बोलिविया जैसे लिथियम के धनी देशों की खदानों में हिस्सेदारी खरीदने पर काम कर रहा है।

59 लाख टन का अनमोल‘खजाना’ मिला है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में एक बड़ा लिथियम भंडार (lithium reserves) मिला है. स्मार्टफोन हो, इलेक्ट्रिक हो या नॉर्मल कार या फिर कोई और बैटरी वाला प्रोडक्ट… इन सब में लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है.
आने वाले वक्त में एनर्जी का बड़ा सोर्स लिथियम आयन बैटरी होंगी. दुनियाभर के तमाम देश पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर अपनी निर्भरता को कम कर रहे हैं. इन सब में लिथियम का बड़ा योगदान है. दरअसल, इसकी वजह लिथियम आयन बैटरी है. इसका इस्तेमाल रिन्यूएबल एनर्जी को स्टोर करने के लिए किया जाता है. कभी जिस लिथियम की कोई पूछ नहीं थी, इस क्रांतिकारी इनोवेशन की वजह से लिथियम ‘सोना’ बन गया. भारत में भी लिथियम का एक बड़ा भंडार मिला है. जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में ये भंडार मिला है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में मिला लिथियम भंडार 59 लाख
आज दुनियाभर में ग्रीन एनर्जी पर स्विच होने की बातें हो रही है. कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए दुनियाभर की सरकारें ग्रीन एनर्जी को प्रमोट कर रही हैं. इसमें लिथियम का बड़ा रोल है. लिथियम आयन बैटरी की मदद से रिन्यूएबल एनर्जी को स्टोर किया जा सकता है. इस एनर्जी को बाद में यूज भी किया जा सकता है. अच्छी बात ये है कि ये बैटरी रिचार्जेबल होती है और इनकी लाइफ ज्यादा होती है. इस तरह से लिथियम आने वाले भविष्य में एक जरूरी मेटल बन जाता है. लिथियम आयन बैटरी में दूसरे मेटल्स भी होते हैं, लेकिन इसमें मुख्य भूमिका लिथियम की ही है.
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इलेक्ट्रिक कार हो या फिर बड़े इलेक्ट्रिक ट्रक इन सभी में लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल होगा. भारत में लिथियम का भंडार मिलने से देश बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट कर सकेगा. अगर दुनियाभर में प्रमुख लिथियम प्रोड्यूस करने वाले देशों की बात करें, तो भारत इसमें नजर नहीं आता है. इस भंडार के मिलने से भारत की स्थिति मजबूत होगी. लिथियम की कीमत वैरी करती है. जैसे शेयर मार्केट में हर दिन किसी कंपनी के शेयर की वैल्यू तय सकी तरह के कमोडिटी मार्केट है. इस मार्केट में मेटल की वैल्यू तय होती है. खबर लिखते वक्त Lithium की वैल्यू प्रति टन 472500 युआन (लगभग 57,36,119 रुपये) थी. इस हिसाब से एक टन लिथियम की भारतीय रुपये में कीमत 57.36 लाख रुपये होती है. भारत में 59 लाख टन लिथियम का भंडार मिला है. यानी इसकी वैल्यू आज के वक्त में 33,84,31,021 लाख रुपये (3,384 अरब रुपये) होगी. ये कीमत आज के रेट पर है. ग्लोबल मार्केट के साथ इसकी कीमत हर वक्त बदलती रहती है. लिथियम प्रोडक्शन के मामले में ऑस्ट्रेलिया सबसे ऊपर है. साल 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर का 52 परसेंट लिथियम ऑस्ट्रेलिया प्रोड्यूस करता है. दूसरे नंबर पर चिली है, जिसकी हिस्सेदारी 24.5 परसेंट है. तीसरे नंबर पर चीन है, जो 13.2 परसेंट लिथियम प्रोड्यूस करता है. ये तीन देश ही दुनियाभर का 90 परसेंट लिथियम प्रोड्यूस करते हैं.
चूंकि, दुनियाभर के तमाम देश ग्रीन एनर्जी पर स्विच करने में लगे हैं. ऐसे में लिथियम की वैल्यू बढ़ना
लाजमी है. रिपोर्ट्स की मानें तो साल 2000 से 2015 के बीच लिथियम की डिमांड 30 गुना बढ़ी है. वहीं 2015 के मुकाबले 2025 में इसकी डिमांड 1000 परसेंट बढ़ सकती है. ऐसे में इसकी कीमत का बढ़ना भी तय है. देश में लिथियम का प्रोडक्शन बढ़ने से आने वाले वक्त बैटरी की कीमत कम हो सकती है. इससे पेट्रोल-डिजल का खर्च तो कम होगा ही. इन पर निर्भरता और प्रदूषण भी घटेगा.




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