बिलासपुर // छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार से जुड़े अधिकारियों
के पास अथाह पैसा है उसका एक नमूना बिलासपुर में एक छोटे से बाबू के
घर और ऑफिस मैं जब इकोनामिक ऑफेंस ब्यूरो ने
दबिस दी तो बेनामी संपत्ति की लंबी सूची
बनाना पड़ी छत्तीसगढ़ की इस रेट में सबसे दिलचस्प यह थी की नोटबंदी के समय बाबू ने जिस तरीके से इस काले धन को सफेद किया वह हिम्मत का काम था. बाबू ने लाखों रुपए अपने उन कर्मचारियों
के नाम पर खुले और खोले गए एकाउंट
में जमा किया और बकायदा पुराने नोटों की जगह नए नोटों मैं तब्दील कर लिया इसकी शिकायत जब प्रधानमंत्री कार्यालय मैं हुई तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने तत्कालीन मुख्य सचिव और, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर इस
काले धन को सफेद करने की प्रक्रिया की जांच करने का आदेश दिया मामला पेचीदा था
पुलिस महानिदेशक ने छत्तीसगढ़ इकोनामिक ऑफेंस ब्यूरो को इस जांच की जिम्मेदारी दी तत्कालीन एसपी
ने टीम बनाकर जब बिलासपुर में पदस्थ मनोज दुबे के यहां छापा डाला तो उसमें जो
दस्तावेज मिले उन दस्तावेजों के आधार पर यह कहां
गया की गलत तरीके से कमाए गए धन को नोटबंदी के समय गलत तरीके से सफेद किया गया है।
छत्तीसगढ़ में अपने आप में यह
इकलौता मामला था. जब किसी अधिकारी ने पुराने हजार और
500 के नोटों को इस तरीके से प्रचलित करवा कर अपने पास वापस बुला लिया
मनोज दुबे बिलासपुर फ्लाइंग स्कॉट में एक छोटे से पद पर पदस्थ था लेकिन अपने
शातिर दिमाग से उसने तमाम उच्चाधिकारियों को भी अपनी गुड बुक में ले रखा था छापे की कार्रवाई के बाद उसे निलंबित
किया गया लेकिन तगड़ी पहुंच रखने के कारण वह कुछ दिनों में वह पदस्थ हो गया इसी पता चलता है कि उसकी पहुंच कितने ऊपर है सूत्र
बताते हैं की पिछले 10 सालों से सरकारी शराब पर एक छत्र राज करने
वाले समुद्र सिंह का सबसे चाहता बाबू था वह तमाम तरह की हेरा फेरी से एकत्र पैसों को
व्यवस्थित ढंग से उन तमाम हिस्सेदारओं को पूरी इमानदारी से पहुंचाता था यह
उसकी खासियत थी इसीलिए वह छोटे से पद पर रहने के बाद भी बड़े-बड़े अधिकारियों का
था चहेता
था
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यही है की निलंबन समाप्त तो
भाजपा शासन में हुआ लेकिन किस का
खात्मा कांग्रेस सरकार हो गया उसका
इतना दबदबा है कि उसने अपने खिलाफ चल रही इकोनामिक ऑफेंस के केस को भी खात्मा करवा लिया और
जज साहब से अपने पक्ष में आदेश करवा लिया यह सब इतनी जल्दी हुआ की किसी भी
तरह की प्रक्रिया या, कानूनी प्रक्रिया का कोई पालन नहीं हुआ और उसको हाथ में खात्मे का आदेश मिल गया
जैसे ही जनप्रतिनिधियों को और विभाग में उसके पीड़ितों को यह
खबर लगी तो उन्होंने लिखित शिकायत
से सहमत अनेक हस्ताक्षर कर उच्चाधिकारियों को इस प्रकरण पर
विरोध दर्ज कराया उसमें वह तमाम हस्ताक्षरकरता भी है जिनके नाम पर बाबू ने काले धन
को सफेद करने के लिए उनके खातों में पैसा जमा करवाएं
और निकाल भी लिया बात मीडिया की सुर्खियों में आई तो एक मीडिया कर्मी ने न्यायालय मैं इस बंद हो गए केस के आदेश को आदेश को अदालत में चैलेंज कर दिया आज ताजी स्थिति
है की मामला को उसी न्यायालय ने इस बंद केस को फिर से रिओपन कर लिया है ।
ताजा स्थिति यह है की जिस डीवाईएसपी ने इस मामले की अर्जी
अदालत मैं लगा कर केस को बंद करवाया
था जैसी ही मीडिया कर्मी द्वारा
अदालत में लगाए ऑब्जेक्शन को स्वीकार कर लिया की खबर लगते ही इस मामले को रफा दफा करने
वाला डीवाईएसपी जिसके पास केस की पूरी डायरी है 15 दिनों की छुट्टी पर चला गया ताकि
विधानसभा सत्र खत्म हो जाए और किसी तरीके का
हंगामा ना हो उसके बाद अदालती कार्रवाई शुरू हो सके।




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