इंसानों के रहने लायक एक ग्रह मिला है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह इंसानों के रहने लायक एक ग्रह मिला है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यहां पर इंसानी बस्ती बसाई जा सकती है. यह एक पथरीली दुनिया है लेकिन संकेत मिले है की यहाँ पानी की संभावना है
धरती से 31 प्रकाश वर्ष दूर एक ऐसा एक्सोप्लैनेट मिला है, जहां पर जीवन संभव है. वहां इंसान रह सकते हैं. अब तक वैज्ञानिकों ने 5200 से ज्यादा एक्सोप्लैनेट से खोजने में दुनिया भर के 50 वैज्ञानिक लगे थे. उन्होंने इस बात की पुष्ट की है कि यह अपने रेड ड्वार्फ तारे Wolf 1069 के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है.
वोल्फ 1069 बी अपने तारे से इतनी दूरी पर है कि वहां जीवन पनप सकता है. साथ ही यहां पर पानी होने की भी प्रबल संभावना है. जर्मनी स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट डायना ने बताया कि यह अपने तारे के चारों तरफ 15.6 दिन में एक चक्कर लगा रहा है. जैसे बुध ग्रह हमारे तारे यानी सूरज से बेहद करीब है. वह सूरज के चारों तरफ 88 दिन में एक चक्कर लगाता है. वहां की सतह का तापमान 430 डिग्री सेल्सियस है. क्योंकि वह सूरज के करीब है. वोल्फ 1069 बी अपने तारे के चारों तरफ कम समय में चक्कर लगा रहा इसलिए तापमान मानव के रहने लाया होगा

उसका तारा एक रेड ड्वार्फ है. यानी वह हमारे सूरज से छोटा है. साथ ही वह सूरज से करीब 65 फीसदी कम रेडिएशन पैदा करता है. इससे ये पता चलता है कि वहां पर वहां पर रहना आसान हो सकता है. सतह का तापमान माइनस 95.15 डिग्री सेल्सियस से 12.85 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. औसत तापमान माइनस 40.14 डिग्री सेल्सि रहता है डायना ने बताया कि एक खास बात ये है कि वोल्फ 1069 बी हमने तारे के पास लॉक्ड पोजिशन पर है. यानी एक तरफ हमेशा रोशनी और दूसरी तरफ एकदम अंधेरा. जैसे हमारी पर होता है हमारी धरती के चारों तरफ चांद चक्कर लगाता है. उसके भी एक हिस्से में ही रोशनी रहती है, दूसरे में अंधेरा. इसका मतलब वहां पर धरती की तरह दिन-रात का फॉर्मूला है. यानी दिन वाले इलाके में रहा जा सकता है.

इस ग्रह को CARMENES टेलिस्कोप से खोजा गया है. 11.5 फीट ऊंचा यह टेलिस्कोप स्पेन के कालार एल.. एल्टो ऑब्जरवेटरी में है. वोल्फ 1069 बी धरती के करीब खोजा गया छठा रहने योग्य ग्रह है. इसके अलावा जो अन्य ग्रह हैं- प्रॉक्सिमा सेंटौरी बी, जीजे 1061डी, प्रॉक्सिमा सेंटौरी बी, जीजे 1061डी, टीगार्डेन्स स्टार सी और जीजे 1002 बी और सी. फिलहाल इन ग्रहों पर बायोसिग्नेचर खोजे जा रहे हैं, ताकि पता चल सके कि जीवन कितना संभव है.




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