रायपुर, 28 जनवरी 2023/ राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित किए जा रहे राज्य स्तरीय युवा महोत्सव में कल 29 जनवरी को लोक नृत्य, छत्तीसगढ़ी खेल, लोक साहित्य, शास्त्रीय नृत्य, बांसुरी वादन, वाद-विवाद प्रतियोगिता के साथ ही खो-खो कबड्डी आदि खेलों का आयोजन होगा। यहां आने वाले दर्शकों के लिए फूड कोर्ट के साथ-साथ शिल्प ग्राम भी बनाया गया है। गौरतलब है कि राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन 28 से 30 जनवरी तक किया जा रहा है। महोत्सव में प्रदेशभर के 3 हजार से अधिक प्रतिभागी 38 विविध विधाओं में शामिल हो रहे हैं।
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युवा महोत्सव के दूसर दिन खेल संचालनालय परिसर के मुख्य मंच में सुबह 9 बजे से दोपहर 4 बजे तक पंथी नृत्य और सरहुल नृत्य, दूसरे मंच में सुबह 9 बजे से 5 बजे तक सुवा नृत्य और पारंपरिक वेशभूषा और ओपन मंच में सुबह 9 बजे से दोपहर 4.30 बजे तक फुगड़ी और भौरा की प्रतियोगिता होगी। पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम के 1500 सीटर हॉल में सुबह 9 बजे से शाम 7.30 बजे तक एकांकी नाटक, 100 सीटर हॉल में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे शास्त्रीय नृत्य भरत नाट्यम, कत्थक, ओडिसी, कुचीपुड़ी और मणिपुरी नृत्य और 60 सीटर हॉल में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक बांसुरी वादन, हारमोनियम, मृदंगम, सितार और वीणा प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। खेल संचालनालय के ऊपर के हाल में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक वाद-विवाद और क्विज प्रतियोगिता तथा खेल परिसर डोम में सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक फूड फेस्टिवल तथा विश्वविद्यालय खेल परिसर मैदान में खो-खो महिला वर्ग सेमी फाइनल और फाइनल राऊंड, कबड्डी महिला वर्ग सेमी फाइनल और फाइनल राऊंड, कुश्ती महिला वर्ग सेमी फाइनल और फाइनल राऊंड और गेड़ी दौड़ का आयोजन होगा।
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रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय युवा महोत्सव के पहले दिन मुख्य मंच में मांदर की थाप पर कलाकार खूब थिरके। साइंस कॉलेज मैदान में 15 से 40 आयु वर्ग में करमा नृत्य में दुर्ग, रायगढ़, सूरजपुर, कांकेर और बालोद जिले के कलाकारों ने पारम्परिक परिधानों से सज-धज कर मुख्य मंच पर अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी। वहीं 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में कोरबा महासमुंद जशपुर और खैरागढ़ के कलाकारों ने करमा नृत्य की प्रस्तुति दी, जो दर्शकों को खूब भाया। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रचलित अनेक लोक नृत्यों में से करमा नृत्य एक है। करमा नृत्य राज्य में निवास करने वाली जनजातियों द्वारा किया जाता है। ये जनजातियां सरई एवं करम वृक्ष के नीचे इकठ्ठा होकर करमा गीत गाकर नृत्य करते हैं। जनजाति समूह वर्ष में एक बार इकठ्ठा होकर देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करके उत्सव मनाते हैं और करम वृक्ष की टहनी को जमीन में गड़ाकर चारों और घूम-घूमकर आनंदपूर्वक करमा नृत्य करते हैं। करमा नृत्य हमें कर्म का संदेश देता है। राज्य स्तरीय युवा महोत्सव में 15 से 40 आयु वर्ग में करमा नृत्य में रायगढ़ प्रथम, कांकेर द्वितीय एवं सूरजपुर तृतीय स्थान पर रहा। 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में खैरागढ़ प्रथम, महासमुंद द्वितीय एवं जशपुर तृतीय स्थान पर रहा।




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