दंतेवाड़ा/// ब्लॉक 13 आयरन ओर पर हो रही राजनीति लगता है कि ठंडे
बस्ते में चली गई है. इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं की आंदोलन सिर्फ
एक दिखावा था अदानी को अपने पक्ष में लाना था अदानी एक व्यापारी है उसे भाजपा
कांग्रेस से कोई लेना देना नहीं है उसका व्यापार सुरक्षित रहे यह उसकी प्राथमिकता
है. प्राथमिकता के आधार पर लगता है सब कुछ अदानी ने ठीक-ठाक कर दिया है इसलिए ना
तो जनसुनवाई की जांच शुरू हुई है और ना ही सरकार ने किसी भी तरह की प्रक्रिया को आगे
बढ़ाया है
नंदी पर्वत आस्था
से जुड़कर जो आंदोलन शुरू हुआ था अब समाप्त हो गया है सीपीआई नेता कुंजाम ने जब
कलेक्टर से पूछा किसकी जांच का क्या हुआ तो कलेक्टर ने कहा कि अभी तक जांच के विषय में
शासन से दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं प्राप्त होते ही हम जांच शुरू करेंगे
उधर जन चर्चा है कि अदानी ने अपने ब्लॉक को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार से
सुरक्षा की अतिरिक्त टुकड़ी की मांग की है जिससे वह उस क्षेत्र में खनन को लेकर
अपनी तैयारी कर सके
अदानी के खिलाफ हुए आंदोलन में यह भी संकेत
मिले हैं की उस आंदोलन को वृद्ध रूप में निर्मित करने के पीछे कथित नक्सल विरोधी ताकतों के साथ नक्सल समर्थित
जनप्रतिनिधि एवं गांव के लोग संलग्न थे नक्सली नहीं चाहते कि वहां पर किसी तरीके
का ऐसा विकास हो जिससे उनके अमन चैन में खलल उत्पन्न हो बस्तर में इस वक्त अगर
सबसे सुरक्षित है
तो नक्सली ही है नक्सली इस वक्त बेखौफ बाजारों में घूमते हैं
लोगों से जन संपर्क करते हैं अपनी रोजमर्रा की वस्तुओं को खरीदकर जंगलों की तरफ
चले जाते हैं बरसात में क्योंकि जंगलों में आवागमन थम सा जाता है, पर नक्सलियों की गतिविधियां बदस्तूर जारी रहती
है इसी वक्त वह जंगलों में बसे वनवासियों से सतत संपर्क में रहते हैं और उनका
ब्रेनवाश करते हैं ।
नक्सली आंदोलन से निपटने लगे सुरक्षाकर्मी भी बारिश के चलते
जंगलों में गस्त नहीं दे पाते बादल बहुत घने होते हैं ड्रोन सेवा भी काम नहीं आती यह समय नक्सलियों को अपने आंदोलन को पुख्ता करने का सबसे माकूल
समय
होता है




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments