रायपुर 02/01/2023/// छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र का पहला दिन आरक्षण की तू तू मैं मैं के चक्कर में भारी शोर-शराबे के बीच स्थगित हो गए सत्ता पर जहां राज्यपाल को लेकर बीजेपी के द्वारा की जा रही रही थी पर अपनी बात बार-बार रख रहा था वही इस विवाद में सदन के भीतर राज्यपाल की गरिमा में पद को लेकर हो रहे टीका टिप्पणी पर विधानसभा अध्यक्ष ने संज्ञान लेते हुए दोनों पक्ष के सदस्यों को इस तरह की टिप्पणी ना करने की हिदायत दी सत्ता पक्ष की ओर से जब यह कहा गया कि राजपाल महोदय ने कहा था कि विधेयक को सदन में पारित कर भेजे में आधे घंटे में हस्ताक्षर कर दूंगी फिर अभी 32 दिन से पूरे मामले को लटकाया हुआ है इसके पीछे भाजपा पीछे के दरवाजे से राजनीति कर रहे हैं और वह नहीं चाहते कि आरक्षण का लाभ छत्तीसगढ़ के जनता को मिले
विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सत्ता पक्ष के पास बहुमत है इसका मतलब यह नहीं है कि वह राजपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर किसी तरीके की टीका टिप्पणी कर सके नहीं का अधिकार प्राप्त हो गया है राजपाल स्वतंत्र एजेंसी है वह अपने विवेक से काम कर रहे हैं किसी तरीके का दबाव डालना यह उनकी गरिमा के प्रति घोर निंदनीय है
विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहाक्वांटिफिएबल डाटा आयोग की रिपोर्ट सरकार चर्चा नहीं कराना चाहते ना जाने ऐसा क्या छुपा रही है जब सरकार ने कहा की डेट आयोग के आधार पर ही बिल पास किया गया है ना राज्यपाल को ना विधायकों को ना सुप्रिया हाईकोर्ट को यह रिपोर्ट सौंपी गई सरकार बताएं कि 32 परसेंट से 20 परसेंट जनजाति के आरक्षण की कमी को लेकर उन्होंने क्या-क्या जतन किए यह सब मत लाकर सरकार आदिवासी पिछड़ा वर्ग अनुसूचित जाति को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगी हुई है जिसका खुलासा बुरी तरीके से हो चुका है अब यह डैमेज कंट्रोल कांग्रेस सरकार के बस में नहीं
मोहन मरकाम में सदन पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बीजेपी नहीं चाहती कि छत्तीसगढ़ के लोगोंकोआरक्षण का लाभ मिले हमारे नेता मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 32 >> 27>> 13 और 4 प्रतिशतआरक्षण बिल इस पवित्र सदस्य पास कराकर जिसमें दोनों पक्षों ने अपना अभिमत दिया औरसर्वसम्मति से अध्यादेश पास हुआ यहां तक तो ठीक था अब बीजेपी राज्यपाल को गुमराह कर बिल परहस्ताक्षर करने से रोक रही है
कांग्रेस विधायक अमरजीत भगत ने कहा कि आरक्षण ज्वलंत मुद्दा है. छत्तीसगढ़ की विधानसभा में आरक्षण विधेयक पारित कर राजभवन भेजा था. विपक्ष ने जिस बिल पर अपनी सहमति दी थी, उस पर बोलने को तैयार नहीं. आरक्षण रोकने से नौकरी में भर्ती प्रमोशन के काम रुके हुए हैं. सबसे ज्यादा आदिवासी वर्ग से प्रभावित हुआ है. विपक्ष केवल हंगामा करता रहा.




Copyright @ 2020 All Right Reserved | Powred by Divyadoot
Comments