रायपुर, 26 दिसम्बर 2022 /// बीजेपी के शासन में जब सत्ता का गुरुर सिर माथे चढ़ा रहा था तबका स्काई वाक उसका जीता जगता साबुत है .भाजपा को छत्तीसगढ़ में शासन करते हुए तीसरी पारी खेली जा रही थी उस वक्त पैसे की कोई कमी नहीं थी लेकिन विकास योजनाएं भ्रष्टाचार के इर्द-गिर्द घूम रही थीं उसी का एक जीता जाता नमूना है रायपुर का स्काईवॉक न जाने किसने यह सलाह दे डाली की पैदल चलने वालों के लिए अलग से फुटपाथ ना बनाकर स्काईवायर बनाया जाए बनाने वाले भूल गए कि छत्तीसगढ़ में ना तो सड़कों पर इतनी भीड़ है न ही सड़कों पर पैदल चलने वालों को इस तरह की आदत है वह तो जरा से काम के लिए मोटरसाइकिल का उपयोग करते हैं फिर सैकड़ों करोड़ का यह भ्रष्टाचारी ताजमहल किसके लिए और क्यों जब इसका शिलान्यास हो रहा था तभी से आम जनता का भारी विरोध था लेकिन सत्ता के मद में चूर मंत्री. नेता. अधिकारी. और बाहर से लाई गई कंपनियां जो ठेका तो अपने हिसाब से नियम शर्ते बनाकर ले रही थी सबसे मजेदार बात है वे कंपनियां इन ठेकों को छत्तीसगढ़िया लोगों को सब लेट कर रही थी और अपना हिस्सा लेकर चंपत हो रही थी यह सब हो रहा था और मुख्य मंत्री रमन सिंह देख भी रहे थे लेकिन लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे थे क्योंकि खुद भ्रष्टाचार के दलदल में गले तक डूबे थे इसलिए वह कुछ कह नहीं पा रहे थे परिणाम स्वरूप आज 4 साल हो गए हैं भ्रष्टाचार के इस ताजमहल को रायपुर के मुख्य मार्ग में सीना ताने खड़े हुए
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राज्य शासन द्वारा स्काई वाक निर्माण प्रकरण में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं पाए जाने पर इसकी जांच का मामला एसीबी और ईओडब्ल्यू (EOW) को सौंपने का निर्णय लिया है।
प्रथम दृष्ट्या प्रकरण में पाए गई निम्नानुसार अनियमितताएं स्पष्ट हो रही हैं- 77 करोड़ की परियोजना का जान बूझकर 2 बार में प्राक्कलन तैयार किया गया ताकि PFIC से मंजूरी की आवश्यकता न रहे। PFIC के माध्यम से किसी भी परियोजना के जन हित के संबंध में परीक्षण किया जाता है, जो कि स्काई वाक निर्माण प्रकरण में नहीं किया गया है।
विधानसभा निर्वाचन 2018 की अधिसूचना जारी रहने के दौरान ही लोक निर्माण विभाग द्वारा पुनरीक्षण प्रस्ताव तैयार कर 05 दिसम्बर 2018 को वित्त विभाग को भेजा गया, जो आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। स्पष्ट है यह कार्य विभाग के पदाधिकारियों एवं ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है।
लोक निर्माण विभाग द्वारा स्काई वाक निर्माण की प्रथम निविदा 04 फरवरी 2017 को जारी की गयी तथा निविदा प्रस्तुत करने हेतु मात्र 15 दिनों का समय दिया गया। 04 फरवरी तक प्रकरण में वित्त विभाग से प्रशासकीय स्वीकृति भी प्राप्त नहीं हुई थी। 15 दिनों मात्र की निविदा हेतु कोई आवश्यकता और औचित्य नहीं दर्शाया गया है, न सक्षम स्वीकृति प्राप्त की गई है।




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