दिव्य-दूत

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असतो मा सद्गमय, ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’

Anil Choubey 24-10-2022 10:58:33


दिव्य  दूत परिवार की ओर से  दीपोत्सव  की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई 

दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है ।

रायपुर /// 24/10/2022///   सनातन हिंदू त्यौहार प्रकृति से जुड़े हुए होते हैं ,वर्षा ऋतु के बाद दीपावली का पर्व कार्तिक माह में अमावस्या के समय नियत तिथि पर मनाया जाता है दीपावली साफ सफाई और प्रकाश का पर्व है वर्षा ऋतु में जिस तरीके से सृष्टि अपने  तमाम प्राकृतिक संसाधनों को जल से सराबोर कर नहला देती है उसके बाद जो अनावश्यक कचरा इकट्ठा होता है उसकी साफ सफाई की जिम्मेदारी पृथ्वी वासियों को होती है इसलिए दीपावली से पहले हर मानव अपने आसपास की जगह जमीन को साफ सुथरा कर कचरे को एक जगह इकट्ठा कर देता है वर्षा ऋतु में  घरों जगह जीर्ण शीर्ण हो जाती है उसको वर्षा ऋतु के बाद दीपावली की साफ सफाई से जोड़कर रिपेयरिंग करवा  कर रंग रोगन कर के  साल भर के लिए तैयार किया जाता है इस परंपरा में साफ सफाई के साथ प्रकाश पर्व को  मनाए जाने वाले दीपोत्सव की पूरे देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

दीपावली (संस्कृत : दीपावलिः = दीप + अवलिः = दीपकों की पंक्ति, या पंक्ति में रखे हुए दीपक) शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन सनातन त्यौहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है और भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। दीपावली दीपों का त्योहार है। आध्यात्मिक रूप से यह 'अन्धकार पर प्रकाश की विजय' को दर्शाता है।भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात (हे भगवान!) मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाइए। यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।

 

माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का हृदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीपावली यही चरितार्थ करती है- असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ-सुथरा कर सजाते हैं। बाजारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाजार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।

दीपावली के दिन नेपाल, भारत, श्रीलंका, म्यांमार, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद और

टोबैगो, सूरीनाम, मलेशिया, सिंगापुर, फिजी, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की बाहरी सीमा पर क्रिसमस द्वीप पर एक सरकारी अवकाश होता है।

 

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