रमन को अपने उजड़े चमन में दिल लगता नहीं जनता क्या करे
रायपुर/// विधानसभा में करारी हार के बाद
बीजेपी के तमाम नेता कार्यकर्ता हाशिए पर चले गए थे घोर निराशा में डूबी पार्टी को एक झटका और तब
लगा जब लोकसभा में केंद्रीय नेतृत्व द्वारा वर्तमान सभी सांसदों की उम्मीदवारी को नकारते हुए नए
उम्मीदवारों की घोषणा कर दी नई उम्मीदवारी की घोषणा के साथ तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे
की छत्तीसगढ़ में 11 संसदीय
सीटों में से 4 या5 पर ही
बीजेपी की विजय प्राप्त होगी लेकिन मोदी कमाल के कारण छत्तीसगढ़ में 9 सीटों पर लोकसभा में बीजेपी ने
परचम लहरा दिया, इस परचम के लहराते ही कोमा में पड़ी
छत्तीसगढ़ बीजेपी की इकाई अचानक होश में आ गई होश में आते ही उन्होंने आनन-फानन
में कांग्रेश की भूपेश सरकार पर तरह-तरह के लांछन और अकर्मण्यता के आरोप गणना शुरू
कर दिए इसी कड़ी में बूढ़ा तालाब में प्रदेश के तमाम बड़े बीजेपी नेताओं ने धरना
प्रदर्शन किया सभी ने अपने उद्बोधन में कांग्रेस सरकार की नाकामियों को अपने ढंग
से उजागर करने की कोशिश की दिन भर राजधानी में और पूरे छत्तीसगढ़ के जिलों में यह नौटकी
क धरना
प्रदर्शन जारी रहा राजधानी में तो उस दिन पानी गिर जाने से धरना प्रदर्शन भगदड़ में बदल
गया था आंदोलनकारी पंडालों के नीचे भागने लगे भीड़ इतनी नहीं थी जितनी
उम्मीद की जा रही थी भाजपा के नेता पंडाल में कुर्सी लगाकर बैठे तो थे लेकिन उनके
चेहरे पर मायूसी झलक रही थी |
सांझ होते-होते आंदोलन खत्म हो गया नेता अपने अपने घर चले गए उसी दिन
शाम को कांग्रेस प्रवक्ताओं ने एक साथ बुलेटिन जारी कर कहा की बीजेपी घड़ियाली
आंसू बहा रही है, आज जो
बिजली की किल्लत है. इसके पीछे बीजेपी की निजी करण की मानसिकता है. उन्होंने
छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड में सिर्फ ठेकेदारों को काम दिया भर्तियों पर रोक लगा रखी
थी. घटिया उपकरण खरीदे गए जिसका खामियाजा आज जनता भुगत रही है. हमारी सरकार को आए
हुए अभी 6 महीने ही
हुए हैं हमने तो अभी कुछ ना तो खरीदा है और ना ही किसी को ठेका दिया है. बिजली को
लेकर हो रहे इस आंदोलन में दोनों ही पार्टियों में सोशल वार अफेयर
चल रहा है रमन सिंह ने भूपेश सरकार पर कई तरह के आरोप गढ़ दिए डॉ रमन सिंह ने कहा की भूपेश
सरकार ने कोई काम नहीं किया है. वह सिर्फ बदलापुर की राजनीति कर एसआईटी के गठन में
और ट्रांसफर उद्योग चला रही है. किसानों का कर्जा माफ नहीं हुआ है, किसान खाद बीज के लिए तरस रहे हैं, इन 6 महीनों में सरकार का ग्राफ काफी गिर गया है
उन्हें बदलापुर की राजनीति छोड़कर चुनाव में किए गए वादों को पूरा करना चाहिए
पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने कहा है कि हमने अपने घोषणा पत्र में किए गए वादों
को 5 साल में
पूरा करने का वचन दिया है हम धीरे धीरे समयानुसार उन वादों को पूरा कर रहे हैं, हमने किसानों के कर्ज माफ किए है बिजली का बिल हाफ किया है छोटे प्लाट रजिस्ट्री पर लगी रोक हटा दी गई
है हमने भर्ती प्रक्रिया के लिए काम शुरू कर दिया है, और हम विगत वर्षों में इस काम को
पूरा कर लेंगे इस तरह से किए गए पलटवारओं से भा जा पा के आंदोलन की हवा निकल गई
है और जनता
में यह मैसेज जा रहा है की आप की 15 साल की विकास लूट और झूठ की सरकार
को अभी किसी प्रकार के आरोप लगाने का हक नहीं है आप भूपेश बघेल सरकार पर अभी उंगली नहीं उठा
सकते
बीजेपी अभी
अपनी विधानसभा के हार को पचा नहीं पा रही हैं उसी लग रहा है की कितनी
जल्दी यह 5 साल बीत जाएं और हम फिर से चुनाव में जाकर कांग्रेश सरकार को हरा सके लेकिन यह अभी तत्काल में मुमकिन
नहीं है कांग्रेश के पास भारी बहुमत के साथ 68 विधायक हैं बीजेपी के पास 15 विधायक इसलिए रद्दो बदल की
संभावनाएं शून्य है अब जब तक चुनाव नहीं होते तब तक बीजेपी को सत्ता से बाहर रहना
ही होगा यह बीजेपी के नेताओं की समझ से परे है. वह सत्ता के बिना तड़प रहे और इस कारण से वे और उनके कद्दावर बड़े नेता
सड़कों पर उतरकर कांग्रेस सरकार की खामियों को उजागर कर रहे हैं लेकिन जिन्होंने कांग्रेस को अपार मत दिया है वह
इन आंदोलनों को भी भाजपा की ही कमजोरी मानकर उल्टा प्रहार कर रहे हैं इससे
भाजपा की रही सही साख भी गिर रही है दूसरा नुकसान भाजपा को यह भी हो रहा है की ऊपर
सरकार तो अभी अभी आई है उसे कुछ दिन काम करने दो फिर आंदोलन करना लेकिन सत्ता सुख
में डूबे बीजेपी के नेताओं को नेताओं की तड़प प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही
है जो उनके लिए नुकसानदेह




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