खेतों पर लगते हुए देखा सफेद मूसली की दुर्लभ प्रजाति के (MDB 13-14 ) को
बस्तर /// राजीव गांधी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, विजय महाजन,तथा उनके साथ सात सदस्यीय दल रविवार को दिल्ली से सीधे पहुंचा बस्तर कोंडागांव के चिखलपुटी गांव में स्थित *"मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म" पर। विजय महाजन जी राजीव गांधी फाऊंडेशन के प्रमुख है. उन्होने भारत के महासंगठन बेसिक्स समूह Basix Group की स्थापना की और भारत में Micro finance का आरंभ भी किया.
आप रिजर्व बैंक आफ इंडिया RBI सहित देश की कई महत्वपूर्ण कमेटियों पर भी रहे हैं.
दल के विशेषज्ञों ने पेड़ों पर लगी हुई काली मिर्च को देखा तथा काली मिर्च की खेती से होने वाली,प्रति एकड़ आय का व्यवहारिक आकलन किया, और पेड़ों पर लगी हुई पकी हुई काली मिर्च तोड़कर चखी और काली मिर्च की खेती तथा स्वाद दोनों की तारीफ की ,उन्होंने यह जानकर बड़ी प्रसन्नता व्यक्त की कि यह काली मिर्च की विशिष्ट प्रजाति जो कि बस्तर में ही विकसित की गई है यह बस्तर के जंगलों में साल तथा महुआ ,आम, नीम,इमली आदि लगभग सभी पेड़ों पर भी चढ़कर बहुत अच्छा उत्पादन दे रही है, इससे बस्तर के बचे-खुचे जंगलों को काली मिर्च लगाकर कटने से बचाया जा सकता है तथा स्थानीय जनजातीय समुदाय की आमदनी को दुगुनी तिगुनी करके इनका जीवन स्तर को ऊंचा उठाया जा सकता है।
काली मिर्च की त्रिस्तरीय जैविक खेती की पद्धति के बारे मे मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के अनुराग त्रिपाठी ने विस्तार से जानकारी दी।
डॉ राजाराम त्रिपाठी ने आने वाली सदी की फसल के नाम से जाने वाली "स्टीविया" यानी की मीठी तुलसी की बस्तर में हो रही खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में बस्तर पूरे देश में इसकी खेती के लिए जाना जाएगा। बस्तर में स्थानीय प्रगतिशील किसानों को इसकी खेती से जोड़ते हुए स्टीविया को बड़े पैमाने पर लगाने की कोशिश कीजा रही है, तथा इन पत्तियों से बिना कैलोरी वाली शक्कर यही बस्तर कोंडागांव में ही तैयार की जाएगी ,गौरतलब हैं कि यह जैविक शक्कर बाजार में बिकने वाली आम केमिकल शक्कर की तुलना में 250 * गुना मीठी होगी बावजूद इसके,इस जैविक शक्कर को डायबिटीज का रोगी भी से आराम से भरपूर खा पी सकता है। मोटापा से तथा हृदय रोग एवं अन्य रोग से भी यह शक्कर बचाएगी।
उल्लेखनीय है कि जापान तथा अमेरिका जैसे दर्जनों देशों में बहुत बड़ी संख्या में लोग इस शक्कर का प्रयोग करने लगे हैं। बस्तर के लिए गौरव की बात यह भी है कि कि सीएसआईआर आईएचबीटी, भारत सरकार के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कड़वाहट रहित स्टीविया की नई प्रजाति के पौधों की खेती कर दे तथा इसके पौधों की पत्तियों से शक्कर तैयार करने के लिए विगत दिनों भारत सरकार की सीएसआईआर से "मां दंतेश्वरी हर्बल समूह" से अनुबंध भी किया है जिसके तहत तैयार स्टीविया के पौधों का निरीक्षण भी किया और उसकी पत्तियों की मिठास को चखा और परखा भी।
इसी कड़ी में इस दल ने ऑस्ट्रेलियन टीक के वृक्षारोपण का खेतों पर निरीक्षण, परीक्षण किया तथा मौके पर खड़े पेड़ों से प्राप्त होने वाली इमारती लकड़ी की मात्रा का आकलन कर वर्तमान बाजार भाव से आकलन कर प्रति एकड़ लाभदायकता को व्यावहारिक रूप से परखा। उन्होंने इस पौधे के द्वारा वायुमंडल से नाइट्रोजन लेकर जमीन में जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण के द्वारा जमीन की उपजाऊ क्षमता को दोगुना करने के प्रयोगों को बेहद सराहा। इस दल ने खेतों पर ही जैविक खाद,दवाई तैयार करने प्रयोगों को भी देखा। जैविक पद्धति से खाद तथा कीटाणु नाशक जैविक दवाई बनाने की प्रक्रिया के बारे में मां दंतेश्वरी हर्बल समूह की महिला दल की प्रमुख जसवती नेताम ने विस्तार से जानकारी प्रदान की। *मां दंतेश्वरी हर्बल समूह की गुणवत्ता तथा प्रमाणीकरण विभाग की प्रमुख अपूर्वा त्रिपाठी ने बताया कि हमारे समूह के द्वारा उत्पादित जड़ी बूटियां , हर्बल चाय, सफेद मूसली, काली मिर्च आदि पूरी तरह से जैविक पद्धति से तैयार की जाती है तथा इससे विश्व के 7 सात सर्वश्रेष्ठ प्रमाणीकरण संस्थाओं ने गुणवत्ता प्रमाण पत्र से नवाजा है। इन्हें देश -विदेश से सैकड़ों प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं ।यही कारण है कि ये उत्पाद यूरोप तथा अमेरिका भी जा रहे हैं तथा अपने अनूठी गुणवत्ता एवं प्रमाणीकरण के कारण सराहे भी जा रहे हैं। इन्होने बस्तर को एक नई पहचान दी है।
दल के क्षेत्र भ्रमण-आकलन के अंत में "राजीव गांधी फाउंडेशन" के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री विजय महाजन ने कहा कि "उच्च लाभदायक समेकित -जैविक खेती" की यह अवधारणा तथा इसका यह जमीन पर खड़ा यह "कोंडागांव मॉडल" पूरी तरह से सफल तथा व्यवहारिक है, जिसके तहत किसान बहुत कम लागत में अपनी आमदनी भी बढ़ा सकता है तथा अपने आसपास अन्य लोगों के लिए रोजगार का सृजन भी इस "कोंडागांव मॉडल" के जरिए कर सकता है और इस मॉडल में जल ,जंगल ,जमीन, जलवायु, जीव-जंतुओं, प्रर्यावरण को पर्याप्त रूप से सुरक्षित रखते हुए टिकाऊ खेती की जा सकती है तथा यह मॉडल विश्व बाजार में भी भारत के उत्पादों को बेहतर मूल्य तथा देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर राजस्व देश कमाने का मौका भी देता हैं।
डॉ राजाराम त्रिपाठी
9425258105
मां दंतेश्वरी हर्बल समूह
चिखलपुटी बस्तर छ.ग.




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