रायपुर// 17/08/2022 /// जैसे-जैसे अग्रवाल सभा रायपुर के कथित चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे चुनाव करवाने की प्रक्रिया की खामियां भी सामने निकल कर आति जा रहीं हैं सभा के अधिकांश सदस्यों का कहना है कि सबसे पहले सदस्यता सूची का विधिवत आकलन होने के साथ सभा के पटल पर प्रकाशन होना चाहिए जो नहीं हो रहा है,महासचिव द्वारा की जा रही एक तरफ़ा कार्यवाही से लगता है कि वह पूरी संस्था को हाईजैक करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं ,वह अपने हिसाब से स्टेटमेंट जारी कर रहे हैं ,जबकि कथित सूची के अनुसार चुनाव अधिकारी ही सदस्य नहीं है .तो वह चुनाव कैसे करवा रहा है संदेह के घेरे में है ताजुब यह है की जिस दिन दोनों चुनाव अधिकारी बनाये गए उस दिन वे सदस्य ही नहीं थे |
नए सदस्य बनाने की प्रक्रिया भी अजीब है सदस्यों का कहना है की सदस्यता फॉर्म को लेकर भारी अनियमितताएं हैं एक ही फॉर्म में छे -सात सदस्य बना दिए गए हैं यह भी सदस्यता ग्रहण करने में की जा रही घोर अनियमितता है जबकि अग्रवाल सभा रायपुर के बायलाज में लिखा हुआ है कि एक सदस्य एक फॉर्म के साथ ₹ 50 की शुल्क रसीद प्राप्त करेगा तभी उसका सदस्यता फार्म वेध होगा और उस फॉर्म को मोहल्ला समितियों के द्वारा इकट्ठा कर अग्रवाल सभा के मुख्यालय में जमा किया जाएगा वहां पर गठित कमेटी द्वारा फॉर्म की पूरी स्कूटनी के साथ उसका प्रकाशन किया जाएगा दवा पत्ती आपत्ति के निराकरण के बाद सदस्यता सूची प्रकाशित की जाएगी और नियमनुसार फॉर्म एंड रजिस्टर को सदस्यता सूची बाकायदा भेजी जाएगी के बाद ही उन्हें मतदान करने का अधिकार दिया जाएगा | अग्रवाल सभा के संविधान में यह भी लिखा है,कि ये सदस्य जीवन सदस्य होंगे लेकिन महासचिव द्वारा सदस्यता अभियान को लेकर जो भी फॉर्म जारी किया गया है उसमें इस तरह का कोई जिक्र नहीं है वह भी संदेह के घेरे में है |
अग्रवाल सभा का यह पूरा मामला शिकवा शिकायत की तर्ज पर फॉर्म एंड सोसाइटी के दफ्तर तक पहुंच गया है .अब नया रायपुर में जब यह मामला पंजीबद्ध हो गया है तो महासचिव विजय अग्रवाल को अपनी अनियमितताएं दिखने लगी हैं और वह बोखलाकर इस तरीके के बयान अखबारों में छपवा रहे हैं कि रजिस्ट्रार को सूची देना जरूरी नहीं है जबकि सहकारिता पंजीयन के बाद संस्था की हर एक गतिविधियों की सूचना देना संस्था पर अनिवार्यता का कानून लागू होता है |
अग्रवाल सभा मैं दिनक 29/05 को जो पहली कार्यकारिणी की बैठक हुई थी उसमें कुछ सदस्य द्वारा हंगामा कर देने के बाद बैठक समाप्त हो गई थी के बाद से जिस तरीके के बयान महासचिव द्वारा दिए गए जा रहे हैं वह नियम विरुद्ध है किसी को लेकर के संस्था के सदस्यों में महासचिव के प्रति अविश्वास और आक्रोश है
सह चुनाव अधिकारी रमेश अग्रवाल का कहना है कि यह बात सही है कि जिस दिन हम चुनाव अधिकारी बने उस दिन सदस्यता सूची में हमारा नाम नहीं था कारण जो भी हो , वस्तुस्थिति यह है कि उस वक्त तक किसी तरीके की विधिवत सदस्य सूची है ही नहीं है उसी को दुरुस्त कर प्रकाशन की तैयारी की गई है जिस पर दावा आपत्तियों लगातार आ रहे |
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चुनाव अधिकारी राजेश खेमका का कहना है कि 284 सदस्यों की जो सूची है वो आजीवन सदसयों की हैं .बाकी के सदस्य रिनोवल सदस्य कहलाते हैं जिनका हर साल रिनुवल होता है और उन्हें हर साल सदस्यता लेना होती है जब उनसे पूछा गया कि आप के संविधान में तो इसका कोई प्रावधान ही नहीं है तो उन्होंने यह कहते हुए कि हम इस विषय में अभी कोई बात नहीं कर सकते 22 तारीख को हम ये तमाम सूचियां लेकर रजिस्टर्ड फर्म सोसायटी के सामने प्रस्तुत होंगेअब जी निर्णय उनके पास वाही होगा |
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अध्यक्ष नवल किशोर अग्रवाल का कहना है की मैंने संस्था से इस्तीफा दे दिया है और मेरा इस्तीफा 17 जुलाई को मंजूर भी कर लिया गया है. आज की स्थिति में .में किसी भी पद पर नहीं हूं मैं सिर्फ एक सदस्य की हैसियत से अग्रवाल सभा में रह गया हूं ,क्योंकि इस वक्त अग्रवाल सभा में व्यवस्था फैल गई है इसलिए मैं सारी गतिविधियों से कोसों दूर चला गया हूं ,और इंतजार कर रहा हूं कि बवंडर थामे नया अध्यक्ष चुन लिए जाए फिर सक्रिय भूमिका निभाई जाएगी




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