अमरजीत पर फंस गया है पेंच
रायपुर/// छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में
भारी बहुमत से जीती कांग्रेस के कार्यकाल के 6 माह गुजर गए हैं. इन छह माह मैं 68 में से सिर्फ 12 विधायकों को ही अभी तक सत्ता का
सुख मंत्री के रूप में प्राप्त हुआ है. बाकी के विधायक इस सुख को प्राप्त करने के
लिए आलाकमान के निर्देशों का इंतजार कर
रहे हैं | इसी कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण पद इस वक्त छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के
अध्यक्ष का है जो अभी वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास ही है. इसको लेकर जगदलपुर से दिल्ली तक भारी
सरगर्मी शुरू हो गई है मंत्रिमंडल के गठन के वक्त 6 बार से जीते विधायक अमरजीत सिंह
को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है जबकि भारी उम्मीद लगाई जा रही थी कि
उन्हें मंत्रिमंडल में कोई महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है लेकिन
ऐसा नहीं हुआ इस पर कांग्रेस के अंदर खाने में कॉफी जोर शोर से चर्चा रही फिर यह खबर राजनीतिक गलियारों में काफी तेजी से
फैलाई गई कि उन्हें जल्द ही कोई बड़ी जिम्मेदारी आलाकमान के द्वारा सौंपी जा सकती
है. इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब सरगुजा दौरे पर थे तो उन्होंने सार्वजनिक
मंच से यह जानकारी दि की अमरजीत भगत को
जल्द ही आलाकमान कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं इस खबर के वायरल होते ही अध्यक्ष
पद को लेकर सरगर्मियां और तेज हुई और
जगदलपुर से लेकर सरगुजा तक इसके कई दावेदार सामने आ गए राजनीतिक गलियारों में इस
बात की जोरदार चर्चा है की मपीसीसी अध्यक्ष कोई आदिवासी नेता ही होगा |
जैसे ही
आदिवासी नेता के अध्यक्ष बनने की अटकलें तेज हुई तो मनोज मंडावी, मोहन मरकाम जैसे
नाम भी कार्यकर्ताओं ने पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल और प्रभारी पुनिया के सामने
प्रस्तुत किए लेकिन इन सब में सबसे वजनदार नाम अमरजीत भगत का ही था जिसको लेकर यह
भी खबर आ रही थी कि दिल्ली में उनके नाम की घोषणा जल्दी ही की जा सकती है भूपेश
बघेल के दिल्ली प्रवास को लेकर यह अटकलें लगाई जा रही थी कि वह अमरजीत भगत का नाम
आलाकमान से स्वीकृत करने में सफल होंगे पर
ऐसा नहीं हुआ भूपेश बघेल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले जरूर और उन्होंने 6 माह के अपने कार्यकाल का रिपोर्ट
कार्ड भी प्रस्तुत किया रिपोर्ट कार्ड पर तो राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सार्वजनिक
तो हो गई लेकिन निगम मंडल और छत्तीसगढ़
कांग्रेस अध्यक्ष के पद को लेकर किसी भी तरीके की कोई खबर सार्वजनिक नहीं हुई भूपेश बघेल ने विवेकानंद
एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा की छत्तीसगढ़ पीसीसी अध्यक्ष के पद पर कौन होगा इसका
फैसला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ दिया गया है बाकी निगम मंडल आयोग के
पदों को लेकर उचित दावेदारों की सूची तैयार की जाएगी जिसका अनुमोदन भी राहुल गांधी
करेंगे|
भूपेश बघेल
के रायपुर आने पर घटनाक्रम तेजी से बदला इसी कड़ी में सरगुजा के कद्दावर नेता टी
एस सिंहदेव को अचानक दिल्ली से फोन कॉल आया और उन्हें दूसरे दिन 4:00 बजे का समय दिल्ली दरबार में
हाजिर होने के लिए कहा गया टीएससी देव
क्योंकि उस इलाके के कद्दावर नेता थे जिस इलाके से अमरजीत भगत विधायक हैं टीएस
सिंह देव के दिल्ली जाने के बाद घटनाक्रम में तेजी से बदलाव आया और मोहन मरकाम और
मनोज मंडावी भी दिल्ली को कूच कर गए उन्होंने वहां राहुल गांधी से सीधे बातचीत की
और अपनी दावेदारी प्रस्तुत की खबर यह भी राजनीतिक बाजार में गर्म थी की अमरजीत भगत
के की नियुक्ति का पत्र करीब-करीब तैयार हो गया था पर ताजे हालातों के चलते उससे
रोक दिया गया है, मनोज मंडावी, मोहन मरकाम दिल्ली में उन तमाम बड़े नेताओं से मिले
जिनकी दखलअंदाजी इस अध्यक्ष पद को लेकर हो सकती थी बहरहाल अध्यक्ष पद की नियुक्ति
पर अब कई दावेदारों के होने के कारण मामला अधर में लटक गया है लेकिन देर सबेर फैसला किसके पक्ष में होता है
यह देखने वाली




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