******* मुख्यमंत्री ने आज हरेली पर्व से राज्य में गौ-मूत्र खरीदी का किया शुभारंभ*मुख्यमंत्री गौ-मूत्र विक्रय कर बने प्रथम विक्रेता**छत्तीसगढ़ में जैविक खेती को बढ़ावा देने एक और पहल**गौठानों में जैविक खाद के साथ-साथ अब जैविक कीटनाशक का होगा उत्पादन* *****
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2022 //// मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में धूम-धाम से आयोजित हरेली पर्व के अवसर पर राज्य मेंगौ-मूत्र की खरीदी की ऐतिहासिक की शुरूआत की। मुख्यमंत्री ने इस मौके परचंदखुरी की निधि स्व-सहायता समूह को 5 लीटर गौ-मूत्र 20 रूपए में बेचकर
राज्य के पहले विक्रेता बने। निधि स्व-सहायता समूह ने गौ-मूत्र विक्रय की
यह राशि श्री भूपेश बघेल के आग्रह पर मुख्यमंत्री सहायता कोष के खाते मेंजमा की।छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जो पशुपालक ग्रामीणों से दो रूपए किलोमें गोबर खरीदी के बाद अब 4 रूपए लीटर में गौ-मूत्र की खरीदी कर रहा है।मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में धूमधाम से आयोजित हरेली पर्व के मौके पर
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मुख्यमंत्री ने कृषि यंत्रों की पूजा की और प्रदेश की खुशहाली की कामना
की। मुख्यमंत्री ने गौ-माता को चारा खिलाया और उसकी पूजा की। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर राज्य के जैविक खाद उत्पादक 7442 महिला स्व-सहायता समूहों को 17 करोड़ रूपए की प्रोत्साहन (बोनस) राशि का भी वितरण किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि गोधन
न्याय योजना के बहुआयामी परिणामों को देखते हुए देश के अनेक राज्य इसको अपनाने लगे हैं। इस योजना के तहत अमीर हो या गरीब सभी दो रूपए किलो में
गौठानों में गोबर बेच रहे हैं। बीते दो सालों में गोधन न्याय योजना के
माध्यम से गोबर विक्रेताओं, गौठान समितियों और महिला समूहों के खाते में 300 करोड़ रूपए से अधिक की राशि अंतरित हुई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी समृद्ध हो, किसान खुशहाल हो यह हमारी कोशिश है। जैविक खाद और जैविक कीटनाशक का खेती में उपयोग करने से खेती की लागत में कमी आएगी। खाद्यान्न की गुणवत्ता बेहतर होगी, जिससे जन-जीवन का स्वास्थ्य
बेहतर होगा।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार देश की इकलौती सरकार है, जो अपने राज्य के
पशुपालक ग्रामीणों से बीते दो सालों से गोबर खरीद रही है। आज 28 जुलाई को हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में गौ-मूत्र की सरकारी खरीदी की विधिवत शुरूआत हो गई है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की यह पहल वास्तव में राज्य में पशुपालन के
संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ पशुपालक की आय और जैविक खेती को बढ़ावा देना है। राज्य में बीते दो सालों से गोबर की खरीदी और इससे जैविक खाद के निर्माण से राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है। गौ-मूत्र खरीदी का मकसद गौठानों में इससे जैविक कीटनाशक, जीवामृत, ग्रोथ प्रमोटर का निर्माण
करना है, ताकि राज्य के किसानों को कम कीमत पर जैविक कीटनाशक सहजता से उपलब्ध कराया जा सके।यहां यह उल्लेखनीय है कि गोधन न्याय योजना की शुरुआत छत्तीसगढ़ में आज से
2 साल पहले 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन से हुई थी। इसके तहत गौठनों में पशुपालक ग्रामीणों से 2 रुपये किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। देश- दुनिया में गोबर की खरीदी की गोधन न्याय योजना की बेजोड़ सफलता ही गौ-मूत्र की खरीदी का आधार बनी है। गोबर खरीदी के जरिए बड़े
पैमाने पर जैविक खाद का निर्माण और उसके उपयोग के उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए अब गोमूत्र की खरीदी कर इससे कीट नियंत्रक उत्पाद, जीवामृत, ग्रोथ प्रमोटर बनाए जाएंगे। इसके पीछे मकसद यह भी है कि खाद्यान्न उत्पादन की विषाक्तता को कम करने के साथ ही खेती की लागत को भी कम किया जा सके। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित हरेली पर्व के कार्यक्रम में मंत्रियों सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।




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