दिव्य दूत के संस्थापक अनिल चौबे पिछले वर्ष
मंडला के आदिवासियों के बीच में उनके रहन-सहन को जानने के लिए अपने मित्र वरिष्ठ
पत्रकार अमरीश कुमार के साथ भ्रमण पर गए थे चिल्फी से लगे हुए गांव में जब हम वहां
पहुंचे तो हमारे आने की पहले से ही खबर थी वहाँ पहुंचने की सूचना यायावरी संस्थान
द्वारा दी गई थी यायावरी में सतीश जायसवाल के नेतृत्व में देशभर से पत्रकार
साहित्यकार चित्रकार एवं शोधकर्ता आए हुए थे हम लोगों ने उनके रहन-सहन उनकी तकलीफ
है और किस तरह की सरकारी योजनाएं उन तक पहुंच रही हैं का बारीकी से अध्ययन किया
आदिवासियों ने बड़े ही मनमोहक ढंग से हमारी पूरी टीम को धन्यवाद दिया स्वागत किया
और आशा की हमारी छोटी-छोटी जो परेशानियां हैं वह सरकार तक पहुंचे
चिल्फी के आदिवासियों के साथ समय
गुजारने के बाद हम कान्हा किसली के जंगल में भी प्रकृति का आनंद लेने के लिए गए इस
जंगल में अंग्रेजों के जमाने से बना हुआ एक बहुत ही खूबसूरत डाक बंगला है जिसे खार का डाक बंगला कहा जाता है इस डाक
बंगले में राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी जेसे तमाम वीआईपी आकर रुके हैं सूप खर डाक बंगला आज भी उसी पुरानी
पद्धति पर स्थापित है, जिसमें
अंग्रेजों ने अपने लिए बनाया था वही फर्नीचर है घास का छत है शीशम के फर्नीचर आज
भी चमक रहे हैं कान्हा टाइगर रिजर्व इस डाक बंगले को सहेज कर रखे हुए
हैं




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