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प्रभारी बीरबल साहू
कांकेर 24/06/2022/// कल कांकेर के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क कुलगांव मेंदिल्ली से आये साथी पत्रकार नरेंद्र के साथ गया था कांकेर से करीब 8 किलोमीटर दूर कुलगांव मैं 20-22 एकड़ में गांधी ग्राम की कल्पना को विकसित किया गया है जो अधुभुत है यहां पर पुराने पेड़ों के बीच ग्रामीण शैली के छोटे-छोटे कॉटेज बनाए गए हैं इन काटेजों तक पहुंचने के लिए कंक्रीट और टाइल्स की सड़क बनाई गई है जिसमें आप आराम से हैं पहुंच सकें बिजली पानी की व्यवस्था की गई है कुलगांव गौठान से लगा हुआ है रूरल इंडस्ट्रियल पार्क इसे पूर्ण रूप से ग्रामीण परवेश में ही विकसित किया गया है पार्क में मछली पालन मुर्गी पालन के साथ मुर्गी दाना कुकुन से तसर रेशम के धागा बनाना , रागी का आटा तैयार करना कोदो कुटकी को मशीनों द्वारा उनका वैल्यू एडिशन तैयार करना जैसे कुटीर उद्योग हैं
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पुलगांव पार्क की देखरेख के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी बलवीर साहू को कार्यभार दिया गया है बलबीर साहू ने बहुत ही कड़ी मेहनत और सूझबूझ के साथ इस पूरे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क को विकसित करने में रात दिन मेहनत की है उन्होंने बताया है कि विभिन्न विभागों से समन्वय बनाकर इस पूरे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क को विकसित किया गया है इसमें रेशम विभाग है महिला बाल विकास है पशुपालन विभाग है कृषि विभाग है ग्रामीण और पंचायत विभाग है के अलावा प्रशिक्षण विभागों को भी शामिल किया गया है इन सबके पूर्ण सहयोग से हमार गांधीग्राम बनकर तैयार हुआ है
कुलगांव की विशेषता यह है कि केशकाल घाटी के नीचे और किनारे बसे करीब 135 गांव को मिलकर एक क्लस्टर तैयार किया गया है इन घने जंगलों में रहने वाले आदिवासी महिला और पुरुषों के लिए कुलगांव प्रशिक्षण का एक बड़ा केंद्र बन कर तैयार है जहां पर वनोपज के वैल्यू एडिशन का प्रशिक्षण इन ग्रामीणों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण सेवाएं प्राप्त कर ग्रामीण अपने घर गांव में जाकर वन उपज का वैल्यू एडिशन तैयार करके इसकी कुल गांव में लाकर जमा कर देते हैं वैल्यू एडिशन बन जाने के कारण उन वनोपज से इन ग्रामीणों को अच्छी-खासी आमदनी हो रही है
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सबसे अधिक वन उपज में जो वैल्यू एडिशन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है उसमें को कुकून से रेशम का धागा बनाना चार से चिरौंजी बनाना हर्रा बहेरा को साफ करना कोदो कुटकी रागी का वैल्यू एडिशन के हिसाब से तैयार करने जैसे प्रशिक्षण इन ग्रामीणों को दिए जा रहे हैं
रेशम धागे बनाने वाले समूह से जब बातचीत की तो उन्होंने बताया कि हमको यहां पर ट्रेनिंग दी जाएगी रेशम का धागा निकालने के लिए मशीन दी जाएगी हम दो तरह की ट्रेनिंग कहां से ले रहे हैं एक तो यह बिजली से आधारित मशीन से धागा बनाना दूसरा बिना बिजली के मटकी से धागा बनाना इस धागे को बनाकर हम रेशम विभाग में जमा करते हैं रेशम विभाग इस धागे को व्यापारियों को बेचकर हमारे खातों में भुगतान करता है इसमें कुकुन का पैसा काट लेता है और बचा हुआ पैसा हमारे खातों में जमा कर देता है इस तरीके से हमको 1 महीने में 8 से ₹10000 तक की आमदनी हो रही है जो हमारे लिए खुशी की बात है
शासन ने जो सबसे अच्छा काम किया है वह वही है कि महिला स्व सहायता समूह के जरिए ही इन वैल्यू एडिशनओं पर काम किया जा रहा है और उन्हीं को उनकी ट्रेनिंग भी दी जा रही हैं
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छत्तीसगढ़ के ऐसे पहले रूरल इंडस्ट्रियल पार्क ने कांकेर जिले के कुलगांव में आकार ले लिया है, जिसे गांधी ग्राम का नाम दिया गया है, वहां गौठान को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित करने का काम जिला प्रशासन कांकेर ने महिला स्वसहायता समूह के साथ बखूबी कर दिखाया है। यहां छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों के लिए जरुरी अधोसंरचना विकसित की गई है और ग्रामीणों को जोड़कर उत्पादन का काम भी प्रारंभ हो चुका है। इस पार्क में 13 से अधिक आजीविका सम्बन्धी गतिविधियाँ संचालित की जा रही है। जिसमें महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा रहे हैं। कुलगांव में वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए लघु वनोपजों के वेल्यू एडिशन पर आधारित आवासीय प्रशिक्षण केंद्र भी शुरू किया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने हाल में ही भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान कुलगांव गांधीग्राम में छत्तीसगढ़ के प्रथम रूरल इंडस्ट्रियल पार्क का लोकार्पण किया।
छत्तीसगढ़ के पहले रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क में गांधी जी के ग्राम स्वराज की झलक देखने को मिल रही है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल अब रंग ला रही है। राज्य के अन्य गौठानों को भी इसी तरह विकसित करने की योजना है।
गांधी ग्राम कुलगांव परिसर में कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से मछली आहार बनाने की इकाई, मशरूम उत्पादन, स्पान उत्पादन की इकाईयां स्थापित की गई है। इसके अलावा यहां मछलीपालन, बकरी पालन, मुर्गीपालन और वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है। ये सभी कार्य स्थानीय स्व सहायता समूह के लोगों के द्वारा किए जा रहे हैं।
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गांधी ग्राम के इस गौठान में बनाए गए रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क के लिए अधोसंरचना भी विकसित की गई है। इनमें इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, डारमेंट्री, रेसीडेंसियल रूम, किचन हॉल, महिला स्व-सहायता समूह के कार्यशाला के लिए शेड का निर्माण, चबूतरा निर्माण, प्रशिक्षण कक्ष का निर्माण किया गया है। भूमिगत सिंचाई पाईपलाइन भी बिछाई गई है, अलंकृत उद्यान तैयार किया जा रहा है। यहां वन विभाग द्वारा लघु वनोपजों के प्रसंस्करण और वेल्यू एडिशन के लिए आवासीय प्रशिक्षण केन्द्र भी प्रारंभ किया




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