नरेन्द्र कुमार वर्मा (दिल्ली ब्यूरो प्रमुख)
नई दिल्ली //// छत्तीसगढ़ भाजपा में केंद्रीय नेतृत्व बड़ा बदलाव करने जा रहा है। भाजपा के समक्ष राज्य में कई बड़ी चुनौतियां है जिनमें से एक प्रमुख चुनौती पार्टी में बढ़ती गुटबंदी को माना जा रहा है। राज्य में भाजपा के हालात यह हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ एकमात्र नेता बृजमोहन अग्रवाल जमकर लोहा ले रहे हैं। राज्य में 15 वर्षों तक रमनसिंह के नेतृत्व में भाजपा की सरकार रही मगर आज स्थिति यह हैं कि रमनसिंह की पकड़ न तो पार्टी पर है और न ही संगठन में उनकी कोई सुनता है। रमन सिंह का आत्मविश्वास लगातार लड़खड़ा रहा है लिहाजा उन्हें कहना पड़ा कि राज्य में भाजपा की हालत ठीक नहीं है। वहीं दूसरी तरफ धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल, राजेश मूनत जैसे नेता भी सक्रिय नहीं है। राज्य की प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी देवी के अधिकांश कार्यक्रम एवं दौरे के वक्त केवल बृजमोहन अग्रवाल ही सक्रिय दिखाई देते हैं। पुरंदेश्वरी देवी भी भाजपा के मठाधीश नेताओं के व्यवहार के बारे में अच्छी तरह जानती है। लिहाजा उन्होंने अपने राज्य प्रवास के दौरान ऐसे नकारा चेहरों को दूर ही रखना मुनासिब समझा।
भाजपा छत्तीसगढ़ में मिशन 2023 को लेकर बूथ स्तर से लेकर सामाजिक समीकरणों तक अपनी पूरी तैयारियों में जुटी है। भाजपा के पास 2023 में मतदाताओं के पास जाने के लिए केंद्र सरकार के सात वर्षों की उपलब्धियां है। बृजमोहन अग्रवाल कहते हैं कि चार वर्षों के भीतर भूपेश बघेल सरकार ने केंद्र की किसान हित, मजदूर हित, गरीब हित और युवा हित वाली योजनाओं की अनदेखी कर राज्य की जनता के साथ छल किया है। केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों की लाभ छत्तीसगढ़ की जनता को नहीं मिल पाया जिसका सीधा दोष भूपेश बघेल के ऊपर जाता है। बृजमोहन अग्रवाल कहते है कि हम केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का पत्रक लेकर गांव-गांव और घर-घर तक जाएंगे। राज्य में 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा कमर कस कर तैयारियों में लगी है। मगर उसकी तलाश बार-बार सर्वमान्य चेहरे पर आकर थम जाती है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पिछड़े वर्ग से आते है। उनकी काट के लिए भाजपा के पास पिछड़े वर्ग को कोई भी दमदार नेता नहीं है जबकि सामान्य वर्ग से आने वाले रमनसिंह के ऊपर केंद्रीय नेतृत्व कतई भरोसा नहीं करना चाहता। रमनसिंह के खिलाफ पार्टी में पूर्व में भी खासा असंतोष था जो आज भी बरकरार है। पार्टी के पास छत्तीसगढ़ में सर्वमान्य चेहरे के तौर पर केवल बृजमोहन अग्रवाल का नाम सामने आता है।अग्रवाल के संघ के शीर्ष नेताओं के साथ भी 5 दशक पुराने मजबूत रिश्ते रहे हैं। बृजमोहन अग्रवाल जहां सामान्य वर्ग में लोकप्रिय है वहीं राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में उनका काफी सम्मान है और भाजपा से जुड़ी आदिवासी नेता उनके नेतृत्व में विश्वास जता चुके है। राज्य में पिछड़ी जाति के बीच भी बृजमोहन अग्रवाल की गहरी पैठ बताई जाती है। पिछ़ड़ी जाति के जिन नेताओं को रमनसिंह ने किनारे लगा रखा था उन्हें बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य प्रभीरी डी पुरंदेश्वरी देवी और सहप्रभारी नितिन नवीन के सामने पेश कर उनकी खूब पीठ थपथपाई। बृजमोहन अग्रवाल से साफ-सुथरा और सर्वमान्य चेहरा बीजेपी के पास मौजूद नहीं है।
विधानसभा उपचुनाव और नगर निकाय चुनाव में बीजेपी की शिकस्त को देखकर केंद्रीय नेतृत्व मंथन कर रहा है कि अगर यही स्थिति रही तो 2023 में पार्टी की नैया कैसे पार लगेगी। उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद आलाकमान ने विष्णुदेव साय, प्रदीप साय और रमन सिंह को दिल्ली तलब किया था जहां विष्णु साय ने आला कमान के समक्ष 100 पेज के भावी ब्लूप्रिंट को रखा। मगर केंद्रीय नेतृत्व को उसमें भी गहराई नजर नहीं आ रही है लिहाजा पार्टी छत्तीसगढ़ में एक बार फिर नया प्रयोग करने की सोच रही हैं। वैसे भी भाजपा हमेशा प्रयोगधर्मी पार्टी रही है लिहाजा माना जा रहा कि पार्टी बृजमोहन अग्रवाल पर दांव लगा सकती है। माना जा रहा हैं कि बृजमोहन अग्रवाल के सर्वाधिक एक्टिव रहने और कार्यकर्ताओं के बीच लगातार संपर्क करने जैसे अनेक विषय उनके समर्थन में जा सकते हैं। वह जिस गंभीरता के साथ भूपेश बघेल के को घेरने के काम में जुटे है ऐसा उत्साह भाजपा के दूसरे नेताओं में दिखाई नहीं देता।




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