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स्वास्थ्य ,,, बिगड़ी दिनचर्या से युवाओं में बढ़ रही है यूरिक एसिड की समस्या >> डॉक्टर गौरव गोविल

Anil Choubey 27-05-2022 20:53:33


-नरेन्द्र कुमार वर्मा

नई दिल्ली  27/05/2022//// यूरिक एसिड बढ़ने की बीमारी क चपेट में युवा भी तेजी से आ रहे है। खानपान के प्रति बढ़ती लापरवाही और दिनों-दिन बिगड़ती दिनचर्या की वजह से युवाओं में तेजी से यूरिक एसिड की समस्या बढ़ रही है। इसके कारण 30 वर्ष की उम्र के युवाओं के अंदर भी जोड़ो के दर्द और शरीर मे जकड़न की समस्या आ रही है। डॉक्टर कहते हैं कि अगर समय रहते इस बीमारी पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह गंभीर रूप ले सकती है। चिकित्सकों का कहना हैं कि पैरों में सूजन, एड़ियों में दर्द, पांवों की गाठों में सूजन के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में यूरिक एसिड बढ़ जाने से असहनीय दर्द होने लगता है। दिल्ली में मैक्स अस्पताल के जाने माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव गोविल बताते हैं कि यूरिक एसिड के लक्षण शुरूआत में नहीं दिखाई देते मगर पैरो से जुड़ी समस्या होने पर समझ में आता है कि व्यक्ति यूरिक एसिड के विकार से ग्रस्त है।

डॉक्टर गोविल कहते हैं कि आजकल युवाओं में खानपान को लेकर बेहद लापरवाही बरती जा रही है। साथ ही अपनी दिनचर्चा और सेहत को लेकर भी अधिकांश लोग बेफ्रिक रहते है। लिहाजा हमें सबसे ज्यादा अपने खानपान पर ध्यान देना है। डॉक्टर गोविल कहते हैं कि यूरिक एसिड के क्रिस्टल हमारी जोड़ो के बीच में जमा हो जाते है डॉक्टरी भाषा में इन्हें गाउट कहा जाता है यही गाउट मरीज के दर्द को बढ़ाने का काम करते है। इन्हीं की वजह से सूजन आती है। कई बार ऐसा भी होता है कि मरीज में यूरिक एसिड से जुड़े कोई भी लक्षण सामान्य तौर पर नहीं दिखाई देते जिसकी पहचान के लिए डॉक्टर ब्लड सैंपल का इस्तेमाल करते है। डॉक्टर गोविल कहते हैं कि यूरिक एसिड की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को मटर, मशरूम, गोभी, मीट, राजमा, उड़द की दाल, अल्कोहोल,भिंडी, अरबी, पनीर और मछली इत्यादि के सेवन से बचना चाहिए। जबकि मरीज को अपनी खाने की प्लेट में केले, मोटा अनाज, टमाटर, ककड़ी, ब्रोकली, सुरजमुखी का तेल, ऑलिवऑयल, बींस और कम प्रोटीन वाली वस्तुओं को जगह देनी चाहिए। मैक्स अस्पताल दिल्ली से जुड़े हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव गौविल कहते है कि हल्का व्यायाम, पैदल चलना और योग के माध्यम से भी इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है। डॉक्टर गोविल सामान्य तरीके से इस बीमारी के प्राथमिक लक्षणों को समझाते हुए बताते हैं कि जब किसी वजह से हमारी किडनी की छानने की क्षमता यानि फिल्टर करने की गति कम हो जाती है तो  शरीर का यूरिया यूरिक एसिड में बदल जाता है। यूरिक एसिड शरीर के शेल और उन चीजों से बनता है जो हम खाते है। इससे यूरिक एसिड का ज्यादातर हिस्सा किडनी के माध्यम से फिल्टर होकर निकल जाता है। मगर अगर हमारे शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बन रहा है तब किडनी इसे फिल्टर नहीं कर पाती और यह खून एसिड के लेवल को बढ़ा देता है यही हमारी हड्डियों के बीच में जमा हो जाता है जो गाउट बनकर गंभीर समस्या खड़ी कर देता है।डॉक्टर गोविल कहते हैं कि ज्यादा दर्द से परेशान मरीज को बर्फ की सिकाई लाभ प्रदान करती है, वह बताते हैं कि यूरिक एसिड से ग्रस्त मरीज घरेलु उपचार के चक्कर में न पड़े और पैरों में सूजन और दर्द की शिकायत को गंभीरता से लेना चाहिए। यूरिक एसिड का कोई घरेलु उपचार नहीं है मगर आयुर्वेद में इसकी उपचार पध्दति है। डॉक्टर गोविल कहते हैं कि एलोपैथी में यूरिक एसिड का सफल और अच्छा इलाज है हालांकि वह किसी अन्य उपचार प्रक्रिया पर सवाल खड़े नहीं करते मगर मरीजों के हित में जोर देकर कहते हैं कि अगर पैरों में सूजन और जोड़ों में दर्द की शिकायत हो तो फौरन हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लें अन्यथा यह रोग और ज्यादा बढ़ कर आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

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